बस्तर में हल्लाबोल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ की नियमितीकरण की मांग
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 9 मार्च को विधानसभा घेराव किया जाएगा.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 6:23 PM IST
बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जगदलपुर शहर की कृषि मंडी प्रांगण में धरना देने के बाद जगदलपुर शहर में विशाल रैली निकाली गई.
बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ की रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए गुजरी. रैली में शामिल हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. संघ ने देश के प्रधानमंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है.
मानदेय कम होने से नाराजगी
संघ की जिला अध्यक्ष प्रेमवती नाग ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को नियुक्त हुए करीब 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन कार्यकर्ता और सहायिका का मानदेय राशि कम है. कार्यकर्ताओं का मानेदय 10 हजार और सहायिकाओं का मानदेय 5 हजार है. 1995 में शिक्षाकर्मी और पंचायतकर्मी भर्ती किए गए हैं, उनकी सैलरी 50 हजार से ज्यादा पहुंच गई है.

राज्य सरकार और केंद्र सरकार 10 हजार रुपये में उनके पालतू जानवरों को बिस्किट खिलाते हैं. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मिलने वाले 10 हजार रुपये में फोटोकॉपी, ट्रांसपोर्ट , ऑनलाइन कार्य, मोबाइल रिचार्ज जैसे कार्य किये जाते हैं. करीब 26 योजनाओं पर कार्य किया जाता है. इतना काम कराने वाली सरकार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करके नियमितीकरण करना चाहिए-प्रेमवती नाग, जिलाध्यक्ष, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होती है तो आगामी 09 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा. उसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल किया जाएगा. फिलहाल 2 दिनों से हड़ताल जारी है और हजारों की संख्या में कर्मचारी शामिल हैं.

प्रेमवती नाग ने बताया कि हड़ताल में जाने की वजह से आंगनबाड़ी से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं. बच्चों को खाना नहीं मिल रहा है. PMY कार्य रुका हुआ है. गृह भेंट छूट गया है. गर्भवती महिलाओं को डिलवरी के लिए अस्पताल ले जाने का कार्य रुका हुआ है. बच्चे आंगनबाड़ी जाकर वापस घर लौट रहे हैं.

