स्कूल जतन योजना में भ्रष्टाचार का आरोप, मरम्मत के बाद भी गिर रहा प्लास्टर, धर्मशाला बना वैकल्पिक स्कूल
बेमेतरा में स्कूल जतन योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है.इस योजना के तहत जिन स्कूलों की मरम्मत हुईं, उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 9, 2026 at 1:06 PM IST
बेमेतरा: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्कूल जतन योजना' में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने के लिए शासन ने 100 करोड़ की भारी भरकम राशि जारी की थी. दावे था कि अब बच्चों को सर्वसुविधायुक्त और सुरक्षित माहौल मिलेगा. लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने मासूमों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है. स्कूल जतन योजना के अंतर्गत मरम्मत किए गए 50 से अधिक स्कूल अब भी जर्जर है और योजना में हुए भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं.
2 साल में ही खुली पोल, स्कूल में मची अफरा-तफरी
ताजा मामला बेमेतरा नगरपालिका अंतर्गत आने वाले इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक 7 के नवीन प्राथमिक शाला से सामने आया है. सत्र 2022-23 में महज दो साल पहले जिस स्कूल भवन की मरम्मत पर लाखों रुपए बहाए गए थे, उसकी छत का प्लास्टर अब भरभरा कर गिरने लगा है. स्कूल शिक्षिका ने बताया कि पहले कक्षाओं में प्लास्टर गिर रहा था, जिसके बाद सुरक्षा के नाते बच्चों को हॉल में बिठाया गया. लेकिन लापरवाही की हद देखिए, अब हॉल की छत से भी कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े टूटने लगे हैं. एक बड़े हादसे के डर से स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में बच्चों की छुट्टी कर दी है.साथ ही दुर्घटना की लिखित सूचना जिला शिक्षा अधिकारी और नगरपालिका को भेज दी गई है.

शाला प्रबंधन ने हैंडओव्हर लेने से किया इनकार
वहीं दूसरा मामला बेमेतरा जिला के नवागढ़ विधानसभा के ग्राम भनसूली के स्कूल का है. जहां मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अंतर्गत शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में 96 लाख रुपए की लगत से अतिरिक्त कक्ष बनाया गया है. जो हैंडओवर से पहले ही जर्जर हो गया, जिसे देखते हुए शाला प्रबंधन ने हैंड ओवर से इनकार कर दिया है.

सिंधी धर्मशाला बना 'वैकल्पिक स्कूल'
कंक्रीट गिरते देख सहमे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए बेमेतरा नगरपालिका ने आनन -फानन में एक अस्थाई व्यवस्था की है. अब इस प्राथमिक शाला के बच्चों की कक्षाएं 'सिंधी धर्मशाला' में लगाई जा रही हैं. यह स्थिति प्रशासन के उन तमाम विकास के दावों की पोल खोलती है, जो कागजों पर चमक रहे हैं.
कलेक्टर ने मंगवाई रिपोर्ट
स्कूल खुलने के बाद जर्जर भवनों का मामला तूल पकड़ते ही बेमेतरा जिला प्रशासन बैकफुट पर है. कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगोई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों की आपात बैठक बुलाई है.कलेक्टर ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी जर्जर स्कूलों की तत्काल तकनीकी जांच और मरम्मत कराई जाए.
हमने जो भवन अत्यधिक जर्जर और जानलेवा हो चुके हैं, उन्हें तुरंत डिस्मेंटल करने के निर्देश दिए हैं. संबंधित विभाग को इस पर त्वरित कार्रवाई कर 20 जुलाई तक प्रशासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है- प्रतिष्ठा ममगई, कलेक्टर
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी 'दबी' है जांच रिपोर्ट
हैरानी की बात ये है कि करीब एक वर्ष पहले स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 'स्कूल जतन योजना' में बड़े पैमाने पर हुई इस गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे. लेकिन प्रशासनिक सुस्ती का आलम देखिए कि इस जांच रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.रिपोर्ट सार्वजनिक न होने के कारण दोषी अधिकारियों और भ्रष्ट ठेकेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है, और इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.
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