भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे...केजरीवाल के बरी होने पर अखिलेश यादव का तंज
शंकराचार्य विवाद पर अखिलेश ने कहा, भाजपाई किस हद तक जा सकते हैं, इसकी कल्पना कोई शरीफ आदमी कर ही नहीं सकता है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 27, 2026 at 7:32 PM IST
लखनऊ : दिल्ली शराब घोटाला मामले में पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने बरी कर दिया है. इस पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने रिएक्ट किया है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा है, आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं. आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले. आज हर ईमानदार आशा भरी सांस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे. भाजपा ने दिल्ली के निवासियों से विश्वासघात किया है.
आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं। आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले। आज हर ईमानदार आशा भरी साँस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे। भाजपा ने दिल्ली के…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 27, 2026
शंकराचार्य विवाद के बहाने अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तंज किया. उन्होंने कहा, जो कपटजीवी सनातनी शंकराचार्य जी, साधु, संतों, संन्यासियों तक पर झूठे आरोप लगाने का महापाप करते हैं, वो भला किसी सरकार, दल या किसी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसकी कल्पना कोई शरीफ आदमी कर ही नहीं सकता है.
इतिहास का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने कहा, आजादी से पहले, वर्तमान सत्ता के जो ‘संगी-साथी’ देश के दुश्मनों से मिले हुए थे और स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी के फंदों तक पहुंचाने के लिए, आजादी के दीवानों के खिलाफ मुख़बिरी जिनका काम रहा है और जो देश को गुलाम बनाने वाले साम्राज्यवादियों के माफी-वजीफे पर रहकर अपनी भूमिगत भूमिका निभाते रहे हैं, छल-छलावे के वो विचारवंशी भाजपाई, आज किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं. भाजपा के लिए ये समाचार किसी ‘नैतिक मृत्युदंड’ से कम नहीं है.
बता दें, दिल्ली के शराब घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया. कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि केवल बिना ठोस और पर्याप्त सबूत के लगाए गए आरोपों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. अदालत ने जांच एजेंसी के साक्ष्यों को कमजोर और अपर्याप्त पाते हुए दोनों नेताओं को राहत दी.
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