सिलाई मशीन ने बदली दुनिया..हाउसवाइफ से बनी एंटरप्रेन्योर, सलाना 30 लाख का टर्नओवर
आंचल पहले सिर्फ गृहणी थीं, आज वो खुद लखपति हैं और 6 अन्य परिवारों को भी रोजगार दे रही हैं. पढ़िए सरताज अहमद की रिपोर्ट

Published : June 3, 2026 at 8:51 AM IST
गया: बिहार के गयाजी से मेहनत, लगन और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं आंचल की कहानी सामने आई है. उन्होंने शादी के 10 सालों बाद शून्य से कारोबार शुरू किया और एक साल में 30 लाख का टर्न ओवर कमाया. आंचल अपनी सफलता का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देती हैं.
6 परिवारों को दे रहीं रोजगार: आंचल कुमारी पहले एक घरेलू महिला थी. लेकिन आज न सिर्फ वो खुद लखपति बनीं हैं, बल्कि 6 अन्य परिवारों को सम्मानजनक रोजगार भी दे रही हैं. आज उनके रेडीमेड गारमेंट्स की फैक्ट्री यूनिट में शर्ट, टी-शर्ट और ट्राउजर जैसे आधुनिक वस्त्र तैयार होते हैं. कमाल की बात यह है कि इनके ब्रांड की चमक अब बिहार और झारखंड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केरल और गुजरात जैसे बड़े राज्यों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं.
पूर्व सीएम नीतीश को श्रेय: आंचल 2 साल पहले बेरोजगार थीं लेकिन अब वो एक सफल उद्यमी हैं, भले ही शादी के 10 सालों बाद उन्होंने कारोबार शुरू किया हो लेकिन अब उनके कारोबार का टर्न ओवर 25 से 30 लाख तक पहुंच चुका है, अंचल अपनी सफलता का श्रेय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देती हैं, वो कहती हैं कि नीतीश कुमार भले ही बिहार की सत्ता की कमान अब नहीं संभाल रहें हों लेकिन जाने से पहले हम महिलाओं का उन्होंने बड़ा उत्थान कर दिया है. आंचल ना सिर्फ खुद उद्यमी बनी हैं बल्कि कई बेरोजगार महिलाओं को रोजगार से भी जोड़ा है.
रेडीमेड कपड़ा उद्योग की शुरुआत: आंचल ने गयाजी के मानपुर स्थित रामबाग मोहल्ले में रेडीमेड कपड़ा उद्योग लगाया है. यहां वो मैन्युफैक्चरिंग करती हैं और देश भर में उनके कपड़े की सप्लाई है. ईटीवी भारत से बात करते हुए अपनी सफलता कहानी बताते हुए वो कहतीं हैं कि वो एक घरेलू महिला थी, शादी के 10 सालों तक अपने पति की कमाई पर निर्भर थीं, लेकिन इस दौरान खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कभी सोचा नहीं.

कोरोना के बाद बदले हालात: लेकिन कोरोना कल के बाद जब घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई तब उन्हें मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के बारे में पता चला. उन्होंने अपने पति से रोजगार के संबंध में बात की. हालांकि शुरू में घर के सभी सदस्यों ने उनसे कहा कि ये संभव नहीं हो पाएगा. आंचल कहती हैं कि शायद घरवालों ने समझा होगा कि जो महिला 10 सालों तक घर के काम काज में लगी रही भला वो कैसे कारखाना चला सकती है ? मगर फिर मेरे इरादे और जज्बे को देखकर पति और घर के अन्य सदस्यों ने इस काम के लिए हामी भरी.
लाखों का टर्न ओवर: अपने सफर के बारे में बात करते हुए आंचल कहती हैं कि मैं एक हाउस वाइफ थी, बिहार के जहानाबाद की रहने वाली हूं. 2016 में मेरी शादी गयाजी के टिकारी रोड मोहल्ले के निवासी रंजित कुमार से हुई थी. मेरा 11 साल का एक बेटा है. मैं जहानाबाद के ही एक कॉलेज से ग्रेजुएट हूं. उन्होंने आगे बताया कि 2022 में उन्होंने रेडीमेड कपड़े बनाने की फैक्ट्री लगाने के लिए आवेदन दिया था. 2023 में उनके आवेदन का सिलेक्शन हुआ और फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने इस काम की शुरूआत की.
महिलाओं को भी दिया काम: आंचल के मुताबिक मौजूदा समय में उनके कारखाने में 22 हाईटेक इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें लगी हुई हैं. उनके यहां 7 सिलाई मास्टर हैं, एक कटिंग मास्टर और अन्य कर्मचारी भी काम कर रहे हैं. उनके यहां चार महिलाएं भी काम करती हैं, जिन्हें उन्होंने रोजगार दिया है. आंचल बताती हैं कि शुरुआती सालों में उनका हर साल 25 से 30 लाख का टर्नओवर हो रहा है लेकिन इस साल 2026 में उनके टर्न ओवर में उछाल की संभावना है.
"शादी से पहले ही माता-पिता ने मुझे सिलाई कढ़ाई का भी काम सिखाया था जो आज मेरे काम आ रहा है, अभी मेरे कारखाने में ट्राउजर टी-शर्ट, हाफ पैंट, ट्रैक सूट, ठंड के मौसम में विंड-चीटर, हुडी और अन्य सीजनली कस्टमाइज्ड आइटम बनते हैं."-आंचल कुमारी, महिला उद्यमी

शून्य से शूरू किया सफर: आंचल कहती हैं कि जब वह पढ़ रही थी तभी से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का शौक था लेकिन ग्रेजुएशन के बाद ही उनकी शादी करा दी गई. शादी के 10-11 सालों बाद जब मैंने जब इस काम को शुरू किया तो मेरे लिए ये आसान नहीं था. आंचल के मुताबिक जब आप जीरो से अपना सफर शुरू करेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना होगा. खुद को सशक्त नहीं रखेंगे तो आप समस्याओं से डट कर मुकाबला नहीं कर पाएंगे. हालांकि समस्याओं जूझने के लिए मेरे पति ने हिम्मत बढ़ाई तो मैं आगे बढ़ सकी.
देश भर में कपड़े की सप्लाई: आंचल के कारखाने से बने कपड़ों की सप्लाई देश भर में होती है. इनमें केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्य शामिल हैं. आंचल को कस्टमाइज्ड आर्डर मिलते हैं और वह उसे तैयार कर अपने व्यापारियों को भेजती हैं. कारखाने में वह खुद दिन-रात लगकर मेहनत करती हैं. उनका लक्ष्य है की वह एक ऐसी सफल उद्यमी महिला बने जहां उनके द्वारा 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार दिया जा सके. वह चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएं.
पति ने दिया साथ: आंचल के इस सफर में उनके परिवार ने उनका बहुत सहयोग किया. उनके पति रंजन कुमार कहते हैं कि मेरी पत्नी ने मुझे एक दिन कहा कि वह खुद का रोजगार करना चाहती है, पहले तो मैं ज्यादा गंभीर नहीं हुआ, मुझे लगा कि वह यूं ही मजाक कर रही है, लेकिन जब वह गंभीर दिखी तो मैने उसे मना किया की ये आसान काम नहीं है, लेकिन उसकी लगन और मेहनत को देखकर मैंने उसका साथ दिया.
योजना के लाभुक के रूप में हुआ चयन: रंजन आगे बताते हैं कि इसके बाद आंचल का चयन मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के लाभुक के रूप में हुआ. फिर उसने यहां कारखाना लगाया वह पूरे कारखाने को खुद चलाती है. सप्लाई से लेकर डिजाइन और सभी प्रकार के कार्य वो खुद अपनी निगरानी में कराती है. मैं कभी-कभार ज्यादा काम होने पर उसके सहयोग के लिए आता हूं.
"मुझे खुशी है कि मेरी पत्नी अब एक सफल उद्यमी है,लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने महिलाओं के लिए ऐसा अवसर दिया जिससे महिलाएं आगे बढ़ी हैं." - रंजन कुमार, आंचल के पति

"शादी के बाद ऐसा करना आसान नहीं था, एक अलग जिम्मेदारी हो जाती है जो आपको निभाना पड़ता है. फिर बेटे का जन्म हुआ और मैं उसी में लग गई , हालांकि ससुराल वालों ने या पति ने मुझे पढ़ने से रोका नहीं था, अब जो भी हूं उस से खुश हूं."- आंचल कुमारी, महिला उद्यमी
लड़कियों को सिखाती हैं काम: आंचल कुमारी ना सिर्फ खुद का व्यापार कर रही हैं बल्कि वो महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं. जो लड़कियां गरीब घर से संबंध रखती हैं और वो किसी तरह अभी पढ़ाई कर रही हैं वैसी लड़कियों को आंचल सिलाई कढ़ाई का काम सिखा रही हैं. इसके अलावा पार्ट टाइम काम सीखाने और काम करने के बदले वो उन लड़कियों को सैलरी भी देती हैं, जिससे उन लड़कियों को खुद की पढ़ाई में मदद भी मिल रही है.
पढ़ाई जारी रखने में मिल रही मदद: आंचल के कारखाने में कार्यरत निशा कुमारी कहती है कि वह ग्रेजुएशन पार्ट थर्ड की छात्र हैं. वह पढ़ाई के साथ यहां पार्ट टाइम काम करती है और सैलरी के पैसों से वह अपनी पढ़ाई को जारी रख रही हैं. निशा ने बताया कि इससे वह अपने माता-पिता की आर्थिक सहायता भी कर रही है. निशा के मुताबिक आंचल की मदद से वह आत्मनिर्भर बन रही हैं.

"आंचल दीदी सिलाई कढ़ाई का काम भी सिखाती है, जो मेरे भविष्य के लिए काफी अच्छा भी साबित हो सकता है. हालांकि मैं सरकारी नौकरी की तैयारी अभी से कर रही हूं. मुझे शिक्षक बनने की इच्छा है." - निशा कुमारी, महिला कर्मचारी
"मैं खुद तो अधिकारी या सरकारी कर्मचारी नहीं बन सकी, लेकिन अब मैं उस मुकाम पर हूं कि अपनी जैसी लड़कियों की मदद कर सकूं, इसलिए मैं उन छात्राओं को भी अपने कारखाने में काम सीखने और पार्ट टाइम नौकरी करने का मौका देती हूं जो पढ़ाई तो जारी रखे हुई हैं, लेकिन आर्थिक तंगियों की वजह से आगे वो कुछ नहीं कर सकती हैं या उनकी पढ़ाई रुक सकती है. इसलिए निशा कुमारी जैसी कई और छात्राएं मेरे यहां पार्ट टाइम काम कर रही हैं." आंचल कुमारी, महिला उद्यमी
अपने परिवार के पास ही काम: आंचल के कारखाने में काम करने वाले एक कारीगर संदीप कुमार शर्मा कहते हैं कि मैं कोलकाता में काम करता था. अभी कुछ महीनो से यहीं अपने गांव में रह कर काम कर रहा हूं, मुझे अच्छा लगता है कि मैं अपने घर के परिवार के साथ रह कर यहीं रोजी रोटी कमा रहा हूं.

"बाहर में कई तरह की समस्याएं होती हैं आपको उसका सामना करना पड़ता है, मुझे यहां काम के पैसे मिलते हैं. एक हाफ पैंट की सिलाई के 8 रुपए मिलते हैं, हर दिन 150 से 200 पैंट सिल लेता हूं." - संदीप कुमार शर्मा, कारीगर
प्रवासी मजदूर की खुशी: एक कारीगर विजय कुमार कहते हैं कि वह पहले प्रवासी मजदूर थे. कोरोना काल में वे दिल्ली में काम करते हुए फंस गए थे, लेकिन जब यहां उनके मोहल्ले रामबाग मानपुर नवादा रोड में आंचल कुमारी ने अपना कारखाना खोला तो वह यहीं आकर काम करने लगे. विजय के मुताबिक अगर वह यहां नहीं रहते और परदेस में काम करते तो आज उनकी स्थिति भी उन्हीं प्रवासी मजदूरों की तरह होती जो एलपीजी गैस की किल्लत के कारण काम धाम छोड़कर घर वापस हो रहे हैं.

"मुझे खुशी है कि मैं अपने घर पर रहकर ही अच्छा रोजगार कर रहा हूं, परदेस में प्रवासी मजदूर बनकर अब काम नहीं करना पड़ता है."- विजय कुमार, कारीगर

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