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जमीन विवाद को लेकर ग्रामीणों ने सुनाया फरमान, किया परिवार का 'हुक्का-पानी बंद', जानिए पूरा मामला

पीड़ित का आरोप है कि थाने में रिपोर्ट देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

जिला पुलिस अधीक्षक
जिला पुलिस अधीक्षक (File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 3, 2026 at 11:47 AM IST

3 Min Read
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उदयपुर : जिले के ओगणा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत ने एक व्यक्ति के खिलाफ कठोर फरमान जारी किया गया. गांव वालों ने फरमान जारी कर उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया. पीड़ित का कहना है कि इसके तहत जो भी व्यक्ति उनके घर पर जाएगा या फिर उनकी दुकान से खरीदारी करेगा उसे हजारों रुपए का जुर्माना देना होगा. इसके लिए बाकायदा कुछ ग्रामीणों ने मिलकर पेपर पर लिखा पढ़ी भी की और उसके बाद वह फरमान गांव में बांट दिया.

यह पूरा मामला 24 दिसंबर का है और 26 दिसंबर को पीड़ित की ओर से ओगणा थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई. उनका आरोप है कि अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ऐसे में पीड़ित ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर और जिला कलेक्टर के साथ जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप कर आपबीती सुनाई. इस मामले में ओगणा थानाधिकारी राम अवतार का कहना है कि जमीन को लेकर विवाद की जानकारी मिली थी. दोनों पक्षों को बुलाकर पाबंद किया गया है. उनके अनुसार 'हुक्का-पानी बंद' या सामाजिक बहिष्कार जैसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है.

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पीड़ित का कहना है कि जब से उसे गांव से बाहर किया गया है तब से वह और उसका पूरा परिवार परेशान है. उनका आरोप है कि थाने में रिपोर्ट देने की सूचना जब कुछ ग्रामीणों को मिली तो बहिष्कृत करने वाले कुछ लोगों ने जान से मारने की धमकी भी दे डाली. धमकी के बाद अब पूरा परिवार सदमे में है. पीड़ित ने न्याय की मांग की है और बहिष्कृत करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है

पीड़ित रतनलाल ने बताया कि उन्होंने दिनेश जैन नामक व्यक्ति के साथ मिलकर गांव में एक बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य शुरू किया था. हालांकि, ग्रामीणों ने इस निर्माण पर आपत्ति जताते हुए इसे चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास बताया. विरोध के बाद रतनलाल ने तुरंत निर्माण कार्य बंद कर दिया था. इसके बावजूद कुछ ग्रामीणों ने ढोल बजाकर खाप पंचायत बुलाई और पंचायत में रतनलाल के खिलाफ हुक्का-पानी बंद करने का फरमान सुना दिया गया.

पीड़ित का आरोप है कि पंचायत में उनकी बात सुने बिना ही सामाजिक बहिष्कार का निर्णय ले लिया गया, जिससे उन्हें मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है. यह घटना 24 दिसंबर की बताई जा रही है. रतनलाल ने 26 दिसंबर को ओगणा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत दर्ज होने के छह दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है. पीड़ित ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है.