DUSU चुनाव में पैरेंटल कंसेंट के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची AISA, जानें क्या है पूरा मामला
2 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और मामले को तत्काल सुनवाई की मांग की गई है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन


Published : September 2, 2026 at 4:10 PM IST
|Updated : September 2, 2026 at 5:49 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में उम्मीदवारों के लिए अभिभावकों की सहमति अनिवार्य किए जाने के खिलाफ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है. AISA के कार्यकर्ताओं अनन्या रतूड़ी और अक्षत शिखर ने 2 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर DUSU चुनाव समिति की ओर से जारी नए शपथपत्र को चुनौती दी है. संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले वयस्क छात्रों को चुनाव लड़ने के लिए माता-पिता की अनुमति लेने के लिए बाध्य करना उनके लोकतांत्रिक और व्यक्तिगत अधिकारों में हस्तक्षेप है.
AISA के मुताबिक, DUSU चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए अब छात्र को अपने साथ अभिभावक से भी एक शपथपत्र जमा कराना होगा. इसमें अभिभावक को यह घोषित करना होगा कि उन्हें अपने बच्चे के चुनाव लड़ने की जानकारी है और वे इसके लिए सहमत हैं. साथ ही चुनाव के दौरान छात्र कानून के अनुरूप आचरण की जिम्मेदारी लेने की बात भी कही गई है. AISA ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र वयस्क होते हैं और उन्हें किसी पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए अभिभावक की अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए.
सभी वयस्क छात्रों पर अभिभावक की अनुमति क्यों
AISA ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले हजारों छात्र अपनी पढ़ाई और जीवन का खर्च खुद उठाते हैं. संगठन का कहना है कि नए शपथपत्र में यह मान लिया गया है कि छात्रों की शिक्षा और आर्थिक जरूरतों की जिम्मेदारी उनके माता-पिता ही उठाते हैं. संगठन के अनुसार, ऐसे में अगर कोई छात्र अपनी समस्याओं को लेकर चुनाव लड़ना चाहता है और अपने स्तर पर राजनीतिक या सामाजिक भूमिका निभाना चाहता है, तो अभिभावक की सहमति को अनिवार्य करना उसके अनुभव और स्वायत्तता के विपरीत है.
महिला छात्रों को लेकर भी उठाए सवाल:
AISA ने नए नियम के महिला छात्रों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठाए हैं. संगठन का कहना है कि कई छात्राओं को अपने परिवार में ही अपनी पसंद और लोकतांत्रिक गतिविधियों को लेकर संघर्ष करना पड़ सकता है. AISA का कहना है कि अभिभावक की सहमति अनिवार्य होने से ऐसी छात्राओं के लिए DUSU चुनाव में हिस्सा लेना मुश्किल हो सकता है, जो अपने परिवार से राजनीतिक समर्थन नहीं पाती हैं.
1 लाख रुपए के बॉन्ड के बाद अब पैरेंटल कंसेंट पर विवाद:
AISA ने DUSU चुनाव प्रक्रिया में लगातार नए नियम जोड़े जाने पर भी सवाल उठाया है. संगठन ने कहा कि पिछले साल उसने 1 लाख रुपए के बॉन्ड से जुड़े नियम को अदालत में चुनौती दी थी और मामले में उसे राहत मिली थी. संगठन के अनुसार, अपील के बाद अदालत के निर्देश पर इसे इंडेम्निटी एफिडेविट के रूप में जमा कराने की व्यवस्था की गई. AISA का कहना है कि इस साल अभिभावक की सहमति से जुड़ी नई शर्त सामने आई है. संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे नियम DUSU चुनाव को आम छात्रों के लिए अधिक कठिन और कम लोकतांत्रिक बना सकते हैं.
‘DUSU किसका है?’ AISA ने उठाया सवाल:
संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि DUSU चुनाव में आखिर किन छात्रों की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है. AISA का कहना है कि 1 लाख रुपए के बॉन्ड और पैरेंटल कंसेंट जैसी शर्तें उन छात्रों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं, जिनके पास आर्थिक या राजनीतिक संसाधन सीमित हैं. AISA ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव छात्रों की समस्याओं और आकांक्षाओं को सामने रखने का मंच होना चाहिए, न कि ऐसा चुनाव जहां केवल बड़े संसाधन वाले उम्मीदवार ही प्रभावी ढंग से भाग ले सकें.
AISA ने बताया कि 2 सितंबर की सुबह दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की मांग की गई है. संगठन ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और DUSU चुनाव समिति के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में ऐसे नियम नहीं होने चाहिए जो छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित करें.
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