ETV Bharat / state

प्याज किसानों की चमकी किस्मत: बुवाई से पहले ही कंठी के भाव हुए दोगुने, 5000 क्विंटल तक पहुंची कीमत

पिछले साल अलवर जिले में 16 हजार हेक्टेयर में लाल प्याज की बुवाई हुई थी. इस साल रकबा बढ़ने की उम्मीद है.

Price of Red Onion Alwar
अलवर का लाल प्याज (ETV Bharat Alwar)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 24, 2026 at 12:11 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

अलवर: लाल प्याज के लिए देशभर में मशहूर अलवर जिले में इस साल बुवाई से पहले ही किसानों के लिए अच्छी खबर है. प्याज की कंठी (बीज के लिए तैयार पौध) के भाव पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं. व्यापारी मंडी के साथ-साथ खेतों पर पहुंचकर सीधे किसानों से कंठी खरीद रहे हैं. बाजार में अच्छी क्वालिटी के प्याज बीज के दाम 4700 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. भाव में तेजी से इस साल जिले में लाल प्याज का रकबा बढ़ने की उम्मीद है.

अलवर प्याज मंडी संरक्षक अभय सैनी ने बताया कि पिछले साल इन दिनों खाने वाला प्याज 12 से 13 रुपए किलो था, जबकि इस बार 30 रुपए किलो तक बिक रहा है. बाजार में कीमतों में तेजी और कई क्षेत्रों में प्याज की खराब गुणवत्ता व गलने की समस्या को देखते हुए किसानों को इस सीजन में बेहतर भाव की उम्मीद है.

अलवर प्याज मंडी संरक्षक अभय सैनी (ETV Bharat Alwar)

पढ़ें: अलवर के लाल प्याज को मिला सेंटर फॉर एक्सीलेंस का 'बूस्टर डोज', जानिये कैसे बदल जाएगी किसानों की किस्मत

अच्छी क्वालिटी की कंठी 4700 से 5000 रुपए तक: सैनी ने बताया कि अच्छी गुणवत्ता के लिए किसान बेहतर कंपनियों के बीज का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें लाली सुपर, पंचगंगा, एलोरा सहित अन्य किस्में शामिल हैं. बाजार में अच्छी गुणवत्ता से तैयार कंठी के भाव 4700 से 5000 रुपए तक हैं. खेत से सीधे खरीदी जाने वाली कंठी 4500 रुपए तक बिक रही है. व्यापारी खेत से खरीद के बाद पैकिंग, मजदूरी और परिवहन का खर्च वहन करते हैं, जिससे कीमत में 250 से 300 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ोतरी हो जाती है. बाद में दूसरे राज्यों की मंडियों में बिक्री होती है. पिछले साल यह भाव 2700 रुपए तक था.

Price of Red Onion Alwar
कंठी की बुवाई करती महिलाएं (ETV Bharat Alwar)

MP, UP, हरियाणा तक पहुंच रही अलवर की कंठी: सैनी ने बताया कि अलवर की कंठी का बाजार अब जिले तक सीमित नहीं रहा. यहां से बड़ी मात्रा में कंठी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ तक भेजी जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में अलवर कंठी के नए बाजार के रूप में विकसित हुआ है. पहले किसान सिर्फ अपने खेत के लिए बीज लगाते थे, अब अतिरिक्त उत्पादन कर व्यापारियों को बेच रहे हैं.

साल रकबा (हेक्टेयर)
201916500
202018500
202120500
202223000
202319600
202413092
202516000

यह भी पढ़ें: अलवर का लाल प्याज बांग्लादेश भेजने की राह खुली, भाव में तेजी से किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

रकबा बढ़ने की उम्मीद: सैनी ने बताया कि इस साल बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ने की उम्मीद है. देश के कई हिस्सों में प्याज में नमी और गलन की समस्या है. सरकारी भंडारण में भी खराब होने की शिकायतें अधिक हैं, इसलिए आने वाले दिनों में भाव में सुधार की संभावना है.

जिले में बुवाई शुरू: भाव में तेजी की उम्मीद से किसानों ने बुवाई शुरू कर दी है. पिछले साल अलवर जिले में 16 हजार हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, इस साल रकबा बढ़ने की उम्मीद है. किसान रमेश ने बताया कि एक बीघा में लाल प्याज तैयार करने पर 50-60 हजार रुपए लागत आती है और करीब 4 हजार किलो पैदावार होती है. एक किलो की लागत 12 से 13 रुपए आती है. पिछले साल मंडी में 7 से 10 रुपए ही मिल पाए, जिससे लागत निकालना मुश्किल हो गया. कई किसानों को मजबूरन प्याज नदी-नालों में फेंकना पड़ा था. बांग्लादेश बॉर्डर खुलने के बाद कुछ राहत मिली थी. किसानों को इस साल नुकसान की भरपाई की उम्मीद है.