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हाईकोर्ट ने कहा- "लंबित मुकदमों के बहाने नागरिकों को परेशान न करे पासपोर्ट विभाग"

हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय किसी नागरिक का पासपोर्ट आवेदन नहीं लटका सकता.

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हाईकोर्ट: केवल केस लंबित होने से नहीं रोका जा सकता पासपोर्ट, 3 महीने में निर्णय लेने का निर्देश (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 30, 2026 at 9:46 PM IST

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​प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नागरिक हितों से जुड़ा आदेश पारित किया है. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल किसी आपराधिक मामले के लंबित होने के आधार पर किसी भी नागरिक के पासपोर्ट आवेदन को बिना किसी तार्किक आदेश के अनिश्चितकाल के लिए लटकाया नहीं जा सकता. यह दूरगामी आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रशांत की खंडपीठ ने मरियम बानो नामक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. याचिकाकर्ता मरियम बानो की ओर से कोर्ट में उनके अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती ने पक्ष रखते हुए दलीलें पेश कीं.

आपराधिक मामले के कारण फंसा था आवेदन: एडवोकेट निर्भय कुमार भारती ने माननीय कोर्ट को अवगत कराया कि क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) ने सिर्फ एक आपराधिक मामला लंबित होने की वजह से याची के पासपोर्ट आवेदन पर लंबे समय से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है. इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूर्व में आ चुके 'पवन कुमार राजभर बनाम भारत संघ' मामले के ऐतिहासिक कानूनी फैसले का विशेष हवाला दिया. कोर्ट ने कहा कि केवल जांच (इन्वेस्टिगेशन) के स्तर पर किसी आपराधिक मामले का लंबित होना, किसी भी नागरिक के पासपोर्ट आवेदन को सीधे खारिज करने का वैध कानूनी आधार बिल्कुल नहीं हो सकता.

अलग से एनओसी की जरूरत नहीं: अदालत ने इसके साथ ही 'हर्षित वैश बनाम यूपी राज्य व विदेश मंत्रालय' के छह दिसंबर 2024 के महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञाप (Office Memorandum) का भी विस्तार से जिक्र किया. कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह के मामलों में आवेदक को अलग से किसी विशेष एनओसी (NOC) की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन संबंधित निचली अदालत से विदेश यात्रा की अनुमति का एक स्पष्ट आदेश होना अनिवार्य है. विधिक प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए खंडपीठ ने आगे कहा कि यदि संबंधित कोर्ट ने अपने आदेश में पासपोर्ट की कोई विशिष्ट समय सीमा या अवधि तय नहीं की है, तो केंद्र सरकार के 25 अगस्त 1993 के आधिकारिक नोटिफिकेशन के नियमों का पालन किया जाएगा.

तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश: इस नोटिफिकेशन के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में आवेदक को कम से कम एक वर्ष की निर्धारित अवधि के लिए नया पासपोर्ट अनिवार्य रूप से जारी किया जाएगा. इन सभी कानूनी बिंदुओं को रेखांकित करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची मरियम बानो को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के समक्ष अपना एक नया और विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें. इसके साथ ही माननीय न्यायालय ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को आदेशित किया है कि वे इस नए प्रतिवेदन पर गहनता से विचार करें. पासपोर्ट विभाग को सभी स्थापित नियमों व न्यायिक फैसलों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर पासपोर्ट जारी करने पर उचित और विधिक निर्णय लेने का कड़ा निर्देश दिया गया है.

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