अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर: नौ साल में जमीन पर कितना उतरा निवेश और कितने बने रोजगार?
यूपी डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई थी.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 11:13 PM IST
अलीगढ़ : यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की योजना करीब नौ साल पहले शुरू हुई थी. अलीगढ़ को भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के प्रमुख नोड के रूप में विकसित किया गया. सरकार और प्रशासन की ओर से समय-समय पर यहां हजारों करोड़ रुपये के निवेश और हजारों रोजगार के दावे किए गए. निवेशकों को जमीन आवंटित हुई, कंपनियों ने एमओयू किये और बड़े-बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आये. आइये जानते हैं कि इन नौ वर्षों में अलीगढ़ की जमीन पर वास्तव में कितना बदलाव आया? पढ़ें संवाददाता आलोक सिंह की रिपोर्ट...
"कोविड के समय में जमीन के लिए अप्लाई किया" : उद्योगपति लालेश सक्सेना ने बताया कि डिफेंस कॉरिडोर में यूनिट लगाने का अनुभव अच्छा रहा है. कुछ चीज जरूर रही हैं. उन्होंने बताया कि कोविड के समय में जमीन के लिए अप्लाई किया था और बहुत से प्रोसेस ऑनलाइन ही हो गए. डिफेंस कॉरिडोर के लिए प्रक्रिया तो बहुत अच्छी है. नक्शा भी हो गया था.
"बहुत अच्छा प्रोजेक्ट है" : उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट तो बहुत अच्छा है, अगर आपका कांसेप्ट क्लियर है. उन्होंने बताया कि हम 36 साल से डिफेंस के क्षेत्र में काम कर रहे हैं तो हमारा प्लेटफार्म पहले से तैयार था, हमारे लिए कुछ नया नहीं था, जो लोग इस क्षेत्र में नए आए हैं, उनको स्ट्रगल करना पड़ रहा है.
"नये प्रोजेक्ट में लगता है दो साल का समय" : उन्होंने कहा कि लोगों को आइडिया ही नहीं है कि उन्हें क्या करना है. जमीन तो मिल गई लेकिन, उनके पास प्रोजेक्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि एक प्रोडक्ट खुद एस्टेब्लिश करने में मेरा लंबा एक्सपीरियंस है. उन्होंने कहा कि कोई नया प्रोजेक्ट बनता है तो उसमें कम से कम 2 साल का समय लगता है.

"36 साल से बना रहे प्रोडक्ट" : उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए काम करना आसान नहीं है, क्योंकि टेक्नोलॉजी भी अपग्रेड करनी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि हम 36 साल से प्रोडक्ट बना रहे हैं, हमारे लिए कोई दिक्कत नहीं है. उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी फायर ब्रिगेड का स्टेशन नहीं बना है. कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है.
"हाईवे बन जाने से रास्ता हो जाएगा आसान" : उन्होंने बताया कि हाईवे बन जाने से रास्ता आसान हो जाएगा. उन्होंने कहा कि कोई भी बायर अगर अलीगढ़ पहुंचना चाहेगा, तो उसे कोई दिक्कत न होगी. उन्होंने कहा कि इस रास्ते को जेवर एयरपोर्ट तक आसान बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कुछ सुविधाएं मिलेंगी लेकिन उसके लिए स्ट्रगल करना पड़ेगा.
"'स्किल लेबर' मिलने में परेशानी" : उन्होंने कहा कि आईओसीएल का प्लांट डिफेंस कॉरिडोर के बगल में ही है तो सरकार को इस रोड को और बेहतर डेवलप करना चाहिए. उन्होंने बताया कि अभी 'स्किल लेबर' मिलने में परेशानी हो रही है, लेकिन आगे आने वाले समय में दिक्कत नहीं होनी चाहिए. उन्होंने अभी कहा कि अलीगढ़ में भी पेमेंट, नोएडा जैसा होना चाहिए. जो बड़ी कंपनी आएंगे वह ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के लिए काम करेंगे.
"यूपीडा बहुत एक्टिव है" : उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर का कारोबार आगे आने वाले समय में बढ़ेगा. उत्तर भारत में डिफेंस कॉरिडोर के लिए बहुत सारे रिसोर्स नहीं थे. उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में नए लोगों के लिए थोड़ा दबाव होगा. डिफेंस कॉरिडोर के काम में विलंब होने को लेकर उन्होंने बताया कि इस मामले में यूपीडा बहुत एक्टिव है.

उन्होंने कहा कि मार्च महीने में बिजली का पूरा पैसा जमा कर दिया, लेकिन वहां बिजली नहीं थी. पिछले 15 दिन पहले एक मीटिंग हुई और उसमें समस्या बताई गई. जिलाधिकारी भी पहुंचे थे. उन्होंने तुरंत आदेश दिया तो बिजली का काम शुरू हो गया. उन्होंने कहा कि जो उपकरण बनाने वाले लोग हैं वो डिफेंस कॉरिडोर को समझ रहे हैं.
उन्होंने कि केवल जमीन मिलने से उत्पादन शुरू नहीं हो जाता. तकनीक, उत्पाद विकास, परीक्षण, प्रमाणन, बाजार और रक्षा प्रतिष्ठानों की जरूरतों को समझना जरूरी है. किसी नए रक्षा उत्पाद को विकसित करने और उसे बाजार तक पहुंचाने में लंबा समय लग सकता है.
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी कंपनियों के लिए हैंडहोल्डिंग की व्यवस्था करनी चाहिए. उनका सुझाव है कि अंडला और खैर क्षेत्र को बेहतर बस सेवा और कनेक्टिविटी से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों के कुशल कर्मचारी आसानी से यहां पहुंच सकें.
"निर्माण गतिविधियों से लोगों को मिल रहा रोजगार" : एक कंपनी से जुड़े कर्मचारी चंद्रपाल के मुताबिक, कॉरिडोर में निर्माण कार्य चल रहा है और कुछ फैक्ट्रियां शुरू हो चुकी हैं. उनके अनुसार अभी भी कई प्लॉट पर काम पूरा नहीं हुआ है. निर्माण गतिविधियों से लोगों को रोजगार मिल रहा है, लेकिन स्थायी औद्योगिक रोजगार का बड़ा अवसर कंपनियों के पूरी तरह चालू होने के बाद ही पैदा होगा.
"24-25 हजार रुपये तक मिल रहा वेतन" : एक कंपनी के कर्मचारी अमित कश्यप के मुताबिक, कंपनी में अभी मशीनें आई हैं और करीब 12 लोग काम कर रहे हैं. उनके अनुसार पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू होने पर रोजगार बढ़ेगा. उन्होंने बताया कि शुरुआती स्तर पर काम करने वालों को करीब 8 से 10 हजार रुपये तक और ऑपरेटरों को करीब 24-25 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा है.
"कंपनियों में प्रशिक्षण की भी व्यवस्था" : कर्मचारी लोकेंद्र चौधरी ने बताया कि निर्माण और शुरुआती औद्योगिक गतिविधियों में रोजगार मिल रहा है. हेल्पर स्तर पर करीब 10-12 हजार और ऑपरेटरों को करीब 15-16 हजार रुपये तक मिलने की बात उन्होंने बताई. उनके अनुसार कंपनियों में प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है.
"कॉरिडोर विकसित होते ही रोजगार बढ़ने की संभावना" : वर्कर सार्थक माहेश्वरी का कहना है कि अभी ज्यादातर कंपनियां शुरुआती दौर में हैं. जैसे-जैसे कॉरिडोर विकसित होगा, रोजगार बढ़ने की संभावना है. शुरुआती स्तर पर 10-12 हजार रुपये की नौकरियां उपलब्ध हैं, जबकि कुशल कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर अधिक वेतन मिल सकता है.
"फायर स्टेशन का काम नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य" : UPEIDA के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) एसपी सिंह का कहना है कि सड़क, बिजली, पानी और अन्य औद्योगिक सुविधाओं का काम पूरा किया जा रहा है. फायर स्टेशन का काम भी पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है और इसे अक्टूबर-नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया है.
"217 एकड़ जमीन विकसित किए जाने की योजना" : पहले चरण में अंडला में उपलब्ध जमीन लगभग पूरी होने के बाद अब दूसरे चरण का विस्तार किया जा रहा है. इसके लिए धनीपुर एयरपोर्ट के आसपास जसरथपुर और जुलूपुर सीहोर क्षेत्र में जमीन चयनित की गई है. दूसरे चरण के लिए करीब 217 एकड़ जमीन विकसित किए जाने की योजना बनाई गई है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए करीब 245 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान भी बताया गया है.
धनीपुर एयरपोर्ट के आस-पास जमीन विकसित करने की योजना : दूसरे चरण में सड़क, स्ट्रीट लाइट, 24 घंटे बिजली, पानी, ग्रीन एरिया और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है. अंडला क्षेत्र में इंडियन ऑयल के बॉटलिंग प्लांट की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण है. दूसरे चरण के लिए धनीपुर एयरपोर्ट के आस-पास जमीन विकसित करने की योजना बनाई गई है. यह क्षेत्र दिल्ली-कानपुर हाईवे और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
उन्होंने बताया कि यहां निवेश के सिलसिले में हेड ऑफिस से ही जानकारी मिल सकती है. इसका प्रोसेस लखनऊ हेडक्वार्टर से होता है. उन्होंने बताया कि चार यूनिट में प्रोडक्शन स्टार्ट हो चुका है. उन्होंने बताया कि यहां कितना रोजगार सृजित हुआ है, इस बारे में कंपनी से जानकारी नहीं मिल पाती है.
उन्होंने कहा कि जिनको जमीन अलाॅट की गई है, वही अच्छे तरीके से बता पाएंगे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग स्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, एनओसी लेने के प्रोसीजर में सब लोग हैं. वहीं इस मामले में भी जो इन्वेस्टर है, वही जानकारी दे पाएंगे. हालांकि उन्होंने बताया कि छह लोगों का प्लॉट कैंसिल किया गया है.
उन्होंने कहा कि कंपनियों को प्लॉट अलॉट किया गया था. उन्होंने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर की सेकेंड यूनिट के लिए भी जमीन ली जा रही है. प्रथम फेस की इकाइयों की शुरूआत के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है. हम लोग प्लॉट डेवलप करके उन्हें दे देते हैं और जो फैक्ट्री बनाने का काम है वह इन्वेस्टर खुद करते हैं.
उन्होंने बताया कि सड़क, बिजली, पानी और दूसरी औद्योगिक सुविधा पूरी की जा रही है और यहा फायर स्टेशन का काम भी अक्टूबर-नवंबर तक पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि बेसिक सुविधाएं कंप्लीट हो गई हैं. उन्होंने बताया कि अलीगढ़ में यूपीडी का कोई कार्यालय नहीं है, आगरा में ही ऑफिस है.
4581 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव : इवेस्ट यूपी की सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दी गई जानकारी के मुताबिक, अलीगढ़ नोड के लिए करीब 4581 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव बताए जा रहे हैं. पहले चरण में करीब 24 कंपनियों को जमीन आवंटित की गई. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभी चार इकाइयों में उत्पादन शुरू हुआ है. यानी जमीन पाने वाली कंपनियों में उत्पादन तक पहुंचने वाली इकाइयों का अनुपात करीब 16.7 फीसदी है.
छह कंपनियों का भूमि आवंटन निरस्त किया गया : 2025 में तीन कंपनियों का भूमि आवंटन निरस्त किया गया. जिसमें 90 करोड़ के निवेश वाली कंपनी का 2 हेक्टेयर का प्लॉट, 40 करोड़ के निवेश वाली कंपनी का 1.4 हेक्टेयर का प्लॉट, 80 करोड़ के निवेश वाली साउथ अफ्रीका की कंपनी का 4 हेक्टेयर का प्लॉट निरस्त किया गया. UPEIDA के आदेश के अनुसार, एक कंपनी को जुलाई 2021 में करीब 4.5 हेक्टेयर जमीन 100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के लिए आवंटित की गई थी.
इसके अलावा दूसरी कंपनी को जून 2021 में 1.6 हेक्टेयर जमीन करीब 20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर मिली थी. वहीं तीसरी कंपनी को करीब 0.4 हेक्टेयर जमीन चार करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के लिए दी गई थी. इन तीनों परियोजनाओं का प्रस्तावित निवेश करीब 124 करोड़ रुपये था. निर्धारित अवधि में परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होने और नोटिस के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद आवंटन निरस्त किया गया.
UPEIDA को दी गई जिम्मेदारी : यूपी डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई थी. इसका उद्देश्य रक्षा उपकरणों के लिए भारत की विदेशी निर्भरता कम करना और देश में ही रक्षा उत्पादन की क्षमता विकसित करना था. इस परियोजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) को दी गई.
अंडला में कॉरिडोर के पहले चरण को विकसित किया गया : अलीगढ़ में 11 अगस्त 2018 को आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में भी बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आए. बाद में खैर क्षेत्र के अंडला में कॉरिडोर के पहले चरण को विकसित किया गया. 14 सितंबर 2021 को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इसकी आधारशिला रखी गई. अंडला जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर है.
चार इकाइयों में शुरू हुआ उत्पादन : पहले चरण में करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र में कॉरिडोर विकसित किया गया. करीब 24 कंपनियों को जमीन आवंटित होने और लगभग 3300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव की बात सामने आई. बाद के आंकड़ों में अलीगढ़ नोड के कुल निवेश प्रस्ताव का आंकड़ा बढ़कर 4490 से 4581 करोड़ रुपये तक पहुंचा. अलीगढ़ नोड की मौजूदा स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा यही है कि करीब 24 कंपनियों को जमीन आवंटित होने के बावजूद चार इकाइयों में उत्पादन शुरू होने की जानकारी है.
इनमें एक कंपनी ने करीब 65 करोड़ रुपये के निवेश से उत्पादन शुरू किया है. दूसरी कंपनी ने करीब 12 करोड़ रुपये के निवेश से पुर्जों का निर्माण शुरू किया है. वहीं तीसरी कंपनी ने करीब 3.70 करोड़ रुपये के निवेश से काम शुरू किया है. इसके अलावा चौथी कंपनी की ओर से करीब 330 करोड़ रुपये के निवेश से उत्पादन का काम शुरू किया है.
अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर : निवेश प्रस्ताव करीब 4581 करोड़ रुपये, पहले चरण में भूमि आवंटन करीब 24 कंपनियां, पहले चरण का विकसित क्षेत्र करीब 100 हेक्टेयर से अधिक, उत्पादन शुरू करने वाली इकाइयां चार, आवंटित प्लॉट के मुकाबले चालू इकाइयां करीब 16.7%, चार प्रमुख चालू परियोजनाओं का रिपोर्टेड निवेश करीब 410.70 करोड़ रुपये.
दूसरे चरण में काम : दूसरे चरण की प्रस्तावित जमीन करीब 217 एकड़, दूसरे चरण का इंफ्रास्ट्रक्चर बजट करीब 245 करोड़ रुपये, उत्तर भारत के नये रक्षा उत्पादन का बन सकता है केंद्र.

