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बंदरों के आतंक पर हाईकोर्ट तल्ख, समिति अध्यक्षों को अगली सुनवाई पर हाजिर रहने के निर्देश

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने दिया आदेश.

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 2, 2026 at 10:45 PM IST

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प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए बनाई गई 13 अधिकारियों की समिति की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा कि समिति का गठन महज आंखों में धूल झोंकने जैसा साबित हुआ है, जिसका उद्देश्य केवल मामले में स्थगन लेना और वास्तव में कुछ न करना है.

कोर्ट ने कहा कि "समिति सदस्यों का यह रवैया और राज्य सरकार का कोर्ट के आदेशों के प्रति सामान्य नजरिया स्वीकार्य नहीं है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बंदरों की यह समस्या पिछले करीब 15 महीनों से आम जनता के लिए लगातार परेशानी का सबब बनी हुई है, फिर भी अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं."

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने विनीत शर्मा व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. राज्य सरकार ने गत 15 जुलाई को 13 अधिकारियों की एक समिति गठित की थी, जिसे याचियों की प्रस्तावित कार्ययोजना पर विचार कर उपाय बताने थे.

कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि समिति नियमित अंतराल पर बैठकें करें और यह केवल कागजों तक सीमित न रहें, बैठकों की प्रगति व कार्यवृत्त न्यायालय के समक्ष रखी जाएं. राज्य की ओर से बताया गया कि समिति की केवल एक बैठक 21 अगस्त को यानी सुनवाई से महज दस दिन पहले हुई थी, जिसमें चार सप्ताह की और मोहलत मांगी गई. इसके साथ पेश उपस्थिति पत्रक से यह भी पता चला कि समिति के दोनों संयुक्त अध्यक्ष प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी बैठक में मौजूद ही नहीं थे.

कोर्ट ने पाया कि इकलौती बैठक के भी कोई कार्यवृत्त तैयार नहीं किए गए और उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर के अलावा कुछ नहीं हुआ. कोर्ट ने निर्देश दिया कि समिति के सदस्य अब हर सप्ताह बैठक करेंगे और प्रत्येक बैठक का कार्यवृत्त तैयार करेंगे. अगली सुनवाई से पहले समिति को कोई ठोस निर्णय लेकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा.

निर्देश के अनुसार बैठकें नहीं हुईं तो प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन एवं प्रमुख सचिव नगर विकास को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा. मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.

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