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आईजीएमसी में इलाज होगा महंगा, जानिए किस किस टेस्ट के बढ़े रेट

सोमवार को आरकेएस की बैठक हुई. बैठक में एमआरआई और पैट स्कैन की जांच के नए रेट को भी मंजूरी मिल गई है.

आईजीएमसी मे इलाज होगा महंगा
आईजीएमसी मे इलाज होगा महंगा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 9, 2026 at 7:46 PM IST

3 Min Read
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शिमला: सोमवार को हुई आरकेएस की बैठक में कई निर्णय लिए गए. बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने की. इनके अलावा स्थानीय विधायक हरीश जनार्था और मेयर सुरेंद्र चौहान सहित दूसरे सदस्य भी बैठक में उपस्थित रहे. बैठक में आईजीएमसी में मरीजों के लिए बने स्पेशल वार्ड की दरों में बढ़ोतरी की गई है. इससे हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में इलाज अब महंगा हो गया है. मरीजों को अब इलाज के लिए अधिक पैसा चुकाना होगा.

इसके अलावा बैठक में एमआरआई और पैट स्कैन की जांच के नए रेट को भी मंजूरी मिल गई है. आरकेएस की बैठक में बढ़ती लागत और संसाधनों के बेहतर रखरखाव के चलते शुल्कों में संशोधन का निर्णय लिया गया. नए प्रावधानों के तहत अब आईजीएमसी में पेट स्कैन करवाने के लिए मरीजों को 10 हजार रुपये खर्च करने होंगे. एमआरआई जांच के लिए अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार शुल्क तय किए गए हैं. एमआरआई की सुविधा अब 2700 रुपये से लेकर 4000 रुपये तक उपलब्ध होगी.

स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल (ETV Bharat)

स्पेशल वार्ड में भर्ती होना हुआ महंगा

इसके अलावा स्पेशल वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए भी संशोधित दरें लागू कर दी गई हैं. इससे पहले की तुलना में अब स्पेशल वार्ड का शुल्क बढ़ा दिया गया है, जिससे निजी सुविधा लेने वाले मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा. अब स्पेशल वार्ड के प्रतिदिन 2000 रुपये तक देने होंगे. शेयरिंग में स्पेशल वार्ड में भर्ती होने के लिए 1000 रुपये देने होंगे. पहले इसके लिए 750 रुपये का भुगतान करना पड़ता था. सिंगल स्पेशल वार्ड के लिए 2000 रुपये देने होंगे पहले इसके लिए 1500 रुपये चुकाने पड़ते थे.

दुकानदारों से टर्नओवर का 5 प्रतिशत होगा वसूल

आइजीएमसी परिसर में चल रही सभी दुकानों से उनके वार्षिक टर्नओवर का 5 प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा. अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से आरकेएस की आय में बढ़ोतरी होगी. बैठक में बढ़ती लागत, संसाधनों के बेहतर रखरखाव और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को ध्यान में रखते हुए शुल्कों में संशोधन का निर्णय लिया गया. आम मरीजों और तीमारदारों के लिए यह फैसला महंगाई बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. नए शुल्क आज से प्रभावी हो गए हैं. बैठक में आरकेएस कर्मचारियों को छठा वेतनमान लागू करने और आठ साल का अनुबंध पूरा कर चुके कर्मचारियों को नियमित वेतनमान देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है, जिसे सरकार को भेजा जाएगा. स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार हिम केयर और आयुष्मान भारत योजनाओं की लंबित देनदारियों के भुगतान करेगी. इससे मरीजों को इलाज में कोई परेशानी नहीं आएगी.

स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल का कहना है कि 'अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नए रेट्स से आधुनिक मशीनों के रखरखाव, दवाओं और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा.'

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