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जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में बिना छाती खोले ऐओर्टिक आर्च ‌एन्यूरिज्म सर्जरी, राजस्थान का पहला ऐसा ऑपरेशन

दो मरीजों की सफल सर्जरी. दोनों मरीज की महाधमनी अरोटा के थोरेसिक आर्च में एन्यूरिज्म था.

Both patients with the surgical team
सर्जरी टीम के साथ दोनों मरीज (ETV Bharat Jodhpur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 5, 2026 at 3:11 PM IST

3 Min Read
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जोधपुर: डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से संबद्ध माथुरादास माथुर अस्पताल (MDM HOSPITAL) के कार्डियोथोरेसिक विभाग के डॉक्टरों ने एओर्टिक आर्च ‌एन्यूरिज्म सफल सर्जरी की. डीब्रांचिंग के साथ इंडोवैस्कुलर टीवार तकनीक से सर्जरी की गई .राज्य में यह इस तरह की पहली सर्जरी मानी जा रही है.

सीटीवीएस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष बलारा ने बताया कि 61 वर्षीय अब्दुल सलीम तथा 65 वर्षीय धान सिंह शरीर की महाधमनी अरोटा के आर्च एन्यूरिज्म से पीड़ित थे. दोनों पेशेंट सीटीवीएस विभाग में जयपुर से रेफर हुए थे. यह सुविधा पूरे राजस्थान में गवर्नमेंट सेक्टर में एमडीएम अस्पताल में ही है. संभवातः डीब्रांचिंग के साथ इंडो वैस्कुलर टीवार टेक्नोलॉजी राजस्थान की प्रथम सर्जरी है. दोनों मरीज गत 6 महीनों से छाती में दर्द, सांस फूलना तथा अधिक रक्तचाप से पीड़ित थे. इनकी सिटी एंजियोग्राफी, एमआरआई , इकोकार्डियोग्राफी में शरीर की महाधमनी अरोटा के थोरेसिक आर्च में एन्यूरिज्म होने की पुष्टि हुई.एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा तथा एमडीएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने सीटीवीएस टीम को बधाई दी. यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री चिरंजीवी चिकित्सा योजना के तहत निशुल्क किया गया.

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छाती में बिना चिरा लगाए सर्जरी: डॉ. बलारा ने बताया कि यह सर्जरी मरीज की बिना छाती खोले की जाती है. इसमें गर्दन में छोटे चीरे तथा जांघ में नीडल पंचर होल के जरिए इंडो वैस्कुलर तकनीक टीवार के जरिए की गई. इस प्रक्रिया से मरीज की रिकवरी तेजी से होती है, जबकि छाती पर चीरा लगाने से मरीज को काफी दिन उपचाराधीन रहते कई बाध्यताएं रखनी पड़ती है.

दस लाख में एक को यह समस्या: सीटीवीएस विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिनव सिंह ने बताया कि एओर्टिक आर्च एन्यूरिज्म दुर्लभ एवं जटिल बीमारी है, जो दस लाख में किसी एक को होती है. यह बीमारी महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में दो से चार गुना ज्यादा होती है. ज्यादातर यह 60 से 70 की उम्र में होती है. बीमारी का मुख्य कारण शरीर की महाधमनी अरोटा में एथेरोइसकेरोसिस (चर्बी जमना), हाई ब्लड प्रेशर, अधिक शुगर, धूम्रपान की लत, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर, छाती में गंभीर चोट या विशेष वायरल डिजीज एवं वैस्कुलाइटिस होता है.

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यह हैं लक्षण: डॉ. बलारा ने बताया कि इस बीमारी के मुख्य लक्षण छाती के साथ जबड़े या कमर में दर्द होना है. जबड़ों के आकार में अधिक बड़े हो जाने के बाद सांस फूलना या आहारनाल दबने लगती है. समय रहते इलाज ना होने से एन्यूरिज्म रप्चर या महादानी का डिसेक्शन इस बीमारी में खतरनाक रूप से जानलेवा हो जाता है. सर्जरी के बाद दोनों मरीज स्वस्थ्य हैं. सर्जरी टीम में बलारा के अलावा डॉ. अभिनव सिंह, डॉ.देवाराम, डॉ.अमित, डॉ. राकेश करनावत, डॉ. भरत चौधरी, डॉ. कीर्ति, डॉ. रितु समेत विभिन्न चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई.

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