आमरण अनशन के बीच D.Ed अभ्यर्थियों ने खून से लिखा पत्र, सरकार पर मौन होने का आरोप
आमरण अनशन पर बैठे लोगों का कहना है, सरकार को संवेदनशील होकर उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 31, 2025 at 8:38 AM IST
रायपुर: आमरण अनशन पर बैठे D.Ed अभ्यर्थियों का दर्द अब शब्दों से आगे निकल चुका है. सालों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और अदालतों में चली लंबी लड़ाई के बाद भी जब सरकार ने उनकी सुध नहीं ली, तब बेरोज़गार युवाओं ने इंसानियत को झकझोर देने वाला कदम उठाया है. आमरण अनशन पर बैठे D.Ed अभ्यर्थियों ने खून से पत्र लिखकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मदद की गुहार लगाई है. आमरण अनशन पर बैठे लोगों का कहना है कि सरकार को संवेदनशील होकर उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए.
सरकार को लिखा खून से खत
धरना स्थल पर बैठे D.Ed अभ्यर्थियों ने खून से लिखे पत्रों के ज़रिये बताया कि कैसे उनका भविष्य अंधेरे में धकेल दिया गया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि जब ज्ञापन, प्रदर्शन और अदालत के आदेश भी सरकार को नहीं जगा सके, तब उन्होने अपनी पीड़ा खून से लिखी है. अभ्यर्थियों का कहना है कि यह पत्र नहीं, बल्कि टूटती उम्मीदों की चीख है.
आमरण अनशन पर अभ्यर्थी, कहा-“नौकरी दो या जान ले लो”
रायपुर के माना-तूता धरना स्थल पर 24 दिसंबर से बेरोज़गार डीएड,बीएड अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं. ठिठुरती सर्दी और भूख से बेहाल ये लोग लगातार आमरण अनशन पर डटे हैं. इनका कहना है कि चाहे जो भी हो उनकी मांगें जबतक पूरी नहीं होती वो अनशन खत्म नहीं करेंगे. अभ्यर्थियों ने शासन से जल्द से जल्द मांग पूरी करने की मिन्नत भी की है.

हाईकोर्ट का आदेश, फिर भी सरकार बेपरवाह
अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि रिक्त पदों पर 2 महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. अभ्यर्थियों ने बताया कि आज भी लगभग 2300 पद खाली हैं बावजूद इसके हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोज़गारी का दंश झेलने को मजबूर हैं.
उग्र आंदोलन की तैयारी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा. अभ्यर्थियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी, क्योंकि उनकी मांगें सिर्फ नौकरी और सम्मानजनक जीवन के लिए है.
सरकार की चुप्पी पर सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने गंभीर और मानवीय संकट के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान या पहल सामने नहीं आई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि संवाद और निर्णय के अभाव ने हालात को विस्फोटक बना दिया है.
छत्तीसगढ़ में D.Ed अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब सिर्फ भर्ती का मुद्दा नहीं रहा. खून से लिखा गया पत्र, आमरण अनशन और “नौकरी दो या जान ले लो” जैसे नारे सरकार के सामने सीधा सवाल खड़ा कर रहे हैं. अभ्यर्थियों के साथ अब लोग भी पूछ रहे हैं कि क्या युवाओं की ज़िंदगी से बड़ा कोई और एजेंडा है?

