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उत्तराखंड में केंद्र से मंजूरी के बाद शुरू होंगे कई प्रोजेक्ट्स! अब भी 400 रोड्स की स्वीकृति का इंतजार

पीएमजीएसवाई के तहत बनने वाली ग्रामीण सड़कें खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां अब भी बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत है.

UTTARAKHAND ROAD PROJECTS
उत्तराखंड रोड प्रोजेक्ट्स (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 21, 2026 at 1:58 PM IST

4 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत करीब 400 सड़कों की स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है. फिलहाल भारत सरकार से इन 400 सड़कों के अलावा 19 PMGSY और 13 वाइब्रेंट विलेज से जुड़े पुलों को भी मंजूरी मिलनी बाकी है. जिससे ग्रामीण क्षेत्र के अलावा सीमावर्ती क्षेत्र को मुख्य मार्ग से जोड़ने में खासी मदद मिलेगी.

उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना यानी पीएमजीएसवाई के चौथे चरण की शुरुआत हो चुकी है. राज्य सरकार की कोशिश है कि अधिक से अधिक ग्रामीण सड़कों को पीएमजीएसवाई फेज-4 के तहत शामिल कराया जाए, ताकि प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा सके. खास तौर पर वे सड़कें, जो पिछले तीन चरणों में किसी कारण से नहीं बन पाई हैं, उन्हें इस चरण में प्राथमिकता के साथ शामिल कराने की तैयारी है.

उत्तराखंड में पीएमजीएसवाई के तीन चरणों के तहत अब तक बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर काम किया जा चुका है. इसी क्रम में फेज-4 के तहत फिलहाल करीब 184 सड़कों को भारत सरकार से मंजूरी मिल चुकी है. इन सड़कों के निर्माण से जुड़े काम को आगे बढ़ाते हुए निविदा प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है. ऐसे में इन 184 ग्रामीण सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है.

हालांकि राज्य के सामने अभी बड़ी संख्या में ऐसी ग्रामीण सड़कों का मुद्दा बना हुआ है, जिन्हें पिछले तीन चरणों में स्वीकृति या निर्माण का लाभ नहीं मिल पाया. राज्य सरकार के मुताबिक करीब 400 ऐसी सड़कें हैं, जिन्हें अब पीएमजीएसवाई फेज-4 में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है. इन सड़कों के लिए फिलहाल भारत सरकार की मंजूरी का इंतजार है. केंद्र से इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी का दायरा और बढ़ेगा.

पीएमजीएसवाई के तहत बनने वाली ग्रामीण सड़कें खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां अब भी बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत है. उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरस्थ गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ना सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहती है. ऐसे में फेज-4 के तहत लंबित सड़कों को शामिल कराने पर राज्य सरकार का विशेष जोर है.

सिर्फ ग्रामीण सड़कों के ही नहीं, बल्कि पुलों के प्रस्तावों पर भी राज्य को केंद्र की मंजूरी का इंतजार है. पीएमजीएसवाई के तहत उत्तराखंड ने पुलों से जुड़े प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे हैं. इनमें राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले पुलों को शामिल किया गया है. साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में पुल निर्माण के प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखे गए हैं.

बताया जा रहा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रस्तावों को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत शामिल किए जाने की तैयारी है. इसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क और पुल संपर्क रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

पीएमजीएसवाई के सीईओ अभिषेक रुहेला ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि राज्य में ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों को पीएमजीएसवाई फेज-4 के तहत अधिक से अधिक संख्या में शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा करीब 400 सड़कें ऐसी हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी का इंतजार है. इन सड़कों को फेज-4 में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं.

अब राज्य की नजर केंद्र सरकार की मंजूरी पर है, यदि इन प्रस्तावों को स्वीकृति मिलती है तो पिछले तीन चरणों में छूटी ग्रामीण सड़कों को निर्माण का मौका मिलेगा. इससे पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने के साथ ही ग्रामीण आबादी को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सकेगी. वहीं पुलों के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने पर नदी-नालों और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों के कारण प्रभावित कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

इस तरह पीएमजीएसवाई का चौथा चरण उत्तराखंड के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राज्य सरकार की प्राथमिकता अब पहले से लंबित सड़कों को इस चरण में अधिक से अधिक संख्या में शामिल कराकर केंद्र से मंजूरी हासिल करने की है.

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