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संभल में कब्रिस्तान की पैमाइश पर रोक लगाने से हाईकोर्ट ने किया इनकार, कहा- राजस्व टीम के सामने आपत्ति दर्ज कराएं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के गांव कोट में स्थित जमीन की पैमाइश और सर्वे की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : December 31, 2025 at 10:39 PM IST

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के गांव कोट (अंदर चुंगी) में स्थित जमीन की पैमाइश और सर्वे की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले को लेकर दाखिल याचिका निस्तारित करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता राजस्व टीम के समक्ष उपस्थित होकर पैमाइश के दौरान अपनी आपत्तियां और पक्ष रख सकते हैं. यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने असिम खान और 17 अन्य की याचिका पर दिया है.

विशेष समुदाय को बेदखल करने की कोशिश: याचिका में संभल के उपजिलाधिकारी के दिसंबर 2025 में जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गाटा संख्या 32/2 के सर्वेक्षण और सीमांकन के निर्देश दिए गए थे. याचियों के अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी का कहना था कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है और इस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के विरुद्ध है. आदेश एक तरफा है और एक समुदाय विशेष के लोगों को बेदखल करने की कोशिश है.

भूमि सरकारी रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है: राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कहा कि विवादित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है और प्रशासन की ओर से केवल पैमाइश और सीमांकन कराया जा रहा है, जिससे किसी के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे. वहीं, याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि सड़क बनाकर कब्रिस्तान का अवैध विभाजन किया गया है. पैमाइश की आड़ में एक विशेष समुदाय को बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है.

कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आदेश केवल भूमि के मापन और सीमांकन से संबंधित है. ऐसे में कार्रवाई पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता है. कोर्ट ने याचियों को आदेश की कॉपी के साथ राजस्व टीम के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराने का निर्देश दिया है.

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