गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की पर हाईकोर्ट ने कहा- "संदेह या अनुमान पर नहीं चलती अदालत, सिर्फ आपराधिक इतिहास होने से नहीं कुर्क होगी प्रॉपर्टी"
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के विशेष न्यायाधीश के आदेश को पलटते हुए मकान और वाहन मुक्त करने के निर्देश दिए हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 10:37 PM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास होने मात्र से उसकी संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क नहीं किया जा सकता. जब तक राज्य यह ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित न कर दे कि संबंधित संपत्ति अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई है, तब तक कुर्की का आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता. न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल ने अर्जुन जायसवाल एवं तीन अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता वाजिद अली को सुनकर दिया है. कोर्ट ने आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए गोरखपुर के विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) के 19 नवंबर 2022 के आदेश में संशोधन कर दिया.
कोर्ट ने मकान और वाहनों को तत्काल मुक्त करने का दिया आदेश: न्यायालय ने गाटा संख्या-206 पर बने पक्के मकान तथा दो वाहनों की कुर्की निरस्त करते हुए उन्हें उनके वैध स्वामियों को तत्काल मुक्त करने का निर्देश दिया. हालांकि एक वाहन की कुर्की बरकरार रखी गई, क्योंकि उसके पंजीकृत स्वामी रामशरण निषाद ने न तो कोई आपत्ति दाखिल की और न ही संपत्ति पर अपना दावा प्रस्तुत किया. मामले में जिला मजिस्ट्रेट, गोरखपुर ने वर्ष 2021 में गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत अर्जुन जायसवाल की कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया था. अपीलकर्ताओं का कहना था कि मकान और अधिकांश संपत्तियां पैतृक हैं तथा परिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा मिला था.
बैंक लोन और वैध आय के दस्तावेजी सबूतों को कोर्ट ने माना सही: वाहनों की खरीद बैंक ऋण और वैध आय से की गई थी. इसके समर्थन में उन्होंने खतौनी, बैंक विवरण, आयकर रिटर्न, कृषि आय, भूमि अधिग्रहण मुआवजे और वाहन ऋण संबंधी दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए. हाईकोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 के तहत संपत्ति कुर्क करना असाधारण शक्ति है, जिसका प्रयोग तभी किया जा सकता है जब संपत्ति और अपराध से अर्जित आय के बीच स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष संबंध स्थापित हो. अदालत ने कहा कि केवल संदेह, अनुमान या आरोपी के विरुद्ध दर्ज मुकदमों के आधार पर संपत्ति को अपराध की आय मान लेना कानून सम्मत नहीं है.
वित्तीय साक्ष्य जुटाने में नाकाम रहा अभियोजन पक्ष: राज्य को यह साबित करना होगा कि संपत्ति वास्तव में गैंगस्टर गतिविधियों से अर्जित धन से खरीदी गई है. न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे यह सिद्ध हो कि मकान और तीनों वाहन अपराध से अर्जित धन से खरीदे गए थे. न धन के स्रोत की जांच की गई और न ही कोई वित्तीय कड़ी स्थापित की गई. इसलिए विशेष न्यायाधीश का निष्कर्ष केवल अनुमान पर आधारित था, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कुर्की आदेश रद्द कर अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली.
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