'लड़का क्या करता है, अब कोई नहीं पूछता', जानें SI अमित कुमार के संघर्ष की कहानी
बिहार के अमित कुमार गरीबी को हराकर आज दारोगा बन गए हैं. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वो कई दिन भूखे भी रहे.

Published : February 21, 2026 at 5:26 PM IST
गया : ''माई पैसा नहीं है.. कल से कुछ नहीं खाया.. चावल, आटा के साथ चना-मकई भूंज कर भेज दो, वही सुबह में खा कर पढ़ने चला जाया करूंगा. जब पापा पैसे की व्यवस्था करके भेज देंगे तो हम कुछ खरीद लेंगे. हम ट्यूशन पढ़ा रहे हैं, अगले महीने से पैसे मिलने लगेंगे.'' बेटे की कही इन बातों को याद कर अमित कुमार की मां की आज भी सिहर उठती है. यह कहनी है बिहार के गया जिले से 80 किमी दूर डुमरिया प्रखंड के मैगरा के रहने वाले सब इंस्पेक्टर अमित कुमार और उनके परिवार की. जिसे पढ़कर आपकी आखों मे भी आंसू आ जाएंगे.
नक्सल प्रभावित गांव में गुजरा बचपन : कुछ सालों पहले तक ये क्षेत्र घोर नक्सल प्रभावित था. अमित का जब जन्म जब हुआ था तो उस समय उनके गांव देवजरा में नक्सलियों का वर्चस्व था, नक्सलियों के आतंक के बीच में अमित पले बढ़े, लेकिन गरीबी में भी उनके माता पिता ने अमित पर बुराई की छाया नहीं पड़ने दी.
चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं : गांव में अमित का मिट्टी का घर था. कई बार घर में चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे. पिता ने बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव को छोड़ा और मैगरा बाजार में जाकर रहने लगे. उधार कर्ज लेकर एक छोटी दुकान खोली और फिर उसी से आगे बढ़े. पिता खेती मजदूरी करते और मां दुकान चलाती. दोनों ने अपने बेटे की सफलता की सीढ़ी उसी दुकान और मजदूरी करके तैयार की.
''एक समय ऐसा भी आया जब पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई कि घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल था, ऐसे में मुझे पढ़ा पाना संभव नहीं हो रहा था. जब मैं इंटरमीडिएट में था तब पिता ने कह दिया दिया था कि वह आगे की शिक्षा नहीं करवा पाएंगे. लेकिन फिर जब हमने हिम्मत की तो पिता का हौसला बढ़ा.''- अमित कुमार, सब इंस्पेक्टर

अमित ने नहीं टूटने दिया हौसला : मां सुनीता कहती हैं कि जब आर्थिक तंगियों के कारण पिता के हौसले टूटने लगा तब खुद अमित आगे बढ़ा और पिता का हौसला बढ़ाया. अमित ने अपने संघर्ष के दिनों में लोगों के ताने भी सुने.
''बेटा कहता था कि पिता जी आप मायूस नहीं हों, मैं अपनी शिक्षा के लिए खुद व्यवस्था कर लूंगा, पढ़ाई के दौरान अमित ने पहले मजदूरी की, फिर अपने से जूनियर बच्चों को पढ़ना शुरू किया.'' - सुनीता कुमारी, अमित की मां

एक साथ हासिल की दो-दो नौकरियां : अमित कुमार ने ग्रेजुएशन के पहले साल से ही तैयारी शुरू कर दी. हालांकि पहले प्रयास में एसआई का रिजल्ट तकनीकी कारणों से रुक गया था, लेकिन फिर उसने मेहनत का दायरा बढ़ाया जिसकी वजह से एक नहीं बल्कि दो नौकरी एक साथ बड़े पद के लिए प्राप्त हुई, पहले उसका चयन बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ और इसी दौरान भारत सरकार के रेलवे विभाग में स्टेशन मास्टर के पद पर भी सफलता प्राप्त की.

''नौकरी में जब देरी हुई तो लोग कई तरह की बातें करते थे, जिसे सुनकर दिल में तकलीफ होती थी, लोगों को समझना चाहिए की जब हम मेहनत कर रहे हैं और सफलता किसी कारण नहीं मिल पा रही है तो उसमें कमियां निकालने के बजाय हौसला बढ़ाना चाहिए.''- अमित कुमार, सब इंस्पेक्टर

नक्सल प्रभावित क्षेत्र की पुलिस से थे प्रभावित : अमित कुमार कहते हैं कि उनका संबंध नक्सल प्रभावित क्षेत्र से था, उन्होंने नक्सलियों को भी देखा है और पुलिस के कार्यों को भी करीब से देखा है. उनके घर के सामने ही थाना था. जहां की पुलिस को देखकर वह प्रभावित थे, पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फैसला किया था कि अगर पुलिस विभाग में उनका चयन होता है तो वह इसी की नौकरी करेंगे.

ग्रुप बनाकर युवाओं की मदद की : अमित कुमार ने खुद ही सफलता अकेले प्राप्त नहीं की , बल्कि जब गयाजी में रहकर पढ़ाई कर रहे थे तब उन्होंने अपने जैसे संघर्ष कर रहे 50 युवाओं का चयन किया था. वह उन युवाओं को ग्रुप सेल्फ स्टडी के लिए प्रेरित करते थे. तैयारी के लिए प्रश्न तैयार करते और फिर उन युवाओं से हल कराते. उनकी मेहनत के कारण 40 से अधिक युवा सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं.
अमित कुमार को गयाजी में तैयारी करने वाले युवा अपना रोल मॉडल मानते हैं, आज भी उन से परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा मार्गदर्शन मांग कर अपनी तैयारी को आगे बढ़ाते हैं.
यूपीएससी की तैयारी जारी है : अमित कुमार बिहार पुलिस में कार्यरत हैं, वो अपनी ड्यूटी के साथ यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी में भी लगे हैं. वो कहते हैं कि एक दिन वो ये दोनों बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल कर लेंगे. क्योंकि मेहनत संघर्ष करने की आदत उन्होंने नहीं छोड़ी है.

''गरीबी सफलता के लिए बाधा नहीं है, हां ये जरूर है कि आम छात्रों की तुलना में कठिनाई अधिक होगी. भूखे प्यासे रहकर भी आपको अपने लक्ष्य के लिए आगे बढ़ना होगा. फटे पुराने कपड़े भी पहनने होंगे. मुझे याद है कि पुरे साल मेरे पास तीन ही जोड़ी कपड़े हुआ करते थे लेकिन इन सब परेशानियों से नहीं टूटे तो सफलता तो गारंटी के साथ आपके कदम चूमेगी.'' - अमित कुमार, सब इंस्पेक्टर
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