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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर के साथ लेपर्ड का भी होगा सेंसस, जानिए कैसे लगाया जाएगा अनुमान

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती के साथ-साथ तेंदुओं की आबादी का भी वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा.

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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर के साथ लेपर्ड का भी होगा सेंसस (PHOTO-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 10, 2026 at 3:33 PM IST

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रामनगर: विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इस बार टाइगर सेंसस के दौरान बाघों के साथ-साथ गुलदार (लेपर्ड) की संख्या का भी वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा. इसके लिए टाइगर गणना में इस्तेमाल किए गए कैमरा ट्रैप डेटा का उपयोग किया जाएगा, जिससे टाइगर बहुल क्षेत्रों में गुलदारों की वास्तविक संख्या का पता लगाया जा सकेगा.

विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हर वर्ष होने वाली बाघों की गणना (टाइगर सेंसस) अब वन्यजीव प्रबंधन के लिए और अधिक महत्वपूर्ण साबित होने जा रही है. इस बार बाघों की संख्या के साथ-साथ गुलदार (लेपर्ड) की आबादी का भी वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने जानकारी देते हुए बताया कि, लेपर्ड भी जंगल के खाद्य श्रृंखला तंत्र का एक महत्वपूर्ण शीर्ष शिकारी (प्रिडेटर) है. उन्होंने कहा कि, ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन के तहत कॉर्बेट से एकत्रित फील्ड डेटा और कैमरा ट्रैप डेटा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) को भेजा जा चुका है.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर के साथ लेपर्ड का भी होगा सेंसस (VIDEO-ETV Bharat)

डॉ. बडोला ने बताया कि, टाइगर सेंसस के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में केवल बाघ ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में गुलदारों की तस्वीरें भी रिकॉर्ड होती हैं. अब इन्हीं तस्वीरों और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर भारतीय वन्यजीव संस्थान टाइगर बहुल क्षेत्रों में लेपर्ड की संख्या का भी अनुमान लगाएगा. उन्होंने कहा कि यह वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे उन क्षेत्रों में गुलदारों की वास्तविक स्थिति और उनकी आबादी का बेहतर आकलन हो सकेगा. जहां बाघों की संख्या अधिक है. साथ ही इस डेटा के आधार पर पूरे राज्य में लेपर्ड की अनुमानित संख्या निर्धारित करने में भी सहायता मिलेगी.

वन विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ और गुलदार दोनों ही जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में दोनों प्रजातियों की सटीक गणना से उनके संरक्षण की रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा. कॉर्बेट में होने वाला यह प्रयास देश के अन्य टाइगर रिजर्वों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मॉडल साबित हो सकता है.

पिंजरे में कैद तेंदुआ: अल्मोड़ा नगर के कैंटोनमेंट क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लोगों के लिए चिंता का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया. बुधवार सुबह शहीद सैनिक स्मारक पार्क के पास लगाए गए पिंजरे में एक वयस्क तेंदुआ फंस गया. तेंदुए के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में लोगों ने राहत की सांस ली. सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए तेंदुए को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया.

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अल्मोड़ा में गुलदार पिंजरे में कैद (PHOTO-ETV Bharat)

जानकारी के अनुसार, अल्मोड़ा के कैंट क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तेंदुए की गतिविधियां लगातार बढ़ रही थीं. सुबह और शाम के समय कई लोगों ने तेंदुए को आबादी के आसपास घूमते हुए देखा था. इसके चलते स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ था. क्षेत्रवासियों द्वारा कई बार प्रशासन और वन विभाग से तेंदुए को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मांग की गई थी.

स्थानीय लोगों की शिकायतों और बढ़ती चिंताओं को देखते हुए जिलाधिकारी अंशुल सिंह के निर्देश पर वन विभाग ने शहीद सैनिक स्मारक पार्क के समीप पिंजरा लगाया था. वन विभाग की रणनीति सफल रही और बुधवार सुबह एक वयस्क तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया. तेंदुए के पकड़े जाने की खबर फैलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और वन विभाग की कार्रवाई की सराहना की. वन विभाग की टीम ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए तेंदुए को पिंजरे सहित रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया. वहां पर उसे निगरानी में रखा गया है.

वन विभाग के रेंजर मोहन राम ने बताया कि, तेंदुए को एनटीडी स्थित रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है. जहां वन्यजीव चिकित्सकों द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा. यदि जांच में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया जाता है तो उसे आबादी से दूर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर घबराने के बजाय तत्काल विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके.

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