कोच को देख जगी ललक, मेडिकल की पढ़ाई के दौरान की पावरलिफ्टिंग की शुरुआत, अब चीन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे जितेंद्र
चाइना में पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे अलवर के जितेंद्र शर्मा से ईटीवी भारत के संवाददाता पीयूष पाठक ने बातचीत की...

Published : May 6, 2026 at 5:48 PM IST
अलवर : जिले के हल्दीना गांव निवासी जितेंद्र शर्मा का पावरलिफ्टिंग खेल में भारतीय टीम में चयन हुआ है. अब वह चीन में आयोजित होने वाली एशियन जूनियर एक्यूपड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए रवाना होंगे. जितेंद्र शर्मा की इस उपलब्धि में कई अड़चन आई, लेकिन उन्होंने लक्ष्य नहीं छोड़ा. पावरलिफ्टिंग खेल की शुरुआत जितेंद्र शर्मा ने मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही कर दी थी. हालांकि, परिवार ने शुरुआत में जितेंद्र का साथ नहीं दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक अपना नाम बनाया. अब 14 मई को जितेंद्र चीन में प्रतियोगिता में अपना जौहर दिखाएंगे.
कोच को देख कर पावरलिफ्टिंग का शौक : ईटीवी भारत से खास बातचीत करते हुए जितेंद्र शर्मा ने बताया कि पढ़ाई में उनका ज्यादा मन नहीं था, बचपन से ही वे खेल में अपना करियर बनाने की सोच रखते थे. इसके लिए उन्होंने पहले हैंडबॉल, रेसलिंग, वॉलीबॉल सहित कई खेल खेले. 2021 में उनके कोच आशीष जैमन तुर्की में आयोजित हुई प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल कर भारत पहुंचे, तब उनके स्वागत के लिए भीड़ लग गई. लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया, जिसे देखकर उन्हें पावरलिफ्टिंग की ललक हुई. इसके बाद उन्होंने पावरलिफ्टिंग खेल की बारीकियां सीखने की शुरुआत की. 2021 में उन्होंने पावर लिफ्टिंग की शुरुआत की. शुरुआत में रोजाना सुबह 3 घंटे व शाम को 2 से 3 घंटे प्रैक्टिस कर खुद को तैयार किया. अब जब प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं तब करीब 6 से 7 घंटे तक वर्कआउट व प्रैक्टिस करते हैं.
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मेडिकल की पढ़ाई के साथ शुरू की पावरलिफ्टिंग : जितेंद्र शर्मा ने बताया कि 12वीं के बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई बी फार्मा के लिए एडमिशन लिया. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई के साथ पावरलिफ्टिंग की शुरुआत की. जब पावरलिफ्टिंग के बारे में परिवार से चर्चा की तो उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहा और खेल को ज्यादा स्पोर्ट नहीं किया. पहली बार जिला स्तर व राज्य स्तर पर मेडल हासिल कर परिजनों को बताया तब भी उन्होंने पढ़ाई पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि इस खेल में आगे बढ़ने के लिए उन्हें जयपुर जाना था. ऐसे में परिवार से बात की और कुछ दिन की मोहलत मांगी. इस बार परिजन मान गए और वो जयपुर आ गए. पावरलिफ्टर जितेंद्र ने बताया कि इससे पहले वो अपने कोच से ऑनलाइन ट्रेनिंग लेते थे, लेकिन जयपुर जाने के बाद उन्हें पूरी टीम मिली और बेहतर वर्कआउट और ट्रेनिंग करने का मौका मिला, जिसके कारण आज वह इस मुकाम तक पहुंचे.

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भारतीय टीम में चयन की बात सुन परिजन हुए खुश : उन्होंने बताया कि उनकी कड़ी मेहनत के चलते भारतीय टीम में उनका सिलेक्शन हुआ. जब उन्होंने अपने परिवार को इसकी सूचना दी, तब परिवार में खुशी का माहौल था. इसके बाद उन्होंने जितेंद्र को खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. जितेंद्र ने बताया कि उनके पास कई गोल्ड और 2 से ज्यादा ब्रॉन्ज मेडल हैं. जिला स्तर पर कई मेडल व सर्टिफिकेट हैं. अब परिजन भी इस खेल को पूरा सपोर्ट कर रहे हैं. जहां पहले इसके बारे में घर में कोई चर्चा भी नहीं करता था वहीं, अब परिजन भी इस खेल की बारीकियों के बारे में उनसे जानकारी लेते हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में परिवार में ज्यादा किसी ने सपोर्ट नहीं किया. हालांकि, उनकी मां व उनके कोच ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने हाल ही में बीकानेर में आयोजित हुई राज्य स्तर प्रतियोगिताओं में 10 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर 120 किलो वर्ग कैटेगरी में एक नया रिकॉर्ड बनाया है.

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स्ट्रेंथ का खेल है पावरलिफ्टिंग : पावरलिफ्टर जितेंद्र शर्मा ने बताया कि पावरलिफ्टिंग गेम स्ट्रेंथ का गेम है. इसमें कई बिंदु को ध्यान में रखा जाता है. इस खेल के दौरान एथलीट को अपनी डाइट व माइंडसेट का ध्यान रखना होता है. पावरलिफ्टर अपनी तैयारी के दौरान भारी भरकम वजन उठाते हैं तो उनका मन एग्रेसिव रहता है. मन को शांत करना और अच्छी नींद लेना भी जरूरी है. शरीर की रिकवरी भी इस खेल में बहुत जरूरी है. जितेंद्र शर्मा ने बताया कि इससे पहले भी प्रतियोगिता के लिए उनका भारतीय टीम में सिलेक्शन हुआ था, लेकिन उस दौरान चोट ने उनके सपने पर पानी फेर दिया. जब उन्होंने चोट के उपचार के लिए डॉक्टर्स की सलाह ली तो उन्होंने उन्हें खेल खेलने से मना कर दिया. हालांकि, उनका दृढ़ निश्चय था कि वह खेल में आगे बढ़े और अब भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं.

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120 किलो वर्ग कैटेगरी में खेलेंगे चीन में : जितेंद्र शर्मा ने बताया कि चीन में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में वह 120 किलो वर्ग कैटेगरी में हिस्सा लेंगे. इसके लिए वह काफी समय से तैयारी कर रहे हैं. उनकी प्रतियोगिता 14 मई को होगी. इसके लिए वह चीन पहुंचने के बाद भी 5 दिन तक ट्रेनिंग करेंगे. उन्होंने बताया कि अब उनका आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय टीम को प्रतिनिधित्व कर मेडल हासिल करना लक्ष्य है. वहीं, जितेंद्र शर्मा के पिता दौलत राम शर्मा ने बताया कि शुरुआत में जितेंद्र को पढ़ाई के प्रति ही मेहनत करने के लिए प्रेरित किया गया, लेकिन उसका सपना देश के लिए मेडल लाने का था. नेशनल लेवल पर मेडल लाने के बाद उन्हें जितेंद्र पर भरोसा हुआ कि वह खेल में आगे बढ़ सकता है. तब से उन्होंने जितेंद्र के कोच आशीष को सौंप दिया. जितेंद्र की पढ़ाई पूरी होने वाली है. अब परिवार के लोग भी चाहते हैं कि जितेंद्र खेल में आगे बढ़े और देश का नाम रोशन करे.


