‘भीड़ में फंसने पर कांस्टेबल ने AK-47 से हवा में चलाई थीं 4 गोलियां’, सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस का हलफनामा
सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान एके-47 से फायरिंग पर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. पढ़ें

Published : August 18, 2026 at 10:58 AM IST
पटना: बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पुलिस पर ‘अनुचित बल’ के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया है.
सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस का हलफनामा : हलफनामे में बिहार सरकार ने कहा है कि ''कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए थे.'' सिवान में पुलिसकर्मी द्वारा एके-47 से फायरिंग के मामले में राज्य सरकार ने कहा कि ''भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने हवा में चार गोलियां चलाई थीं.''
'कांस्टेबल ने AK-47 से हवा में चलाई थीं 4 गोलियां’ : बिहार सरकार के मुताबिक, एके-47 से चली गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी. सरकार ने यह भी कहा कि हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए. एके-47 को ‘प्लाटून स्तर का हथियार’ बताते हुए कहा गया है कि इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए होता है. ''राज्य के डीजीपी ने एके-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं. हालांकि, जिस कांस्टेबल ने फायरिंग की थी, उसे निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.''

क्या हुआ था उस दिन? : सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक एएसआई ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए. इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं. हालांकि, सरकार का कहना है कि इन तीनों को एके-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे, जहां एके-47 से फायरिंग हुई थी. घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिससे हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के एंगल जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं.
69 एफआईआर, 500 लोग गिरफ्तार : हलफनामे के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 एफआईआर दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के जरिए छोड़ा गया.
'कई स्थानों पर स्थिति हिंसक' : सरकार ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है. पुलिस का दावा है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है. सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि ''प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई स्थानों पर स्थिति हिंसक हुई.''

छपरा में क्या हुआ था? : छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने के बाद भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और तोड़फोड़ तथा पथराव शुरू करने का आरोप लगाया गया है. सरकार के अनुसार, इस दौरान 2 बीडीओ, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए. एक बीडीओ की आंख चली गई, जबकि दूसरे बीडीओ के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी हालत गंभीर बताई गई है.
राज्य सरकार ने दावा किया है कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए हैं. साथ ही, पुलिस द्वारा आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात भी सरकार ने स्वीकार की है और माना है कि इससे प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं. सरकार ने हिंसा के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आसिया) और आरवाईए की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का भी उल्लेख किया है. वहीं, 24 जुलाई को कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है.
सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित : राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त डीजीपी को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है. देशभर में छात्रों के प्रदर्शन में हुई पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.
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