एयरपोर्ट की तर्ज पर बना ISBT उद्घाटन के बाद भी वीरान, ग्वालियर में बस ऑपरेटर्स जाने को तैयार नहीं, सामने आई बड़ी वजह
निजी बस ऑपरेटरों ने ISBT से किया किनारा, दूरी और कनेक्टिविटी को वजह बता रहे बस ऑपरेटर, कलेक्टर ने दिया कनेक्टिविटी का आश्वासन

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 4, 2026 at 10:20 AM IST
रिपोर्ट : पीयूष श्रीवास्तव
ग्वालियर : शहर में एयरपोर्ट की तर्ज पर बना आईएसबीटी उद्घाटन के बाद से वीरान पड़ा है. ऐसे में यात्री बसों के लिए नए आईएसबीटी की प्लानिंग फेल होते नजर आ रही है, शहर के लोगों के लिए दी गई आईएसबीटी की सौगात महज शो पीस बनकर रह गई है. क्योंकि उद्घाटन के पांच महीने बाद भी निजी बस ऑपरेटर आईएसबीटी पर जाने को तैयार नहीं हैं.
निजी बस ऑपरेटरों ने ISBT से किया किनारा
ग्वालियर में 77 करोड़ रु की लागत से एयरपोर्ट की तर्ज पर बनकर तैयार हुआ इंटर स्टेट बस टर्मिनल आज वीरान पड़ा हुआ है. जिस ISBT बस स्टैंड से शुरुआत में ग्वालियर, मुरैना, भिंड के बीच बस सेवा शुरू होनी थी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उसका आधिकारिक उद्घाटन भी कर दिया, और कुछ दिनों तक बसों का आवागमन भी हुआ लेकिन फिर अचानक निजी बस ऑपरेटरों ने आईएसबीटी से किनारा कर पुराने बस अड्डे से ही बसों का संचालन शुरू कर दिया.

भविष्य में एक जगह से कई प्रदेशों के लिए मिलती बस सेवा
ग्वालियर भिंड मुरैना के अलावा, गुजरात, राजस्थान महाराष्ट्र दिल्ली जैसे प्रदेशों के बड़े शहरों के लिए सीधे बस सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके, इस सोच के साथ इंटर स्टेट बस टर्मिनल बनाया गया था. इसके लिए जनता को सुविधा देने के नाम पर 77 करोड़ खर्च किए गए, बावजूद इसके आईएसबीटी अब तक सुचारू रूप से उपयोग में नहीं आ सका है. ऐसे में यात्रियों को भी ग्वालियर के दो अलग-अलग बस स्टैंड से सफर करना पड़ता है. इस बारे में जब ग्वालियर के निजी ऑपरेटर्स से बात की गई तो उनका कहना था कि, यात्रियों के लिए आईएसबीटी की दूरी काफी ज्यादा है. इसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ेगा.

बस से ज्यादा आईएसबीटी पहुंचने का पड़ेगा भार
बस ऑपरेटर यूनियन के उपाध्यक्ष प्रेम नारायण भटेले ने कहा, '' पहले बस स्टैंड कंपू क्षेत्र में हुआ करता था, लेकिन परिवहन विभाग और नगर निगम के बीच एक अनुबंध हुआ था. उस वक्त कहा गया था कि, वर्तमान बस स्टैंड रेलवे स्टेशन के नजदीक पड़ेगा, और देशभर में कहीं भी देखें तो हर जगह बस अड्डे और रेलवे स्टेशन पास पास होते हैं, जिससे यात्री आसानी से एक से दूसरी जगह जा सके. आज भी ग्वालियर में बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन बगल में हैं, जिससे यात्री कभी भी आता है, बस में बैठता है और चला जाता है. लेकिन नया आईएसबीटी शहर से बहुत दूर बनाया गया है.''

आईएसबीटी के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की दरकार
बस ऑपरेटर पदम गुप्ता ने कहा, " नया बस अड्डा शहर के एक छोर पर बनाया गया, शायद मंशा होगी कि इससे शहर का ट्रैफिक कम होगा लेकिन असल में ये नई व्यवस्था शहर को कंजेस्टेड बना देगी. एक छोर से आने वाले व्यक्ति को बस स्टैंड आना और जाना काफी लंबा पड़ेगा ऊपर से सिर्फ बसस्टैंड तक पहुंचने का किराया आगे के सफर से ज्यादा पड़ेगा." हालांकि, जब उनसे सवाल किया गया कि, जब आईएसबीटी बन रहा था तब इसका विरोध क्यों नहीं किया गया? तो उन्होंने कहा, "प्रशासन ने नया बस स्टैंड बनाने से पहले किसी को कॉन्फिडेंस में लिया ही नहीं ना ही बस ऑपरेटर्स से इस बारे में बात की. ये पहले विचार करना चाहिए की इसका पब्लिक के ऊपर क्या इफेक्ट आएहा. हालांकि, इस बारे में कलेक्टर से बात हुई है, उन्होंने जल्द ही शहर में ई-बस सेवा शुरू होने की बात कही है. ऐसा होने के बाद आईएसबीटी जाने पर विचार करेंगे."

जल्द ही बस यूनियन से बैठक कर करेंगे चर्चा
इधर जब इस मामले पर जिला परिवहन अधिकारी विक्रमजीत सिंह कंग ने कहा, '' पूर्व में आईएसबीटी से बसों का संचालन शुरू हुआ था लेकिन बाद में बस ऑपरेटर्स ने जाने से मना कर दिया, इसके लिए एक बार पहले ही बस ऑपरेटर यूनियन के साथ बैठक हो चुकी है लेकिन उसमें कोई नतीजा नहीं निकला अब जल्द ही एक और बैठक कलेक्टर की अध्यक्षता में बस ऑपरेटर्स के साथ होने वाली है. जिसमे उम्मीद है इस समस्या का कोई हल जरूर निकलेगा.''

