आपदा के 1 साल बाद भी नहीं सुधरे हालात, अब फिर 200 परिवारों पर मंडरा रहा लैंडस्लाइड का खतरा
अखाड़ा बाजार में लैंडस्लाइड से पिछले साल 10 लोगों की मौत हुई थी, एक साल बाद भी लैंडस्लाइड से निपटने के नहीं हुए इंतजाम.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 4, 2026 at 11:32 AM IST
|Updated : July 4, 2026 at 6:25 PM IST
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में मानसून के आगमन के साथ ही पुराने जख्म भी ताजा हो गए हैं. जिला कुल्लू के मुख्यालय अखाड़ा बाजार क्षेत्र में एक बार फिर बरसात ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. इनर अखाड़ा के निवासी पिछले साल 3 सितंबर 2025 को हुए भीषण लैंडस्लाइड त्रासदी की यादों के बीच जीवन गुजार रहे हैं. इस त्रासदी में 10 लोगों की जान चली गई थी और कई मकान क्षतिग्रस्त हुए थे. घटना के करीब 11 महीनों बाद भी प्रभावित क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा उपाय शुरू नहीं हो पाए हैं.
सुरक्षा कार्यों के लिए जारी होने थे 8 करोड़
अखाड़ा बाजार क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि लैंडस्लाइड के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने कई बार सुरक्षा कार्यों की मांग उठाई गई, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ. सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा कार्यों के लिए करीब 8 करोड़ रुपए जारी होने थे. तीन चरणों में चलने वाली प्रक्रिया का अभी पहला चरण ही पूरा हुआ है. दूसरे चरण के लिए इन प्रिंसिपल अप्रूवल नहीं मिली है. दूसरा चरण पूरा होने पर ही राशि स्वीकृत होनी है. पहाड़ी से लगातार पानी का रिसाव होने से मिट्टी कमजोर पड़ चुकी है. ऐसे में बरसात के दौरान फिर से अखाड़ा बाजार के 200 परिवारों पर लैंडस्लाइड होने का खतरा बना हुआ है.

'अपना घर छोड़कर कहां जाएं?'
अखाड़ा बाजार में रहने वाले नीलकंठ सूद ने बताया कि जल शक्ति विभाग द्वारा अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि सीवरेज के मेनहोल ओवर होने के चलते यहां जमीन धंस रही है, लेकिन इसका कोई समाधान अभी तक नहीं किया गया है. जैसे ही बरसात शुरू होती है तो प्रशासन लोगों को घर खाली करने के लिए कह देता है, लेकिन वह अपने घर को छोड़कर आखिर जाए तो जाएं कहां? उन्होंने बताया कि इस बारे में स्थानीय विधायक से भी बात की थी, लेकिन विधायक द्वारा भी अभी तक उन्हें मात्र आश्वासन दिया गया है. यहां पर सुरक्षा दीवार लगाने की दिशा में फिलहाल कोई काम नहीं हो पाया है.
अपने बेटे को बीते साल की आपदा में खोने वाले सुदर्शन सांख्यान का कहना है, "हमारा पूरा मकान मलबे की चपेट में आ गया और अब हम किराए के घर में रहने के लिए मजबूर हैं. प्रशासन द्वारा शुरुआती दौर में हमें 6 महीने का किराया दिया गया, लेकिन उसके बाद हमें अब किराया भी नहीं मिल रहा है. यहां पर जो मलबा गिरा हुआ है, उसे भी प्रशासन द्वारा बिल्कुल नहीं हटाया गया है. अब हमें डर है कि अगर समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो एक और बड़ी दुर्घटना हो सकती है."

'हर बरसात घर खाली करने के देते हैं निर्देश'
अखाड़ा बाजार के रहने वाले लक्की का कहना है कि प्रशासन हर बरसात में लोगों को घर खाली करने के निर्देश देता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता. सरकार द्वारा बजट का प्रावधान किए जाने की बात कही गई थी, मगर अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है. यहां पर सीवरेज के मैनहोल को ठीक करने के लिए कुछ राशि की जरूरत है, लेकिन उसे भी प्रशासन द्वारा मंजूर नहीं किया जा रहा है. जब तक सीवरेज के में हाल ठीक नहीं होंगे, तब तक यहां लैंडस्लाइड का खतरा लगातार बना रहेगा.
"अखाड़ा बाजार में सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए अभी तक स्टेज-एक की अनुमति मिली है. स्टेज-टू की इन प्रिंसिपल अनुमति मिलने के बाद स्टेज-थ्री की अनुमति के बाद पैसा स्वीकृत होता है.जैसे ही हमें अनुमति मिलती है तो यहां पर कार्य करवाया जाएगा." - अमित कुमार, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग कुल्लू

