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अलवर का लाल प्याज बांग्लादेश भेजने की राह खुली, भाव में तेजी से किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

किसानों को मंडी में लाल प्याज के भाव पर्याप्त नहीं मिल पा रहे थे. इसके चलते किसान मायूस थे.

Farmers loading onions onto carts
गाड़ी में प्याज लादते किसान (ETV Bharat Alwar)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 12, 2025 at 6:55 PM IST

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अलवर: पिछले कई दिनों से लाल प्याज के कम भाव की मार झेल रहे किसानों के लिए राहत वाली खबर है. अब देश से रोजाना 30 टन लाल प्याज की 50 गाड़ियां बांग्लादेश पहुंचाई जा रही हैं. इससे प्याज के भाव में कुछ तेजी आई है, जिसका फायदा अलवर के किसानों को भी मिल रहा है. इस संबंध में पिछले दिनों अलवर सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव से किसानों के एक दल ने मुलाकात की थी. पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने भी प्याज मंडी में पहुंचकर किसानों की परेशानी सुनी थी.

अलवर प्याज मंडी के संरक्षक अभय सैनी ने बताया कि जिले में इस वर्ष प्याज के भाव इतने कम थे कि किसानों को प्याज की फसल तैयार करने में लगी लागत भी नहीं निकल पा रही थी. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी. उन्होंने बताया कि अलवर मंडी में पिछले दो महीने से लाल प्याज की आवक हो रही है. पूर्व में अलवर में लाल प्याज 3 से 8 रुपए प्रति किलो तक रहे. प्याज के उचित भाव नहीं मिलने से परेशान किसानों का दल पिछले दिनों अलवर सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव से मिला था. उन्होंने बताया कि इन दिनों अलवर में लाल प्याज के भाव 25 रुपए प्रति किलो तक हैं. पहले ये भाव 8 से 10 रुपए तक रहे थे, लेकिन पिछले दिनों बांग्लादेश बॉर्डर खुलने की चर्चा के बाद प्याज के भाव 17 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए.

प्याज के दाम बढ़ने से किसान उत्साहित (ETV Bharat Alwar)

पढ़ें: लाल प्याज के कम भाव से मायूस अलवर के किसानों की आस अब पीले सोने पर टिकी

किसानों की चिंता का यह था कारण: अभय सैनी ने बताया कि लाल प्याज की फसल को तैयार करने में एक बीघा जमीन में करीब 50 से 60 हजार रुपए का खर्चा आता है. इस बार प्याज के भाव इतने कम थे कि किसानों को इस लागत का आधा हिस्सा भी नहीं मिल पा रहा था. उन्होंने बताया कि केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने किसानों और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने प्याज मंडी में पहुंचकर किसानों की परेशानी को सुना और अपने-अपने स्तर पर किसानों के हित में कार्रवाई की. इससे अलवर के लाल प्याज की पहुंच बांग्लादेश तक होने लगी है.