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यमुना पर समझौते के बाद भाजपा में उत्साह: पूर्व नेता प्रतिपक्ष राठौड़ बोले- सीएम शर्मा का स्वागत करेंगे, गहलोत आएं, खुद कहा था माला पहनाएंगे

समझौते के तहत राजस्थान को मानसून अवधि के दौरान हथिनीकुंड बैराज से उसके हिस्से का यमुना जल उपलब्ध होगा.

Yamuna water agreement
समझौता पत्र के साथ सीएम शर्मा और सैनी (Photo Credit: CM Office)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 29, 2026 at 6:06 PM IST

6 Min Read
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जयपुर: 32 साल बाद यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर हुए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान-हरियाणा के बीच एमओए हुआ. इससे मानसून में हथिनीकुंड से राजस्थान को पानी मिलेगा. 295 किमी पाइपलाइन से शेखावाटी के झुंझुनू, सीकर, चूरू तक पानी पहुंचेगा. भाजपा ने इसे ऐतिहासिक बताया. पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ बोले- 1994 में ढांचा तय हुआ, पर कांग्रेस सरकारों में काम नहीं हुआ. अब सीएम भजनलाल के प्रयास से समझौता हुआ. इससे पेयजल संकट घटेगा, भूजल स्तर सुधरेगा. राठौड़ ने कांग्रेस पर हमला बोला- हरियाणा में एक बूंद पानी न देने का वादा किया, शेखावाटी के नेता चुप रहे. भाजपा ने संवाद से समाधान निकाला. मंगलवार को जयपुर एयरपोर्ट पर सीएम का स्वागत होगा. राठौड़ ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को भी बुलाया- बोले, आपने कहा था समझौता हुआ तो माला पहनाएंगे, अब आएं. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस MOA पर सवाल खड़े किए हैं.

इससे पहले दिल्ली में समझौते के लिए हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल मौजूद रहे. समझौते के तहत राजस्थान को मानसून अवधि के दौरान हथिनीकुंड बैराज से उसके हिस्से का यमुना जल उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हुआ है. इसके लिए भूमिगत पाइपलाइन आधारित व्यवस्था विकसित की जाएगी. राजस्थान सरकार इसे प्रदेश की जल सुरक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रही है.

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ (ETV Bharat Jaipur)

पढ़ें: यमुना जल बंटवारे पर 32 साल का इंतजार खत्म, दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान-हरियाणा में आज MoA

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना के तहत लगभग 295 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की योजना है, जिससे झुंझुनू, सीकर और चूरू सहित जल संकट प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि यह राज्यों के बीच सहयोग, संवाद और परिणाम आधारित शासन का उदाहरण है. राठौड़ ने कहा कि वर्ष 1994 में यमुना जल बंटवारे का ढांचा तय होने के बावजूद राजस्थान को अपेक्षित लाभ नहीं मिला. इस अवधि में प्रदेश में कई बार कांग्रेस की सरकारें रहीं और केंद्र में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों का कार्यकाल रहा, लेकिन परियोजना पर निर्णायक प्रगति नहीं हो सकी. अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दृढ़ संकल्प, सतत प्रयासों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण यह साकार हुआ. इससे शेखावाटी के झुंझुनूं, सीकर, चूरू सहित अनेक क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा, भूजल पर निर्भरता घटेगी, गिरते जलस्तर को संभालने में सहायता मिलेगी, किसानों को राहत मिलेगी, उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी.

32 वर्षों तक परिणाम क्यों नहीं आए: राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि क्या कारण था कि राजस्थान का जल अधिकार केवल भाषणों तक सीमित रहा? क्या कारण था कि हर चुनाव में शेखावाटी में जल के नाम पर वोट मांगे गए, लेकिन दिल्ली और हरियाणा के सामने राजस्थान का पक्ष मजबूती से कभी नहीं रखा गया? विडंबना तो तब और बढ़ गई जब हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के घोषणा-पत्र में राजस्थान को यमुना का एक बूंद पानी तक नहीं देने का वादा किया गया. यह केवल एक चुनावी घोषणा नहीं थी, बल्कि राजस्थान के स्वाभिमान और करोड़ों लोगों की प्यास के साथ राजनीतिक खिलवाड़ था. भाजपा सरकार ने कभी टकराव की राजनीति नहीं की, बल्कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद, विश्वास और परिणाम का रास्ता चुना.

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सीएम शर्मा का करेंगे एयरपोर्ट पर करेंगे स्वागत, गहलोत को भी बुलाया: राठौड़ ने कहा कि आज का यह समझौता केवल शेखावाटी की प्यास बुझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि राजस्थान को जल-सुरक्षित बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार है. यह राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादकता, शहरी विस्तार और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का मजबूत आधार बनेगा. यमुना जल समझौता केवल एक हस्ताक्षर नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि जब नेतृत्व निर्णायक हो, नीयत साफ हो और संकल्प अटल हो, तब इतिहास बदलता है. आज मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वही इतिहास रचा है. इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शेखावाटी और भाजपा नेताओं की ओर से कल यानी मंगलवार को सुबह जयपुर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत और अभिनंदन किया जाएगा. राठौड़ ने कहा कि यमुना जल समझौते को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुनौती देते रहे हैं और कहते रहे कि अगर यह समझौता हुआ तो वह स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल को माला पहनाने आएंगे....तो इस स्वागत समारोह में उन्हें आमंत्रित कर रहे हैं. वे आएं और इस ऐतिहासिक समझौते पर प्रदेश के मुख्यमंत्री का स्वागत करें.

वहीं, हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए MOA पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवाल खड़े किए हैं. गहलोत ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण समझौते को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यमुना जल समझौते को लेकर राज्य सरकार ने आज हरियाणा के साथ नया MOA किया है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसे सार्वजनिक नहीं किया गया. राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके हितों से जुड़े इस समझौते में किन शर्तों पर सहमति बनी है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब ढाई वर्ष पूर्व (17 फरवरी 2024) किए गए MoU को भी लोकसभा चुनावों तक छिपाकर रखा गया था.बाद में सामने आया कि उसमें पहले हरियाणा को 24,000 क्यूसेक पानी देने और शेष पानी राजस्थान को मिलने की शर्त थी. गहलोत ने कहा कि यदि नए MOA में भी ऐसा है, तो यह 1994 के मूल समझौते की भावना के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि यमुना जल का वितरण सभी राज्यों को 'Pro Rata Basis' (उपलब्ध जल के अनुपात) में होगा। किसी एक राज्य को प्राथमिकता या एकतरफा अधिकार नहीं है.

तत्काल किया जाए सार्वजिनक: गहलोत ने कहा कि मेरी मांग है कि आज हस्ताक्षरित नए MOA की प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए. जनता से ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ छिपाना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के विरुद्ध है. राजस्थान के हित सर्वोपरि हैं और हमारे जल अधिकारों से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता है.