Allahabad High Court का आदेश, अपराध में सबूतों के अभाव में बरी तो विभागीय जांच नहीं होगी प्रभावित
हाईकोर्ट ने विभागीय कार्यवाही रद करने की आरोपी शिक्षक की याचिका खारिज.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 7:38 AM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि आपराधिक मुकदमे में साक्ष्य के अभाव के कारण आरोपी की बरी कर दिया गया है तो इससे विभागीय जांच कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी.
कोर्ट ने कहा कि अपराध मुक्ति सम्मानजनक होनी चाहिए. सबूतों की कमी पर बरी होने से यह नहीं कहा जा सकता कि विभागीय कार्यवाही भी समाप्त की जाए. इसी के साथ कोर्ट ने बारहवीं कक्षा की चार छात्राओं से छेड़छाड़, अश्लील हरकत व अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में अध्यापक के खिलाफ चल रही विभागीय जांच कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है.
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने जगतपुर इंटर कॉलेज वाराणसी के विषय विशेषज्ञ अध्यापक संतोष कुमार शर्मा की याचिका पर दिया है. अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने याचिका का विरोध किया. मामले के तथ्यों के अनुसार चार छात्राओं ने याची के खिलाफ अश्लील भाषा इस्तेमाल करने की शिकायत की. उसके बाद याची को निलंबित कर उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.
जिला विद्यालय निरीक्षक ने निलंबन का अनुमोदन नहीं किया. इसके बाद चार्जशीट दी गई, जिसमें अश्लील हरकत, छेड़छाड़ करने, दुपट्टा व गाल खींचने एवं अश्लील बातें करने का आरोप लगाया गया. जांच अधिकारी ने दोषी करार देते हुए रिपोर्ट दी. प्रबंध समिति ने याची को कारण बताओ नोटिस दिया, जिसका जवाब दिया गया. प्रबंध समिति ने डीआईओएस को प्रस्ताव भेजा, जिसे अस्वीकार कर दिया कि रिपोर्ट पीड़िता के बयान पर आधारित है. इसका साक्ष्य नहीं है. प्रबंध समिति ने इसे हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में चुनौती दी. कोर्ट ने डीआईओएस के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को कागजात दिए जाएं, सचिव निर्णय लेंगे।
इस मामले में एक पीड़िता ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी. आपराधिक मुकदमे में अभियोजन के अपराध साबित न कर पाने के कारण याची को बरी कर दिया गया. कहा गया कि प्रबंधक से वैमनस्यता के कारण मुकदमा दर्ज कराया गया. इसके बाद याचिका दाखिल कर कहा गया कि अपराध में बरी किए जाने के बाद विभागीय कार्यवाही भी समाप्त की जानी चाहिए.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों पर विचार के बाद कहा कि सम्मानजनक दोषमुक्त न किया गया हो तो आपराधिक कार्यवाही में साक्ष्य के अभाव में बरी होने से विभागीय जांच कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी. इसी के साथ कोर्ट ने विभागीय जांच कार्यवाही पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी.
परिक्रमा मार्ग से अतिक्रमण हटाने की जानकारी मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर की शाहगंज तहसील स्थित कौड़िया गांवसभा में परिक्रमा मार्ग व पौदर पर मतलूब व परिवार के अवैध कब्जे के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार व गांव सभा से दो सप्ताह में जानकारी मांगी है. यह आदेश न्यायमूर्ति सीके राय ने मोहम्मद फैज की जनहित याचिका पर अधिवक्ता अभिषेक यादव को सुनकर दिया है. अधिवक्ता अभिषेक यादव का कहना है कि पौदर से गांव के लोगों का आवागमन है. पशु, ट्रैक्टर से खेती का काम इसी रास्ते से किया जाता है. गांव के ही मतलूब ने मार्ग को घेरकर पक्का निर्माण करा लिया और रास्ता बंद कर दिया है, जिससे गांव वालों को काफी परेशानी हो रही है. याचिका में पौदर से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है.
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