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यूपी के ये फौलादी पुल जो 100 साल तक नहीं हिले, अंग्रेजों की सुपर्ब इंजीनियरिंग, हमीरपुर जैसे नए पुल क्यों ताश जैसे ढह रहे?

हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के धराशायी होने के बाद याद की जाने लगी अंग्रेजों के जमाने की इंजीनियरिंग.

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यूपी के 3 फौलादी पुल जो 100 साल में भी नहीं गिरे. (etv bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 31, 2026 at 11:28 AM IST

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Updated : May 31, 2026 at 11:34 AM IST

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लखनऊ: हमीरपुर में 29 मई को निर्माणाधीन पुल धराशायी हो गया. इस हादसे में छह मजदूरों की जान चली गई. ऐसे में एक बार फिर पुलों के निर्माण में भ्रष्टाचार का परतें सामने आने लगी है. ऐसे में यूपी के मजबूत पुलों को याद किया जा रहा है. ऐसे में चलिए आपको रूबरू कराते हैं ऐसे ही यूपी के तीन पुलों के बारे में जो अंग्रेजों के जमाने के थे. इन पुलों ने 100 साल से ज्यादा की उम्र पार की. न कभी कोई हादसा हुआ और न ही कहीं से भ्रष्टाचार की परत उधड़ी. ये पुल आज भी यूपी के फौलादी पुलों के लिए नजीर माने जाते हैं.

  • ओल्ड नैनी का पुल- प्रयागराज का यह पुल यूपी का सबसे बेहतरीन पुल माना जाता है. यह पुल यमुना नदी पर स्थित है. यह पुल देश के सबसे पुराने और मजबूत पुलों में एक माना जाता है. दो मंजिला इस लोहे के पुल के ऊपरी हिस्से पर रेल ट्रैक और नीचे सड़क मार्ग बनाया है. इसके 13वें पिलर की अनूठी बनावट हाथी के पैर जैसी है. इस वजह से यह पुल बेहद मजबूत माना जाता है. इस पुल का निर्माण 1865 में अंग्रेजों ने कराया था.

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  • मालवीय ब्रिज: इस पुल का निर्माण 1887 में अंग्रेजों ने बनारस में कराया था. पहले इस पुल का मूल नाम डफरिन ब्रिज हुआ करता था. देश के आजाद होने के बाद इस पुल का नाम बदलकर शिक्षाविद मदन मोहन मालवीय के नाम पर मालवीय ब्रिज कर दिया गया था. यह पुल भी दो स्तरीय है. इसके निचले हिस्से में ट्रेनें और ऊपरी हिस्से में भारी और हल्के वाहन निकलते हैं. यह पुल बनारस के बेहद मजबूत पुलों में एक माना जाता है. यह पुल भी अंग्रेजों की इंजीनियरिंग की मिसाल के तौर पर देखा जाता है.
  • कानपुर-उन्नाव गंगा पुल: इस पुल का निर्माण 1875 में अंग्रेजों ने कराया था. यह पुल कानपुर और उन्नाव को जोड़ने की अहम कड़ी था. कानपुर और शुक्लागंज का सारा ट्रैफिक इसी पुल से गुजरता था. रोज हजारों वाहनों के लोड को सहने वाला यह पुल 2023 तक सही सलामत रहा था. इस पुल का 148 साल का सफरनामा रहा. इस दौरान देश की आजादी से लेकर कोरोना काल तक यह पुल सलामत रहा. हालांकि 2023 के अंत में इस पुल पर ट्रैफिक रोक दिया गया और इसके समानांतर नया पुल बना दिया गया. 2024 में इस बंद पुल का एक हिस्सा गंगा में गिर गया था. इस पुल ने अपना जीवनकाल सफलतापूर्वक पूरा किया.

यूपी के ये पुल भी बेहद मजबूत

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प्रयागराज का कर्जन ब्रिज इंजीनियरिंग की मिसाल है. (etv bharat file photo)
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कानपुर के गुजैनी में स्थित अंग्रेजों के जमाने का पुल. (etv bharat file photo)
  • कर्जन ब्रिज (प्रयागराज): गंगा नदी पर बना लगभग 125 साल पुराना है. यह पुल प्रयागराज को अयोध्या और लखनऊ से जोड़ता है. यह पुल फिलहाल बंद कर दिया गया है. अब इसे पर्यटन स्थल और पिकनिक स्पॉट के रूप में तैयार किया जा रहा है.
  • बालावाली गंगा पुल (बिजनौर): बिजनौर के बालावाली में वर्ष 1888 में गंगा नदी पर यह पुल बनाया गया था. इस पुल की आयु करीब 138 वर्ष बताई जाती है.
  • केन नदी रेल पुल (बांदा): बांदा में केन नदी पर इस पुल का निर्माण 1889 में हुआ था. यह पुल अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है. यह पुल अब भी चल रहा है.
  • मेहरबान सिंह पुरवा का पुल (कानपुर): कानपुर में पांडु नदी पर इस पुल को बनाया गया था. इसकी आयु भी 100 साल से ज्यादा है. इस पुल के निर्माण में सीमेंट और सरिया का इस्तेमाल नहीं किया गया है. यह पुल अंग्रेजों की इंजीनियरिंग का खास नमूना है.


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Last Updated : May 31, 2026 at 11:34 AM IST