'इंजेक्शन लगाता था, ब्लड भी निकाल लेता था', 13 साल बाद म्यांमार से घर लौटा बिहार का मजदूर
अररिया का एक युवक 13 साल बाद घर लौटा है, उसे अलग-अलग जगहों पर बंधक बनाकर रखा गया था. पढ़ें पूरी खबर..

Published : January 6, 2026 at 3:01 PM IST
अररिया: 12 साल के लड़के को काम देने का झांसा देकर ब्रोकर ने ऐसे गोरखधंधे में फंसाया, जिससे निकलने में उसे 13 साल लग गए. इस दौरान वह बनारस, गुवाहाटी और नागालैंड से होते हुए म्यांमार पहुंच गया. उससे न केवल जबरन मजदूरी करवाई गई, बल्कि घर भी आने नहीं दिया. जब भी उसने भागने की कोशिश की, उसके साथ मारपीट की गई. आखिरकार 13 साल बाग उसकी घर वापसी संभव हो पाई है.
16 लाख में हुआ था सौदा: इस युवक का नाम मुन्ना उर्फ जमशेद है, जो अररिया के बौसी थाना क्षेत्र के करेला गांव रहने वाला है. मुन्ना ने बताया कि 12 वर्ष की आयु में वह ब्रोकर के चंगुल में फंस गया था. पहले वह बनारस पहुंचा, फिर वहां से गुवाहाटी और नागालैंड होते हुए उसे म्यांमार भेज दिया गया. वहां लोहा गलाने की फैक्ट्री में बंद कर दिया गया. जबरन दिन-रात काम करवाया जाता था. मुन्ना ने बताया कि 16 लाख में मुझे एक रॉड बनाने वाली कंपनी के हाथों बेच दिया गया था.
कंपनी में होती थी मारपीट: मुन्ना के मुताबिक उसने कई बार भागने की कोशिश की लेकिन निकलने नहीं दिया. गेट पर पकड़ने के बाद बहुत मारा गया. सिर फोड़ दिया, शरीर पर भी बहुत चोट आई. सिक्योरिटी इतनी टाइट कर दी गई कि वहां से निकलना नामुमकिन था. कौन सा इंजेक्शन लगाता था, पता नहीं. कई बार तो शरीर से खून भी निकाल लेता था. मां का मुंह देखने के लिए तड़प गया था. अब घर आ पाया हूं.
"काम दिलाने के नाम पर हमको करेला से बनारस लेकर गया था. मुर्शीद, फेंकना और दुखन लेकर गए थे. 10 दिन काम किए. वहां मारपीट भी की गई मेरे साथ. फिर बनारस स्टेशन से मेरे को दूसरे आदमी के हवाले कर दिया. बनारस के आदमी से पैसा ले लिया था. कंपनी ने बोला कि 16 लाख में आपका आदमी आपको देकर गया है. जबतक पैसा पूरा नहीं होगा, नहीं छोड़ सकते. ट्रेन से गुवाहाटा भेजा था. कामाख्या से नागालैंड और वहां से म्यांमार में एक रॉड बनाने वाली कंपनी में रख दिया. जहां बहुत मारपीट होती थी."- मुन्ना, पीड़ित मजदूर

मां की लंबी लड़ाई के बाद मिली रिहाई: बेटे की घर वापसी के लिए मुन्ना की मां जरीना ने लंबी लड़ाई लड़ी. वह अररिया से पटना और दिल्ली की अदालतों की चक्कर लगाती रही. साल 2012 में उन्होंने बौसी थाने में ब्रोकर जावेद, मुर्शिद और दुक्खन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई. अधिकारियों से लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाती रही. आखिरकार 26 दिसंबर को अररिया लौटा. बाल कल्याण समिति की मदद से 5 जनवरी को उसे उसके परिवार के हवाले कर दिया गया.
"पटना से लेकर दिल्ली तक केस किए. डीजीपी साहब के पास भी गए. जज साहब ने आरोपियों को बेल देने से मना कर दिया और आदेश दिया कि तीन महीने में बच्चा लौटाओ. कोर्ट की कुर्की के आदेश के बाद अब जाकर मेरे बेटे को छोड़ा है. 13-14 बरस बाद मेरा बेटा घर लौटा है. उसके साथ बहुत ज्यादती हुई है."- जरीना, मुन्ना की मां
मानव तस्करी का मामला गंभीर: वहीं, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक वर्मा ने कहा कि यह एक मां के सघर्ष की जीत है. इसके साथ ही उन्होंने मानव तस्करी के बढ़ते मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में आए दिन इस तरह की शिकायतें मिलती है, जिसे रोकने की जरूरत है.
"मुन्ना 12 साल की उम्र में गायब हुआ था. जिसके बाद परिजनों के द्वारा रानीगंज प्रखंड के बौसी थाना में आवेदन देकर नामजद कांड दर्ज कराया गया था. इनकी माता लगातार संघर्ष करती रहीं. न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद बच्चों की रिकवरी लंबे समय बाद हुई है. माननीय न्यायालय द्वारा सख्ती के बाद दलालों ने दबाव में आकर वर्मा (म्यांमार) से नागालैंड होते हुए अररिया आरएस छोड़ गया, जिसके बाद बौसी थाना के द्वारा इनको रिकवर किया गया."- दीपक वर्मा, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, अररिया
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