तेजो महालय विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका को माना विचारणीय, केंद्र सरकार समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी
कोर्ट ने जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ से केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 6, 2026 at 9:47 PM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित तेजो महालय मंदिर प्रकरण में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को विचारणीय माना है. न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया तथा सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है.
याचिका स्वीकार कर केंद्र सरकार से मांगा जवाब: याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने अदालत को बताया कि मूल वाद में आदेश 26 नियम 9 सीपीसी के तहत स्थानीय आयुक्त नियुक्त करने का आवेदन ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इसके विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका भी पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दी गई, जिसके बाद हाईकोर्ट में अनुच्छेद 227 के तहत याचिका दाखिल की गई.
केंद्र सरकार समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी: सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला आगे सुनवाई के लिए विचारणीय है. इसके साथ ही कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या-4 को नोटिस जारी करने और 10 दिनों के भीतर आरपीएडी सहित सामान्य प्रक्रिया से नोटिस की तामील कराने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक सभी प्रतिवादी अपना काउंटर एफिडेविट यानी जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं. मामले की अगली सुनवाई अब नोटिस में निर्धारित तिथि पर संपन्न होगी.
तेजो महालय विवाद की वजह क्या है: आगरा के प्रसिद्ध ताजमहल के मूल स्वरूप को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है. इस विवाद का मुख्य केंद्र यह दावा है कि ताजमहल कोई मुगल मकबरा नहीं, बल्कि भगवान शिव का प्राचीन हिंदू मंदिर था, जिसे तेजो महालय कहा जाता था. इस विवाद की शुरुआत मुख्य रूप से इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक की 1965 में प्रकाशित हुई एक किताब से हुई थी. उन्होंने दावा किया था कि शाहजहां ने जयपुर के राजा जयसिंह से एक शिव मंदिर (तेजो महालय) हड़प कर उसे मकबरे का रूप दे दिया था.
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