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अलवर म्यूजियम में हर साल आ रहे 50 हजार से ज्यादा सैलानी, दुलर्भ कलाकृति, ऐतिहासिक हथियार आकर्षण का केंद्र

अलवर म्यूजियम देसी-विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. जानिए क्या है कारण..

अलवर का म्यूजियम
अलवर का म्यूजियम (ETV Bharat Alwar)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : November 13, 2025 at 12:09 PM IST

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अलवर : टाइगर रिजर्व सरिस्का, ऐतिहासिक सिलीसेढ़ झील एवं भूतिया महल ही पर्यटकों को अपनी ओर नहीं खींच रहे हैं, बल्कि अलवर का म्यूजियम भी देसी-विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहा है. यही कारण है कि हर साल यहां 50 हजार से ज्यादा पर्यटक दुलर्भ कलाकृति, पूर्व राजा महाराजाओं के ऐतिहासिक हथियार, अकबरनामा, बाबरनामा एवं अन्य बेशकीमती कलाकृतियां को देखने आते रहे हैं. इतना ही नहीं अलवर जिले की स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हर साल आयोजित होने वाले मत्स्य उत्सव के दौरान भी यहां रौनक और भी बढ़ जाती है. पर्यटकों की खास पसंद होने के कारण संग्रहालय राज्य सरकार का खजाना भरने में भी पीछे नहीं हैं.

अलवर संग्रहालय में प्रति वर्ष हजारों की संख्या में पर्यटक भ्रमण के लिए पहुंचते हैं. अलवर संग्रहालय क्यूरेटर रेनू ने बताया कि यहां औसतन 60-65 हजार पर्यटक अलवर संग्रहालय पहुंच रहे हैं. इससे सरकार को हर साल 10 लाख से ज्यादा की आय हो रही है. उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में पर्यटकों के म्यूजियम पहुंचने से अलवर की ख्याति भी विदेशों तक पहुंची है. खास बात यह कि वर्ष 2020-21 और 2021-22 में महामारी कोविड के दौरान भी यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या 26 हजार से 47 हजार तक रही.

जानें पांच सालों का आंकड़ा
जानें पांच सालों का आंकड़ा (फोटो ईटीवी भारत gfx)

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अलवर संग्रहालय आते हैं पर्यटक : इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने बताया कि म्यूजियम में अलवर के पूर्व शासक जयसिंह की ओर से इंग्लैंड से मंगवाई गई गियर व ब्रेक वाली साइकिल, जर्मन सिल्वर से निर्मित मेज, इंदौर के महाराजा यशवंत राव होल्कर की युद्ध के दौरान पहनी गई पोशाक, एक म्यान में दो तलवार, कैमल गन के साथ-साथ बाबरनामा, अकबरनामा सहित अन्य कई ग्रंथ रखे हुए हैं. इसके अलावा संग्रहालय में 16 हजार से ज्यादा आर्टिकल का संग्रह, 234 मूर्तियां, 11 शिलालेख, 9 हजार से ज्यादा सिक्के, 2565 पेंटिंग, 2270 अस्त्र-शस्त्र 1809 वाद्य यंत्र प्रदर्शित किए गए हैं. इसके अलावा संग्रहालय में हाथी दांत से बनी हुई कलाकृतियों के साथ-साथ अलवर के महाराज की ओर से शिकार किए हुए विदेशी पक्षी, पैंथर, बाघ और महाराज का प्रिय भालू संग्रहालय में प्रदर्शित की गई हैं.

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मत्स्य उत्सव में संग्रहालय का बढ़ जाता है आकर्षण : अलवर की स्थापना दिवस पर हर साल मत्स्य उत्सव का आयोजन किया जाता है. इस दौरान अलवर के पर्यटन केन्द्रों पर रौनक बढ़ जाती है. इस मौके पर जिले के प्रमुख पर्यटक केन्द्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी एवं अन्य आयोजन किए जाते हैं. वहीं, अलवर संग्रहालय पर पर्यटकों को नि:शुल्क प्रवेश दिया जाता है, जिससे उन्हें अलवर के दुलर्भ ग्रंथ, ऐतिहासिक कलाकृतियां, पूर्व राजा महाराजाओं के हथियार, राजस्थानी इतिहास, पूर्व महाराजाओं की पोशाक व अलवर के इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके.

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सचित्र बाबरनामा व अकबरनामा है विशेषता : इतिहासकार गोयल ने बताया कि अलवर संग्रहालय में हस्तलिखित सचित्र बाबरनामा मौजूद है, जिसे जमादी उसानी ने तैयार किया था. बताया जाता है कि दुनिया में केवल तीन जगह ही बाबरनामा पुस्तक है, जिनमें से एक अलवर में है. वहीं, अलवर के संग्रहालय में अकबरनामा भी मौजूद है, जो अलवर के पूर्व शासकों के ऐतिहासिक ग्रंथों में से एक है.