अब दिल्ली में लड़ी जाएगी बिहार कांग्रेस की लड़ाई, 8 सितंबर को AICC मुख्यालय पर प्रदर्शन, आनंद माधव ने खोला मोर्चा
बिहार कांग्रेस के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब दिल्ली तक पहुंचने वाली है. आनंद माधव ने क्या कहा? कृष्णनंदन की रिपोर्ट

Published : September 2, 2026 at 5:53 PM IST
पटना : बिहार कांग्रेस के भीतर पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से चल रहा असंतोष अब दिल्ली तक पहुंचने वाला है. पार्टी के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिहार कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ 8 सितंबर को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की तैयारी की है.
दिल्ली पहुंची बिहार कांग्रेस की लड़ाई
इस प्रदर्शन में बिहार के विभिन्न जिलों से कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा किया जा रहा है. असंतुष्ट खेमे की प्रमुख मांग बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को हटाने की होगी, जबकि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की कार्यशैली और संगठनात्मक फैसलों पर भी सवाल उठाए जाएंगे.
8 महीने से मांग रहे मिलने का समय- आनंद माधव
ईटीवी भारत से खास बातचीत में कांग्रेस नेता आनंद माधव ने कहा कि वह पिछले करीब आठ महीनों से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर बिहार कांग्रेस से जुड़े मुद्दों को रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अब तक मिलने का समय नहीं मिला. उन्होंने कहा कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने के लिए लगातार प्रयास किए गए. अब जब शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात नहीं हो पा रही है तो बिहार के अलग-अलग जिलों से कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचकर पार्टी मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश करेंगे.
"8 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि बिहार कांग्रेस के संगठन और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है.मौजूदा प्रदेश नेतृत्व की नीतियों के कारण बिहार में कांग्रेस लगातार कमजोर हुई है और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता संगठन से दूर होते जा रहे हैं."- आनंद माधव, कांग्रेस नेता
'मुझपर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई अवैध'
आनंद माधव ने अपने खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को भी पूरी तरह अवैध बताया. उन्होंने कहा कि वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं और पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को उनके खिलाफ इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है. उनके अनुसार, बिहार कांग्रेस की ओर से उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित या निलंबित करने का जो निर्णय लिया गया है, वह पार्टी की संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है.
केंद्रीय नेतृत्व के पास कार्रवाई का अधिकार
उन्होंने कहा कि देशभर में AICC के करीब 1300 सदस्य हैं, जबकि बिहार से लगभग 100 सदस्य इस संस्था का हिस्सा हैं और वह भी उनमें शामिल हैं. आनंद माधव के अनुसार, यही AICC सदस्य पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यकाल तक वह AICC सदस्य हैं और उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई का अधिकार पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास है, न कि केवल प्रदेश संगठन के पास.
आनंद माधव ने की बड़ी मांग
आनंद माधव ने दावा किया कि बिहार कांग्रेस ने अपनी शक्तियों से बाहर जाकर कार्रवाई की है. उन्होंने कहा कि उनके साथ ही अन्य नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की गई और कई नेताओं को नोटिस जारी किए गए. उन्होंने मांग की कि पार्टी के 47 नेताओं को दिए गए नोटिस वापस लिए जाएं और जिन नौ नेताओं के खिलाफ छह वर्षों के लिए कार्रवाई की गई है, उसके फैसले पर पुनर्विचार किया जाए.
कृष्णा अल्लावरु पर हमला
बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु पर हमला बोलते हुए आनंद माधव ने कहा कि उनका काम करने का तरीका किसी राजनीतिक संगठन के प्रभारी से अधिक एक कॉरपोरेट कंपनी के मैनेजर जैसा दिखाई देता है. उनका आरोप है कि बिहार जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में कांग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट राजनीतिक दृष्टि और जमीनी समझ की जरूरत है, लेकिन मौजूदा नेतृत्व के पास ऐसा कोई प्रभावी विजन नहीं दिख रहा है.
"राजनीतिक पार्टी को केवल प्रशासनिक तरीके से नहीं चलाया जा सकता. कांग्रेस का संगठन लंबे समय से जमीनी कार्यकर्ताओं, विचारधारा और जनसंघर्षों के आधार पर आगे बढ़ता रहा है. बिहार में संगठन की मौजूदा कार्यशैली में जमीनी नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है. इसी कारण पार्टी से जुड़े समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ रहा है."-आनंद माधव, कांग्रेस नेता
5 रुपये की पर्ची 50 की करने का आरोप
आनंद माधव ने कांग्रेस की सदस्यता प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जहां सदस्यता के लिए 5 रुपये की पर्ची काटी जाती थी, वहीं अब 50 रुपये की रसीद काटी जा रही है. उनका आरोप है कि इसमें 45 रुपये की वृद्धि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी ओर से की है. उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम और जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए संगठन से जुड़ने में मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
पारंपरिक संगठनात्मक ढांचा बचाने की अपील
उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में आर्थिक रूप से मजबूत लोगों का प्रभाव बढ़ाने के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है. आनंद माधव ने कहा कि यदि कांग्रेस में जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय केवल धनबल रखने वाले लोगों को प्राथमिकता मिलेगी तो पार्टी का पारंपरिक संगठनात्मक ढांचा कमजोर होगा.
राजेश राम की कार्यशैली पर भी सवाल
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आनंद माधव ने कहा कि उनके अनुसार मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष संगठन को प्रभावी तरीके से संभालने में सफल नहीं हो रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन और संगठनात्मक स्थिति ने भी नेतृत्व की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रदेश नेतृत्व ने टिकट बेचने का काम किया, जिसके कारण पार्टी की यह दुर्दशा हुई.
'पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर'
आनंद माधव ने कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई और कांग्रेस के विधायकों की संख्या 19 से घटकर 6 रह गई. उन्होंने राजेश राम के चुनावी प्रदर्शन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश अध्यक्ष की अपनी सीट पर भी परिणाम पार्टी के लिए निराशाजनक रहा. इसके अलावा उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान तीन विधायकों की क्रॉस वोटिंग का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे संगठन के भीतर वैचारिक प्रतिबद्धता और अनुशासन को लेकर सवाल पैदा होते हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश नेतृत्व की नीतियां बिहार में कांग्रेस को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर रही हैं. आनंद माधव ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि बिहार कांग्रेस की मौजूदा स्थिति आगे चलकर पार्टी को और कमजोर कर सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ फैसले ऐसे हो रहे हैं, जिनसे बिहार में कांग्रेस का राजनीतिक आधार लगातार कम होता जा रहा है.
'आवाज उठाने पर होती है कार्रवाई'
आनंद माधव ने कहा कि यह बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम को बचाने की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस को बचाने और मजबूत करने के लिए पुराने कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और जमीनी संगठन से संवाद जरूरी है. वर्तमान में संवाद की कमी के कारण असंतोष बढ़ रहा है. पार्टी के भीतर अपनी बात उठाने वाले नेताओं को सुनने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है.
'राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने का अवसर नहीं'
आनंद माधव ने कहा कि पिछले आठ महीनों से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व से मिलने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि पहले भी बिहार कांग्रेस के संगठनात्मक मामलों और कथित अनियमितताओं को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने मुद्दा रखा गया था. उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन मिला था कि चुनाव के बाद उनकी बात सुनी जाएगी, लेकिन अब तक उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला.
8 सितंबर को दिल्ली में प्रदर्शन
इसी वजह से अब 8 सितंबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने का फैसला किया गया है. आनंद माधव ने कहा कि बिहार के हर जिले से वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पदाधिकारी और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं. प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा. प्रदर्शनकारियों की कोशिश होगी कि पार्टी मुख्यालय के बाहर अपनी बात रखी जाए और केंद्रीय नेतृत्व तक बिहार कांग्रेस की स्थिति से जुड़े मुद्दे पहुंचाए जाएं.
उनका कहना है कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखना अनुशासनहीनता नहीं है. कांग्रेस का इतिहास आंतरिक बहस और लोकतांत्रिक संवाद का रहा है. उन्होंने कहा कि असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं की मांग केवल इतनी है कि उन्हें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए और बिहार कांग्रेस के संगठनात्मक मामलों की निष्पक्ष समीक्षा हो. फिलहाल आनंद माधव और उनके साथ खड़े असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि उनकी लड़ाई पार्टी छोड़ने की नहीं, बल्कि बिहार में कांग्रेस संगठन को बचाने और मजबूत करने की है.
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