इस पंचायत में पर्ची ने तय की प्रधान की कुर्सी, भांजी ने मौसी को दी मात
हमीरपुर की एक पंचायत में प्रधान पद पर जीता का फैसला वोटों से नहीं, बल्कि भाग्य के भरोसे से हुआ है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 1, 2026 at 12:19 PM IST
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश में 31 मई को चुनावी प्रक्रिया संपन्न हो गई है. कई पंचायतों से दिलचस्प एवं रोमांचक चुनावी नतीजे सामने आए हैं. इसी कड़ी में हमीरपुर की ग्राम पंचायत बफड़ी में प्रधान पद का चुनाव इस बार पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया. मुकाबला इतना रोमांचक और कांटे का रहा कि विजेता का फैसला मतों से नहीं, बल्कि पर्ची (लॉटरी) के जरिए करना पड़ा. जिसमें भांजी अनु वाला ने अपनी मौसी एवं पूर्व प्रधान शकुंतला देवी को मात देकर प्रधान पद पर कब्जा जमा लिया.
दो प्रत्याशियों को मिले एक-बराबर वोट
ग्राम पंचायत बफड़ी में प्रधान पद के लिए हुए त्रिकोणीय मुकाबले में अनु वाला, शकुंतला देवी और रेणुका ठाकुर मैदान में थीं. मतदान के बाद जब मतगणना शुरू हुई तो प्रत्याशियों और समर्थकों की नजरें हर राउंड पर टिकी रहीं. देर रात तक चली मतगणना के बाद सामने आए परिणाम ने सभी को हैरान कर दिया. अनु वाला और शकुंतला देवी दोनों को समान रूप से 343-343 वोट मिले, जबकि तीसरी प्रत्याशी रेणुका ठाकुर पीछे रहीं. दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के बराबर वोट मिलने के कारण विजेता को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई. मतगणना केंद्र के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे और सभी की नजरें निर्वाचन अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी थीं.
पर्ची निकालकर तय की हार-जीत
निर्वाचन नियमों के अनुसार टाई की स्थिति में पर्ची निकालकर विजेता का चयन किया जाता है. इसी प्रक्रिया को अपनाते हुए अधिकारियों की मौजूदगी में पर्ची निकाली गई. पर्ची में अनु वाला का नाम निकलते ही उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया. रात करीब एक बजे परिणाम घोषित होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए जीत का जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी. वहीं, शकुंतला देवी के समर्थकों में मायूसी देखने को मिली.
प्रधान पद के लिए आमने-सामने थी मौसी-भांजी
यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि चुनावी मैदान में मौसी और भांजी आमने-सामने थीं. दोनों के बीच यह चुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था. शकुंतला देवी पंचायत राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं. वह चार बार पंचायत प्रधान और एक बार बीडीसी सदस्य रह चुकी हैं. लंबे राजनीतिक अनुभव और मजबूत जनाधार के बावजूद इस बार उन्हें बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. वहीं, इस चुनाव ने इस बार को भी साबित कर दिया की राजनीति में कोई अपना या पराया नहीं होता है.
भाग्य के भरोसे रहा प्रधान पद का चुनाव
वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बफड़ी पंचायत के चुनावी इतिहास में यह मुकाबला लंबे समय तक याद रखा जाएगा. आमतौर पर चुनावों में कुछ वोटों का अंतर देखने को मिलता है, लेकिन यहां दोनों प्रमुख प्रत्याशियों को बराबर वोट मिलने के कारण फैसला पूरी तरह भाग्य के भरोसे चला गया. आखिरकार पर्ची ने प्रधान की कुर्सी का फैसला किया और अनु वाला पंचायत की नई प्रधान बन गईं. इस अनोखे चुनाव परिणाम की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है. लोग इसे पंचायत चुनावों के सबसे दिलचस्प और यादगार मुकाबलों में से एक मान रहे हैं, जहां एक वोट भी निर्णायक साबित नहीं हो सका और अंत में किस्मत ने विजेता का चयन किया.

