निकाय चुनाव: राजनीतिक सरगर्मी के बीच गौण हुए स्थानीय मुद्दे, गैरदलीय आधार पर चुनाव महज औपचारिकता
झारखंड निकाय चुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियों के छोटे से बड़े नेता अपने-अपने समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं.

Published : February 18, 2026 at 8:49 PM IST
रांची: नगर निकाय चुनाव भले ही गैरदलीय आधार पर हो रहा है. लेकिन जिस तरह से राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप हो रहा है, उससे साफ लग रहा है कि चुनाव किसी विधानसभा-लोकसभा चुनाव से कम नहीं है. नगर निगम के महापौर जैसे मलाईदार पद को जीतने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने पूरी तरह से नेताओं की फौज खड़ी कर दी है.
झारखंड निकाय चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही प्रदेश भाजपा का मानना है कि शहरी क्षेत्र में इस बहाने अपनी दमदार उपस्थिति दिखाने का मौका पार्टी को मिलेगा. पार्टी ने इसी उद्देश्य से सभी बड़े और स्थानीय नेताओं को चुनाव मैदान में पार्टी समर्थित उम्मीदवार के प्रचार के लिए उतारा है. बीजेपी में मंडल से लेकर दिल्ली तक इस चुनाव की मॉनिटरिंग की जा रही है. प्रदेश भाजपा कार्यालय में वार रूम तक बनाकर नजर रखी जा रही है.
जेएमएम ने प्रत्यक्ष रूप से चुनाव में रहने से किया इनकार
जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य पार्टी के इस चुनाव में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने से इनकार किया हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह से बीजेपी-कांग्रेस ने दलीय चुनाव बनाने की कोशिश की, उसपर निर्वाचन आयोग को संज्ञान लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे शुरू से कह रहे हैं कि यह चुनाव दलीय चेतना से लड़ना चाहिए, ना कि दलीय आधार पर, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इधर कांग्रेस समर्थित रांची महापौर उम्मीदवार रमा खलखो कहती हैं कि पार्टी द्वारा पूरा समर्थन मिल रहा है. वहीं भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक कहते हैं कि खुद झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका उल्लंघन करता रहा है.
बीजेपी के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए कांग्रेस-जेएमएम ने झोंकी ताकत
निकाय चुनाव में बीजेपी के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए कांग्रेस-जेएमएम ने भी ताकत झोंक रखी है. प्रदेश कांग्रेस ने मंत्री और प्रभारी को विशेष रूप से चुनाव की जिम्मेदारी दी है. कांग्रेस भवन में इस चुनाव को लेकर विशेष टीम बनाई गई है, जो लगातार प्रचार प्रसार से लेकर चुनाव प्रबंधन पर नजर रख रही है. चुनाव प्रचार में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, सुबोधकांत सहाय, बंधु तिर्की जैसे दिग्गज नेता उतरे हुए हैं. इसके अलावे कांग्रेस कोटे के चारों मंत्री चुनाव मैदान में पार्टी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने में जुटे हैं.
इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित उम्मीदवार के चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशेष नजर रख रहे हैं. नगर निकाय चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवार की अधिक से अधिक जीत सुनिश्चित कराने के लिए सभी सांसद, विधायक और मंत्री के अलावे पार्टी के केंद्रीय नेताओं को विशेष रूप से जिम्मेदारी दी गई है. जाहिर तौर पर राजनीतिक दलों के इस हस्तक्षेप के बाद आम लोगों के स्थानीय मुद्दे गौण हो गये हैं और अप्रत्यक्ष ही सही दलीय आधार पर वोटरों की गोलबंदी होनी शुरू हो गई है.
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