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अलीगंज अग्निकांड: सीएम योगी को रिपोर्ट सौंपने के लिए किस 'शुभ घड़ी' का इंतज़ार कर रही SIT

अलीगंज अग्निकांड: एसआईटी जांच पूरी, अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्यवाही, जाने किस दिशा में हुई जांचॊ

ALIGANJ FIRE INVESTIGATION
अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत की जांच रिपोर्ट सौंप सकती हैं एसआईटू. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : July 3, 2026 at 9:46 AM IST

4 Min Read
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लखनऊ: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के लिए दो सदस्यों की एसआईटी का गठन किया था.

एसआईटी की टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है. जल्द ही जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी.

एसआईटी द्वारा की गई जांच में अब तक कई अन्य अधिकारियों को भी दोषी पाया गया है, जिनके खिलाफ कार्यवाही की संस्कृति की गई है. ऐसे में जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के बाद कई अन्य अधिकारियों पर भी कार्यवाही हो सकती है.

एसआईटी ने अपनी जांच में लखनऊ विकास प्राधिकरण के रिटायर कर्मचारियों को भी दोषी बनाया है. ऐसे में रिपोर्ट पेश होने के बाद इन अधिकारियों पर भी कार्यवाही हो सकती है.

एसआईटी की जांच रिपोर्ट में विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों को भी जिम्मेदार माना गया है. उनके खिलाफ कार्रवाई ती सिफारिश की गई है.

एसआईटी ने जुटाए सबूत, जल्द शासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

मंगलवार को एसआईटी को जांच रिपोर्ट शासन के सामने पेश करनी थी, लेकिन अभी जांच से संबंधित कुछ सबूत नहीं मिले है, अब तक की जांच में एसआईटी ने घटना से जुड़े कई सबूत जुटाए हैं.

एसआईटी के सामने तमाम ऐसे तथ्य निकाल के सामने आए हैं. जिसमें यह साबित हुआ है कि बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया गया है.

जहां एक और एसआईटी की जांच में बिल्डिंग में नियमों के उल्लंघन को लेकर तमाम तथ्य सामने आए हैं और एसआईटी ने इस बारे में सबूत जुटाए हैं.

वहीं दूसरी ओर एसआईटी की जांच में इन बातों को भी शामिल किया गया है कि जब बिल्डिंग नियम के विरुद्ध संचालित हो रही थी, तो किन विभागों की जिम्मेदारों ने अपने काम में लापरवाही की, जिसके चलते इस रेजिडेंशियल बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर कमर्शियल एक्टिविटीज हो रही थी.

एसआईटी ने मुख्य रूप से एलडीए, बिजली विभाग, विद्युत सुरक्षा निदेशालय व फायर सेफ्टी विभाग के तमाम अधिकारियों से पूछताछ की है। जिनते बयान भी रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं.

जहां एक और एसआईटी ने नियम के विरुद्ध संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में तथ्य जुटाए हैं, वहीं दूसरी ओर एसआईटी इस दिशा में भी पड़ताल पूरी कर चुकी है कि आखिर फायर सेफ्टी विभाग की ओर से समय से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया या नहीं?

एसआईटी की टीम ने फायर कंट्रोल रूम को मिली पहली सूचना और मौके पर पहुंची पहली फायर सर्विस की गाड़ी के समय के संदर्भ में जानकारी जुटाई है. ऐसे में यदि राहत पहुंचाने में किसी भी कर्मचारी के स्तर पर लापरवाही हुई है, तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही हो सकती है.

22 तारीख को हुई इस घटना के बाद 7 दिनों के बाद एसआईटी को जांच शासन को भेजनी थी, लेकिन मंगलवार को एसआईटी ने जांच शासन के सामने पेश नहीं किया है.

आज 13वां दिन है जल्दी एसआईटी जांच रिपोर्ट शासन के सामने पेश कर सकती है, लेकिन अब तक की जांच में एसआईटी अपने नतीजे पर पहुंच चुकी है.

हालांकि, जो तथ्य समिति ने जुटाए हैं उसे व्यवस्थित तरीके से सरकार के सामने जल्द पेश करने की तैयारी है. एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया है कि बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर व्यवसाय गतिविधियों की जा रही थी और नियमों की बड़े पैमाने पर अनदेखी की गई है.

एसआईटी ने बिजली विभाग से तमाम दस्तावेज इकट्ठा किए हैं मिली जानकारी के अनुसार बिल्डिंग का स्वीकृत लोड 20 किलो वाट था, जबकि यहां पर 35 किलो वाट तक का इस्तेमाल किया जा रहा था. एसआईटी की रिपोर्ट में बिजली विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के सबूत मिले हैं.

वहीं बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से निर्माण कराया गया है, इसके तत्व भी जुटाए गए हैं. एसआईटी की टीम ने बिल्डिंग में फायर एग्जिट की जगह पर लगी लिफ्ट, बायोमेट्रिक दरवाजे और नियमों की के बारे में पर्याप्त सबूत जुटाए हैं. ऐसे में जल्दी एसआईटी शासन के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है.