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जन्माष्टमी 2026 पर द्वापर युग जैसे संयोग, जानिये इस साल क्या होगा खास?

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर ज्योतिष आचार्य अजय तेलंग ने दी जानकारी.

जन्माष्टमी 2026 पर द्वापर युग जैसे संयोग
जन्माष्टमी 2026 पर द्वापर युग जैसे संयोग (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 2, 2026 at 6:42 PM IST

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मथुरा : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने के लिये पूरे शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है. चौराहे पर और मंदिरों में विशेष सजावट की जा रही है. इस बार चार सितंबर को रोहिणी नक्षत्र अष्टमी के दिन कृष्ण भगवान का जन्म होगा. बताया जा रहा है कि यही नक्षत्र 5000 वर्ष पूर्व भी पड़े थे, केवल अंतर दिन का पड़ा है. उस दिन बुधवार था.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर ज्योतिष आचार्य अजय तेलंग ने पंचांग देखकर बताया कि अबकी बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि रोहिणी नक्षत्र पंचांग के अनुसार, देखा जाता है कि चंद्रमा वृषभ राशि नक्षत्र रोहिणी में है. हर्षक योग बन रहा है.

ज्योतिष आचार्य अजय तेलंग ने दी जानकारी. (Video credit: ETV Bharat)

उन्होंने बताया कि बालक क्रम बन रहा है. द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. 16 कलाएं उनके अंदर समाहित थीं और दिन भी बुधवार पड़ा था. वही योग बन रहा है, जो 5000 वर्ष पूर्व पहले पड़ा था. केवल दिन बुधवार की जगह शुक्रवार को जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. उन्होंने बताया कि अगर शुक्रवार की जगह बुधवार पड़ जाता तो वही द्वापर युग के अनुसार ही जन्माष्टमी होती. बहुत सी तिथियां नक्षत्र और योग बन रहे हैं.




उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर की मध्य रात्रि 12:00 बजे के बाद जो भी बालक-बालिका रोहिणी नक्षत्र अष्टमी के दिन जन्म लेगा, बहुत ही भाग्यशाली होगा. उसका भविष्य बहुत ही सुंदर होगा. उसके अंदर भी 16 कलाएं होंगी.

उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी से पूर्व गोचर स्थितियां का प्रभाव भी बहुत पड़ता है. सूर्य, चंद्रमा और केतु गोचर स्थिति में होते हैं. तीनों स्थितियां पड़ी हुई हैं. देश-विदेश में बहुत अच्छे काम होंगे. भारत सरकार को और भी अच्छा योग प्राप्त होगा. राज्य सरकार को भी फायदा होगा.

उन्होंने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में ओलावृष्टि की भी संभावनाएं बढ़ जाती हैं क्योंकि जब भगवान श्री कृष्ण ने रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था तो मूसलाधार बारिश हुई थी, वही योग मिल रहा है. वैसे रोहिणी नक्षत्र की स्थिति 27 दिन पहले और 27 दिन बाद होती है. अंश 15 दिन का है. फिलहाल अभी हमने देखा कि नक्षत्र पंचांग के हिसाब से नेपाल में बड़ी ही त्रासदी आई. 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन बहुत ही अच्छे नक्षत्र रोहिणी अष्टमी पड़ रहा है.

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