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अपनी ही सरकार पर नहीं है कांग्रेस नेताओं का भरोसा, कोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा

केरेडारी विस्थापन और मुआवजे को लेकर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव और उनकी बेटी अंबा प्रसाद ने सरकार पर सवाल उठाए हैं.

Keredari displacement case
विस्थापित लोगों के साथ योगेंद्र साव (ETV bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 4, 2026 at 5:06 PM IST

3 Min Read
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हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी में विस्थापन और मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर भरोसा न होने की बात कही है. दोनों नेता अब न्याय के लिए अदालत का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं.

केरेडारी में धरना स्थल से जबरन हटाए गए योगेंद्र साव

पिछले दिनों मुआवजे की मांग को लेकर धरना दे रहे पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को जिला प्रशासन ने धरना स्थल से जबरन उठाकर हटा दिया था. इस घटना के बाद मामला और तूल पकड़ चुका है. योगेंद्र साव ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है. यही कारण है कि अब कोर्ट का रुख करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा, "यह सरकार उनकी नहीं है. सरकार जनता की होनी चाहिए. अब जनता को अपनी मांगों और न्याय के लिए सड़क पर आना होगा." योगेंद्र साव ने यह भी आशंका जताई कि उनकी हत्या तक हो सकती है.

अपनी ही सरकार पर नहीं है कांग्रेस नेताओं का भरोसा (ETV Bharat)

अंबा प्रसाद बोलीं- विस्थापितों को न्याय मिलना चाहिए, मरना पड़े तो तैयार

कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने भी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार से लड़ाई जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी है. सरकार की आंखें खुलें, इसी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. विस्थापितों को न्याय मिलना चाहिए और 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून पूरी तरह लागू होना चाहिए. अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि विस्थापितों को मुआवजा नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा, "विस्थापितों के लिए अगर मरना भी पड़े तो इसके लिए तैयार हैं."

विस्थापन हजारीबाग के लिए बड़ा मुद्दा

हजारीबाग जिले में कोल माइनिंग परियोजनाओं के कारण विस्थापन लंबे समय से बड़ा मुद्दा बना हुआ है. पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से केरेडारी में अतिक्रमण हटाओ और उचित मुआवजा दो की मांग को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और जिला प्रशासन आमने-सामने हैं. अंबा प्रसाद हमेशा से विस्थापन के मुद्दे पर सरकार से सवाल उठाती रही हैं. झारखंड में कांग्रेस नीत गठबंधन की सरकार होने के बावजूद पार्टी के इन दो वरिष्ठ नेताओं का अपनी ही सरकार पर भरोसा न होना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है.

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