कभी सब्जी में पानी मिलाकर किया गुजारा, 6 साल तक लगाए कोर्ट के चक्कर, अब UPSC क्लियर कर बने अधिकारी
पानीपत के अमित टूरन ने गरीबी, संघर्ष और छह साल की कानूनी लड़ाई लड़ी. आखिरकार अमित ने UPSC में 272वीं रैंक हासिल की है.

Published : June 3, 2026 at 2:48 PM IST
|Updated : June 3, 2026 at 4:46 PM IST
पानीपत: पानीपत के अमित टूरन ने यह साबित कर दिया कि हालात चाहे कितना भी कठिन क्यों न हों... यदि लक्ष्य तय है और मेहनत ईमानदार हो तो सफलता जरूर मिलती है. आर्थिक तंगी, असफलताओं और छह साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अमित ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के संशोधित परिणाम में ऑल इंडिया 272वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार किया है.
दरअसल, अमित साल 2019 की केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) परीक्षा में शामिल हुए थे. अब वो असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात होंगे. साल 2019 में यूपीएससी की ओर से आयोजित सीएपीएफ परीक्षा में अमित सहित कई स्टूडेंट्स ने रिटेन एग्जाम और इंटरव्यू के सभी चरण क्लियर कर लिए थे. हालांकि लास्ट टाइम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सर्टिफिकेट पर साइन को लेकर पेंच फंस गया था.
बचपन से था देश सेवा का सपना: पानीपत के साधारण परिवार से आने वाले अमित टूरन का सपना बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करना था. अपनी सफलता को लेकर अमित कहते हैं कि, "सीमित संसाधनों के बावजूद मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद वर्ष 2017 से उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी."
पहले ही प्रयास में पहुंचे इंटरव्यू तक:अमित ने बताया कि, "साल 2019 में मैंने पहली बार UPSC परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंच गया. हालांकि अंतिम चयन से पहले एक तकनीकी विवाद ने मेरे सपनों पर विराम लगा दिया. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्र को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई. दरअसल, हरियाणा में EWS प्रमाण पत्र सामान्य रूप से नायब तहसीलदार द्वारा जारी किए जाते थे, जबकि UPSC केवल तहसीलदार स्तर के हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्र को मान्यता दे रहा था. इसी वजह से अमित सहित कई योग्य उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए. इसके बाद मैंने कोर्ट का रूख किया"
छह साल तक नहीं मानी हार: अमित ने आगे कहा कि, "करीब छह वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के दौरान मैंने धैर्य नहीं खोया. आखिरकार अदालत से न्याय मिलने के बाद UPSC के संशोधित परिणाम में मेरी 272वीं रैंक घोषित हुई."
नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी: कानूनी प्रक्रिया के दौरान अमित ने हरियाणा सरकार में विभिन्न पदों पर सेवाएं भी दीं. उन्होंने हरियाणा भवन और पंचकूला में कार्य किया, लेकिन प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना कभी नहीं छोड़ा. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और लगातार प्रयास करते रहे.
कई बार आर्थिक संकट से जूझना पड़ा: UPSC की तैयारी के दौरान अमित को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अमित कहते हैं कि, "ऐसे दिन भी आए जब हमारे पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी. सीमित संसाधनों के बावजूद मैंने अपनी पढ़ाई और तैयारी जारी रखी."
भाई का त्याग बना मजबूत सहारा: अमित के बड़े भाई विकास ने हर कठिन समय में उनका साथ दिया. अपनी निजी नौकरी की कमाई का बड़ा हिस्सा वह अमित की पढ़ाई पर खर्च करते रहे. अमित ने बताया कि, "एक समय ऐसा था जब हमारे पास सिर्फ 400 रुपये बचे थे. कई दिन तक एक ही सब्जी में पानी मिलाकर गुजारा किया, लेकिन हमने हार नहीं मानी."
मां का विश्वास देता रहा हौसला: अमित की मां बबली देवी ने कहा कि, "जब अमित निराश होता था तो मैं उसे यही कहती थी कि उगते सूरज को सब सलाम करते हैं, एक दिन तेरा भी समय जरूर आएगा." मां के इसी विश्वास ने अमित को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत दी.
पिता ने भी बनाए रखा भरोसा: वहीं, अमित के पिता जयपाल ने बताया कि, "परिवार ने हमेशा बेटे की मेहनत पर विश्वास किया. आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कभी बेटे को अपने सपनों से समझौता नहीं करने दिया. परिवार का यही भरोसा अमित की सबसे बड़ी ताकत बना."
भाई ने सफलता का श्रेय अमित को दिया: अमित के बड़े भाई विकास ने कहा कि, "परिवार ने सिर्फ सहयोग दिया है, असली मेहनत अमित ने की है. वर्षों तक लगातार पढ़ाई करना और संघर्ष करना आसान नहीं था. यह सफलता उसकी लगन और धैर्य का परिणाम है."
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी: अमित टूरन की सफलता सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, पारिवारिक सहयोग, धैर्य और न्याय की जीत का उदाहरण भी है. उनकी यात्रा उन लाखों युवाओं को प्रेरित करती है जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. अमित ने साबित कर दिया कि मंजिल तक पहुंचने में देर हो सकती है, लेकिन सच्ची मेहनत और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाते.
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