अंकिता से लेकर एंजेल चकमा, क्या बैक टू बैक घटनाओं से बीजेपी की स्ट्रेटजी हुई फेल? पार्टी बोली- 'नहीं हुए डिरेल'
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अंकिता हत्याकांड मामला हो या गिरधारी शाहू का बयान सभी में घिरी बीजेपी, कार्यक्रमों पर पड़ा असर

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 7, 2026 at 6:27 PM IST
|Updated : January 7, 2026 at 7:38 PM IST
धीरज सजवाण
देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 अब धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है. ऐसे में यह समय प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों के लिए अपनी चुनावी तैयारी को मजबूत करने और संगठन के प्रचार-प्रसार को लेकर काफी अहम है, लेकिन अपने चुनावी मैनेजमेंट और एक प्रोफेशनल चुनावी स्ट्रेटजी के लिए जाने जाने वाली बीजेपी इस बार पिछड़ती नजर आ रही है. क्योंकि, बीजेपी इस समय अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने की जगह कोई और मामलों में घिरी हुई है.
महिला सुरक्षा के मामले में आक्रोश झेल रही बीजेपी: जानकार मानते हैं कि अक्सर सॉफ्ट हिंदुत्व की पिच पर धुआंधार बैटिंग करने वाली बीजेपी फिलहाल उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के मामलों में जनता के आक्रोश का झेल रही है. बात चाहे अंकिता भंडारी हत्याकांड के ताजा घटनाक्रम की हो या फिर सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के बयान की. दोनों मामलों में बीजेपी को पब्लिक की नाराजगी झेलनी पड़ी है. इसके अलावा बीजेपी से जुड़े छोटे नेता भी पार्टी की जमकर किरकिरी करा रहे हैं.
झेलना पड़ रहा जनता का गुस्सा: उत्तराखंड में लगातार भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती मुश्किलों का असर उनके पब्लिक प्रोग्रामों में भी देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ पार्टी अपने संगठन विस्तार और तमाम संगठनात्मक कार्यक्रमों को लेकर पिछले महीने से रणनीति तैयार कर रही थी, लेकिन आज जब पार्टी के लोग पब्लिक के बीच में इन कार्यक्रमों को लेकर जा रहे हैं तो कार्यक्रम पीछे रह जाते हैं और पब्लिक का गुस्सा पहले देखने को मिलता है.
बीजेपी से जुड़े लोगों का भी टूट रहा भरोसा: हालात ऐसे बने हैं कि सियासी दबाव का असर पार्टी के सांगठनिक कार्यक्रमों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. पार्टी के खुद के लोगों का भरोसा पार्टी से टूट रहा है. एक के बाद एक कार्यकर्ताओं की स्थिति पर सोशल मीडिया पटा हुआ नजर आ रहा है. इतना ही नहीं, पार्टी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक के विरोध की तस्वीरें आजकल सोशल मीडिया पर आम हो चली हैं.

अलग-अलग गलतियों के चलते दांव पड़ रहा उल्टा: मैदान से लेकर पहाड़ तक अंकिता भंडारी केस एक बार फिर सियासत के केंद्र बिंदु बन चुका है. बीजेपी ने इस मामले में भले ही कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की लाख कोशिशें कर ली हों, लेकिन अलग–अलग स्तरों पर हुई गलतियों के चलते से मामला उल्टा ही पड़ रहा है.
सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध के स्वर तेज हुए हैं. नेताओं का घेराव, टिप्पणियां और काले झंडे दिखाए जाने से दबाव बढ़ा है. उसका सीधा असर संगठन की गतिविधियों पर पड़ने लगा. हालात ऐसे बने कि तय कार्यक्रम बदले गए, कई आयोजनों को टालना पड़ा. अंदरखाने असहजता बढ़ी और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें भी असरदार साबित नहीं हो पा रही हैं.

एक के बाद एक मुद्दों ने बीजेपी को हुआ नुकसान: इतना ही नहीं, बीते कुछ दिनों में सामने आए एक के बाद एक मुद्दों के बाद पार्टी का एक बड़ा वर्ग असहज बना हुआ है. पार्टी के लोग कार्यक्रमों में या तो खानापूर्ति करते दिखाई दे रहे हैं या फिर कार्यकर्ता बैठा हुआ है. जहां एक तरफ ऐसे में अंकिता भंडारी केस के नए घटनाक्रम ने बीजेपी को बैकफुट पर लाया तो वहीं त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या ने भी नुकसान किया.
बची खुची कसर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के विवादित बयान ने पूरी कर दी. जहां उन्होंने पार्टी के एक कार्यक्रम में बिहार की लड़कियों पर विवादित बयान दे डाला. इसके अलावा हल्द्वानी में बीजेपी पार्षद अमित बिष्ट पर युवक की हत्या का आरोप लग गया. जिसमें बाप-बेटे दोनों को जेल जाना पड़ा. मामले ने तूल पकड़ा तो बीजेपी ने अमित को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

जनता के सवालों को नजरअंदाज करने पर झेलना पड़ता है विरोध: इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नेगी का कहना है कि सरकार जब-जब जनता के सवालों को नजरअंदाज करती है और जनता के मुद्दों के साथ नजर नहीं आती है, तब तब सरकारों को इस तरह का विरोध का सामना करना पड़ता है. यह चुनावी वर्ष में किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक बड़ी चुनौती होता है.
"अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव है. जिस तरह से बीजेपी की अभी स्थिति है, वो काफी डिफेंसिव हैं. चुनावी रणनीति के लिहाज से बीजेपी हमेशा मजबूत नजर आती थी, लेकिन इस बार जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे अंकिता भंडारी समेत तमाम जन मुद्दों के चलते बीजेपी अपने ट्रैक रिकॉर्ड से डिरेल होती नजर आ रही है."
- कुलदीप नेगी, वरिष्ठ पत्रकार -
बीजेपी कार्यकर्ता ही अंकिता केस में कर रहे सीबीआई जांच की मांग: उन्होंने कहा कि जिस तरह से आज सोशल मीडिया पर बीजेपी के तमाम कार्यकर्ता ही आज अंकिता भंडारी के मुद्दे पर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. कई लोगों के इस्तीफा भी देखने को मिले हैं. ऐसे में पार्टी को सोचना चाहिए कि क्या हम अपने 2027 के लक्ष्य की सही दिशा में जा रहे हैं या नहीं?

4 साल नफरत की राजनीति की, आज खुद जनता की नफरत का सामना कर रही बीजेपी: वहीं, अपने परफॉर्मेंस को लगातार सुधार रही कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी की इस परिणीति के पीछे भारतीय जनता पार्टी की ही अकुशल राजनीति है. बीजेपी सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति करती है. जिसका असर देखने को मिल रहा है.
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी का कहना है कि जिस तरह से बीजेपी पिछले 4 सालों से केवल धार्मिक मुद्दों पर तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है. उसकी वजह से आज यह देखने को मिला. बीजेपी केवल धार्मिक तुष्टिकरण के अलावा जनता के मुद्दों पर बिल्कुल भी बात नहीं करती है.
गरिमा का कहना है कि यही वजह है कि आज भारतीय जनता पार्टी का संगठन पूरी तरह से डिरेल हो चुका है. इसके अलावा बीजेपी का जन-जन की सरकार जनता के द्वारा कार्यक्रम फ्लॉप नजर आ रहा है. इस कार्यक्रम में जो भी बीजेपी नेता जा रहा है, उसे विरोध झेलना पड़ रहा है. प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भी काले झंडे दिखाकर जनता वापस भेज रही है.
"जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, आज वही उस गड्ढे में नजर आ रहे हैं. जो बीजेपी प्रदेश में पूरे 4 साल नफरत की राजनीति करती रही, आज उसे ही जनता की नफरत का सामना करना पड़ रहा है."
- गरिमा दसौनी, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता -
तमाम विरोधों के बाद भी बीजेपी बोली- हम नहीं हुए डिरेल: इन तमाम विषयों पर बीजेपी कोई खास जवाब नहीं दे पा रही है. हालांकि, पार्टी का यह कहना है कि हमारे सभी कार्यक्रम बिना किसी रूकावट के चल रहे हैं. बीजेपी प्रदेश प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार का कहना है कि केंद्र और प्रदेश स्तर के सभी कार्यक्रम चल रहे हैं. सभी कार्यकर्ता उसमें भाग ले रहे हैं.

"कांग्रेस जिस तरह से पूरे प्रदेश में माहौल खराब कर रही है और जिस तरह से झूठे षड्यंत्र कर रही है, उसके खिलाफ भी बीजेपी ने पूरे प्रदेश में पुतला दहन कार्यक्रम किया था. जो कि वृहद स्वरूप में पूरे प्रदेश में किया गया था."
- कुंदन परिहार, प्रदेश महामंत्री, बीजेपी -
वहीं, बीजेपी में पार्टी कार्यकर्ताओं के ही ओर से लगातार उठ रहे विरोध के सुर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने जवाब दिया. उनका कहना है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं का कोई विरोध इस तरह से नहीं है, लेकिन कांग्रेस झूठ फैलाने का काम कर रही है.
"जिस तरह से कांग्रेस झूठ प्रदेश में फैला रही है. निश्चित तौर से वो बेहद संवेदनशील है. उनके भावी कार्यकर्ता भी उससे कुछ प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही इस झूठ से पर्दा उठेगा और सभी को समझ आएगा कि यह पूरा षड्यंत्र कांग्रेस का था. यह केवल पार्टी को बदनाम करने की एक कोशिश थी."
- मनवीर चौहान, प्रदेश मीडिया प्रभारी, बीजेपी -
बीजेपी के कई अहम कार्यक्रम प्रभावित हुए, कई असर-
- अटल जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम और विचार गोष्ठियां प्रभाव नहीं छोड़ सकी.
- प्री-एसआईआर, बीएलए 2 जैसे संगठनात्मक कार्यक्रम प्रभावित रहे.
- 'जन-जन की सरकार, जनता के द्वार' कार्यक्रमों में जनता का विरोध देखने को मिल रहा है.
- 'विकसित भारत जी राम जी' योजना पर प्रेस करने आए मुख्यमंत्री को योजना की बजाय अंकिता मामले में ज्यादा बोलना पड़ा.
- 'विकसित भारत जी राम जी' जनजागरण अभियान अब तक शुरू नहीं हो पाया.
- खेल महाकुंभ का नाम बदलकर मुख्यमंत्री चैंपियन ट्रॉफी कर दिया गया. इसे भी बीजेपी भुनाने में नाकामयाब रही.
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