अरावली बचाओ: 20 जिलों में अवैध खनन के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू, नई माइनिंग पर सख्त रोक
20 जिलों में 29 दिसंबर से 15 जनवरी तक अवैध खनन के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया जाएगा, जिसमें जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी.

Published : December 27, 2025 at 7:36 PM IST
जयपुर: एक ओर जहां 100 मीटर से कम ऊंचाई की पहाड़ियों को अरावली से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सियासत तेज हो रही है. कांग्रेस और भाजपा के बीच लगातार बयानबाजी का दौर जारी है. कांग्रेस जहां इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तरीके से आंदोलन कर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार को घेर रही है तो वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी कह चुके हैं कि वे अरावली का कुछ नहीं बिगड़ने देंगे.
अब इसी को लेकर राज्य सरकार ने अरावली पर्वत श्रृंखला के 20 जिलों में अवैध खनन के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं. 29 दिसंबर से लेकर 15 जनवरी तक अवैध खनन के खिलाफ वन, पर्यावरण, राजस्व और पुलिस का संयुक्त अभियान चलेगा. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को अपने आवास पर वन, पर्यावरण, खान विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को इस अभियान को युद्ध स्तर पर जारी करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि अवैध खनन के अभियान का संचालन जिला कलेक्टर के समन्वय से होगा.

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अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति: बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध खनन गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए और परिणाम दिखाई दिए जाने चाहिए. मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला क्षेत्र में राज्य सरकार किसी भी प्रकार के नए खनन की अनुमति नहीं देगी. इस संबंध में केंद्र सरकार ने भी निर्देश दिए हैं और यह निर्देश पूरे अरावली क्षेत्र में समान रूप से लागू होगा, जिससे अरावली पर्वत श्रृंखला के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखा जा सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला को हरा-भरा रखने के लिए 250 करोड़ रुपए की हरित अरावली विकास परियोजना बनाई गई है और परियोजना के तहत अरावली जिलों के 32,000 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण करवाया जा रहा है. वहीं, खान विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में अविलंब एसआईटी की बैठक आयोजित करें. साथ ही इस अभियान को अवैध परिवहन तक ही सीमित न रखकर अवैध गतिविधि के स्रोत व स्थान को चिन्हित कर कार्रवाई करें ताकि समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके.
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