चान्हो की होनहार बेटी अंकिता रानी बनीं सीए, रांची सेंटर में टॉप-3 में स्थान
रांची की अंकिता रानी ने सीए की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है.

Published : March 3, 2026 at 6:19 PM IST
रिपोर्ट-चंदन भट्टाचार्य.
रांचीः द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई), नई दिल्ली द्वारा जनवरी-2026 सत्र में आयोजित सीए फाइनल परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. इस प्रतिष्ठित परीक्षा में रांची परीक्षा केंद्र से अंकिता रानी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए टॉप-3 में तीसरा स्थान हासिल किया है. अंकिता को कुल 323 अंक प्राप्त हुए हैं. अंकिता रांची जिले के चान्हो प्रखंड के चोरेया गांव की निवासी हैं. उनकी इस सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है.
बड़ी बहन से मिली प्रेरणा
अंकिता एक साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता ब्रज देव साहू कपड़ों का व्यवसाय करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और कभी भी आर्थिक स्थिति को पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया. अंकिता की बड़ी बहन भी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिनसे अंकिता को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिला. पिता और बहन के सहयोग ने अंकिता की तैयारी को मजबूत आधार दिया.

ऑक्सब्रिज स्कूल मांडर से प्रारंभिक शिक्षा
अंकिता की प्रारंभिक शिक्षा मांडर स्थित ऑक्सब्रिज स्कूल से हुई. वहां बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उनका नामांकन रांची के प्रतिष्ठित डीएवी कपिलदेव स्कूल में हुआ. शुरू से ही मेधावी रहीं अंकिता ने लक्ष्य तय कर कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी. सीए फाइनल की तैयारी के दौरान उन्होंने पूरे सिलेबस का तीन से चार बार रिवीजन किया.अंकिता का मानना है कि सीए बनना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक होती है, लेकिन एक बार सफलता मिल जाए तो करियर के बेहतरीन अवसर खुल जाते हैं.
ऑनलाइन कोचिंग से मिला फायदा
तैयारी के लिए अंकिता ने छह विषयों की ऑनलाइन कोचिंग ली. उनका कहना है कि ऑनलाइन क्लास का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी पढ़ाई कर सकते हैं. वे रोजाना लगभग 16 घंटे पढ़ाई करती थीं और जब तक कोई टॉपिक पूरी तरह समझ नहीं आता था, तब तक उसे छोड़ती नहीं थीं. उनके अनुसार अनुशासन, नियमित रिवीजन और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है.
अंकिता ने बताया कि आईआईटी, मेडिकल और मैनेजमेंट जैसी पढ़ाई में लाखों रुपये खर्च होते हैं, जबकि सीए की पढ़ाई अपेक्षाकृत कम खर्च में पूरी की जा सकती है. उन्होंने कहा कि करीब 20 हजार रुपये परीक्षा फॉर्म और किताबों पर खर्च होते हैं, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के छात्र भी इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं.

नौकरी करना चाहती हैं अंकिता
भविष्य की योजना पर अंकिता ने कहा कि वह फिलहाल नौकरी करना चाहती हैं और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल फोन से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसका सही उपयोग करना चाहिए. यदि छात्र मोबाइल का सदुपयोग करें तो वह पढ़ाई में सहायक साबित हो सकता है.
अंकिता की सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे चान्हो और रांची के छात्रों के लिए प्रेरणा है. उनकी मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें-
देवघर की आयुषी मुखर्जी ने नीट पीजी 2025 में लहराया परचम, देशभर में हासिल किया 116वां रैंक
यूपीएससी आईएफएस में टॉप करने वाली कौन हैं कनिका अनभ?, जिन्होंने रोशन किया झारखंड का नाम

