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हाईकोर्ट का आदेश: कोविड ड्यूटी में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोविड ड्यूटी के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है.

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हाईकोर्ट ने शासनादेश के तहत 50 लाख रुपये देने का आदेश दिया. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 4, 2026 at 10:33 PM IST

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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोविड महामारी के दौरान सार्वजनिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए जान गंवाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनुग्रह राशि से वंचित नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने एक पुलिसकर्मी के परिवार को राहत प्रदान करते हुए प्रदेश सरकार की पुनर्विचार अर्जी को खारिज कर दिया है. हेड कांस्टेबल विजय बहादुर सिंह की पत्नी कृष्णा सिंह ने इस मामले में याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने उन्हें मुआवजे का हकदार माना था. हाईकोर्ट ने दो नवंबर 2023 के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को 11 अप्रैल 2020 के शासनादेश के तहत 50 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है.

सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये पर कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के दोहरे मापदंडों पर कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि एक मामले में लाभ देना और समान परिस्थितियों वाले दूसरे मामले में वित्तीय बोझ का हवाला देकर मना करना भेदभावपूर्ण है. एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार को अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए. कोर्ट ने चंपा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में पहले दिए गए आदेश का संदर्भ देते हुए यह राहत प्रदान की है.

पुनर्विचार याचिका को कोर्ट ने किया खारिज: हाईकोर्ट ने कहा कि पुनर्विचार याचिका का दायरा बहुत सीमित होता है और इसे केवल तभी स्वीकार किया जा सकता है जब आदेश में कोई स्पष्ट त्रुटि हो. कोर्ट ने इस मामले में पाया कि मूल आदेश में कोई गलती नहीं थी, इसलिए सरकार की अर्जी खारिज करने योग्य है. इस फैसले से उन सभी मृत कर्मचारियों के परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो अभी भी मुआवजे के इंतजार में हैं. न्यायपालिका के इस रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित और मानवीय आधार पर सरकार अपने उत्तरदायित्वों से पीछे नहीं हट सकती.

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