'एंबुलेंस चालक बन जाता है डॉक्टर..' जानें कैसे सरकारी अस्पताल में मरीज को शिकार बनाते हैं बिचौलिए
बिहार के सरकारी अस्पताल में बिचौलियों का बोलबाला है. मरीज को किसी तरह बगरलाकर प्राइवेट अस्पताल में ले जाते और मोटी कमीशन वसूलते हैं.

Published : January 6, 2026 at 2:05 PM IST
बेतिया: तस्वीर में दिख रहे शख्स बेतिया के मिसरौली निवासी सुखट बैठा हैं. बकरी और घर का सामान बेचकर अपनी बेटी प्रियंका का इलाज कराने के लिए बेतिया स्थिति जीएमसीएच में आए थे. 'तीन चार दिनों तक इलाज कराने के बाद एक दिन एक व्यक्ति आया और बरगला कर उत्तर प्रदेश गोरखपुर के निजी अस्पताल लेकर चला गया.'
'यहां अच्छे से इलाज नहीं होगा': सुखट बैठा ने बताया कि 'उस शख्स ने कहा कि जीएमसीएच में अच्छे से इलाज नहीं होगा, चलिए गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती करा देते हैं. 10 से 15 हजार रुपये खर्च लगेगा, आपकी बेटी ठीक हो जाएगी.' सुखट बैठा उसकी बातों में आकर गोरखपुर के लिए चल दिए.
'प्राइवेट अस्पताल में कराया भर्ती': उक्त व्यक्ति ने सुखट बैठा को सरकारी अस्पताल में नहीं बल्कि गोरखपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करा दिया. कुछ दिनों तक इलाज होने के बाद डॉक्टर ने उन्हें 30 से 40 हजार रुपये का बिल थमा दिया. बिल देने में सक्षम नहीं होने पर अस्पताल प्रबंधक के द्वारा धमकी दी गयी. तब सुखट बैठा के सामने प्राइवेट नर्सिंग होम का सच सामने आया. अहसास हुआ कि वे बिचौलिया के शिकार हो गए.
"मेरी बेटी का गोरखपुर में सही से इलाज नहीं किया गया. बदले में 30 से 40 हजार का बिल दे दिया गया. अस्पताल वालों ने कहा कि तुम्हें बांधकर पैसा वसूल करेंगे. इसके बाद किसी तरह मैनेज करने बाद वहां से आकर फिर से जीएमसीएच में बेटी को भर्ती कराया" -सुखट बैठा. मरीज के पिता
सुखट बैठा कोई पहला इंसान नहीं: इस तरह का मामला सामने आया तो ईटीवी भारत ने इसकी पड़ताल की. पड़ताल में पता चला कि सुखट बैठा कोई पहला इंसान नहीं जिसके साथ इस तरह की घटना हुई है. अस्पताल में मौजूद प्राइवेट एंबुलेंस चालक और बिचौलिया इसी तरह मरीजों का अपना शिकार बनाते हैं और प्राइवेट अस्पताल में ले जाकर भर्ती करा देते हैं. इसके बदले उन्हें मोटी रकम मिलती है.

एंबुलेंस चालक बन जाता है डॉक्टर: इस तरह की कुछ तस्वीर भी ईटीवी भारत के पास आयी है, जिसमें एक शख्स जो एंबुलेंस चालक है, लेकिन कभी-कभी डॉक्टर के वेश में अस्पताल परिसर में घूमते रहता है. मरीज और उसके परिजन को जांच करने का नाटक करता है और फिर उसे बरगला कर प्राइवेट अस्पताल में ले जाता है. बिचौलिया कभी एंबुलेंस चालक बन जाता है तो कभी डॉक्टर बन जाता है.
बदले में मिलता है कमीशन: जो दो तस्वीर सामने आयी है, उसमें शख्स जो प्राइवेट एंबुलेंस का चालक है. वहीं दूसरी तस्वीर में डॉक्टर के यूनिफार्म में स्टेथॉस्कोप लगाए नजर आ रहा है. इस तरह का गोरखधंधा सरकारी अस्पतालों में धड़ल्ले से चल रहा है. मरीज को किसी तरह बरगला कर उसे यूपी के निजि नर्सिंग होम में ले जाते हैं और मोटी रकम कमीशन के तौर पर वसूलते हैं.
मरीज को बेचने पड़ती है जमीन: प्राइवेट अस्पताल में इलाज के नाम पर मरीजों को चूना लगाया जाता है. लाखों रुपये का बिल थमा दिया जाता है. प्राइवेट अस्पताल में फंसने के बाद मरीज और उसके परिजन को अपनी जमीन और घर गिरवी रखकर अस्पताल का बिल चुकाना होता है. ऐसा नहीं करने पर अस्पताल प्रबंधक के द्वारा धमकी दी जाती है.
'क्या कहती हैं अधीक्षक': ऐसा नहीं है कि इस मामले की जानकारी जिले के सरकारी अस्पताल प्रबंधक को नहीं है. ईटीवी भारत ने जब इस मामले में जीएमसीएच की अधीक्षक सुधा भारती से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि इसकी जांच कर कार्रवाई करेंगे. मामला सामने आने के बाद उन्होंने अस्पताल परिसर में ऐसे बिचौलियों के पोस्टर लगाने का निर्देश दिया है, ताकि कोई भी मरीज इसके शिकार नहीं हो.

"यह जानकारी मिली है. इस तस्वीर की जांच की जा रही है. संबंधित शख्स को खोजा जा रहा है. उसके ऊपर जरूर कार्रवाई होगी. मरीजों को किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है." -सुधा कुमारी, अधीक्षक, जीएमसीएच
बेतिया डीएम ने जांच की बात कही: एंबुलेंस चालक और बिचौलियों की तस्वीर लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. इस मामले में बेतिया डीएम ने भी बताया कि हाल में ही इस तरह का मामला संज्ञान में आया है. कुछ एंबुलेंस चालक हैं, जो सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीज को बरगलाने का काम करते हैं.
"इस तरह के मामले सामने आए हैं. इसकी जांच करायी जाएगी. जो भी इसमें दोषी पाए जाते हैं तो उनके ऊपर कार्रवाई की जाएगी." -तरनजोत सिंह, डीएम, बेतिया
भुगतना पड़ता है खामियाजा: बता दें कि इस तरह बिचौलिया का शिकार होने पर मरीज को खामियाजा भुगतना पड़ता है. कई बार तो निजी अस्पताल के चक्कर में मरीज की मौत तक हो जाती है. सुखट बैठा ऐसे कई लोग इसके शिकार होते हैं और जमीन जायदाद बेचना पड़ता है.
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