'सुधार' नहीं, साजिश है मनरेगा का नया ढांचा, अलका लांबा का केंद्र पर हमला
कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष अलका लांबा ने मनरेगा बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने इस बिल को साजिश बताया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 22, 2025 at 5:39 PM IST
धर्मशाला: अखिल भारतीय कांग्रेस महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को 'सुधार' के नाम पर खत्म करने का गंभीर आरोप लगाया है. धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह केवल एक सरकारी योजना में बदलाव नहीं, बल्कि देश के गरीबों और मजदूरों से उनके काम के संवैधानिक अधिकार को छीनने की साजिश है. उन्होंने इसे जन-विरोधी और संविधान-विरोधी कदम बताया.
अलका लांबा ने कहा कि मोदी सरकार ने लोकसभा में एक नया बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार देने की योजना नहीं है, बल्कि यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की सोच का प्रतीक रही है.
'संवैधानिक अधिकारों पर चोट'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत काम के अधिकार की गारंटी देता था, लेकिन नए फ्रेमवर्क के जरिए इसे शर्तों वाली और केंद्र के नियंत्रण में चलने वाली स्कीम में बदल दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह गरीबों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने की जानबूझकर की गई कोशिश है.
राज्यों पर डाला गया आर्थिक बोझ
अलका लांबा ने कहा कि मनरेगा अब तक पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना थी, लेकिन अब राज्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये का बोझ डाल दिया गया है. उन्होंने इसे सहकारी संघवाद के साथ धोखा करार देते हुए कहा कि केंद्र नियंत्रण और श्रेय अपने पास रखता है, जबकि भुगतान की जिम्मेदारी राज्यों पर थोप दी गई है.
'केंद्र के पास रोजगार रोकने का अधिकार'
उन्होंने आरोप लगाया कि नए सिस्टम के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह तय समय के लिए रोजगार रोक सके. इससे गरीब मजदूरों को महीनों तक बिना काम के रहना पड़ सकता है और उन्हें निजी खेतों में बेहद कम मजदूरी पर काम करने के लिए मजबूर किया जाएगा. लांबा ने इसे राज्य द्वारा नियंत्रित श्रम व्यवस्था बताया.
डिजिटल सिस्टम से मजदूर बाहर
अलका लांबा ने मनरेगा में बढ़ती डिजिटल निर्भरता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ग्राम सभा और पंचायतों से अधिकार छीनकर अब एल्गोरिदम, डैशबोर्ड और बायोमेट्रिक सिस्टम के हवाले कर दिए गए हैं. तकनीकी खामियों के नाम पर करोड़ों मजदूर काम से बाहर हो रहे हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा की डिमांड ड्रिवन प्रकृति को समाप्त कर दिया गया है. अब केंद्र यह तय करेगा कि कितने लोगों को काम मिलेगा. उनका आरोप है कि यह बदलाव उन राज्यों को सज़ा देने का तरीका है, जो बेरोज़गारी और भूख से जूझ रहे हैं.
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
इस दौरान अलका लांबा ने नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत के फैसले का जिक्र करते हुए मोदी-शाह सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित और आधारहीन था.
'कांग्रेस न झुकी है, न झुकेगी'
अलका लांबा ने कहा कि बीते 11 वर्षों में ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग को विपक्ष को डराने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से 50 घंटे की पूछताछ केवल हेडलाइन मैनेजमेंट थी, इंसाफ नहीं. उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी न झुकी है और न झुकेगी, और सच की जीत होती रहेगी.
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