देहरादून से पहाड़ी इलाकों के लिए हेली सेवा शुरू, हवाई कनेक्टिविटी को मिली नई रफ्तार
देहरादून से तीन पहाड़ी इलाकों के लिए हवाई सेवा शुरू की गई है. इस सेवा से पर्यटन को नई गति भी मिलेगी.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : December 6, 2025 at 3:09 PM IST
|Updated : December 6, 2025 at 5:37 PM IST
श्रीनगर: राज्य में हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज देहरादून–टिहरी–श्रीनगर–गौचर के बीच हेली सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया गया. इस सेवा के शुरू होने से न केवल पहाड़ी जिलों के लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि पर्यटन, चिकित्सा, व्यापार और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी तीव्र गति से कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी.
6 दिसंबर सुबह करीब 10 बजे देहरादून एयरपोर्ट से हेरिटेज एविएशन द्वारा संचालित पहली हेली ने उड़ान भरी. यह हेली टिहरी झील क्षेत्र और श्रीनगर के ऊपर से होते हुए गौचर हेलीपैड पर उतरी. उड़ान के दौरान मौसम साफ था और यात्रा बिल्कुल सुगम रही. पहली उड़ान में कुल 4 यात्री सवार थे, जिन्होंने इस नई सुविधा को लेकर उत्साह और संतोष व्यक्त किया. वहीं वापसी में भी हेली ने गौचर से 4 यात्रियों को लेकर देहरादून की ओर उड़ान भरी.
हेली सेवा का संचालन कर रही हेरिटेज एविएशन कंपनी के जनरल मैनेजर मनीष भंडारी और असिस्टेंट मैनेजर ऑपरेशन अभिलाष पटवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस रूट पर नियमित रूप से दिन में दो बार हेली उड़ान भरेगी, जिसके तहत पहली उड़ान सुबह लगभग 10 बजे और दूसरी उड़ान दोपहर 2:30 बजे देहरादून से संचालित की जाएगी. उन्होंने बताया कि श्रीनगर से टिहरी और गौचर के लिए 1000 रुपए किराया होगा. जबकि श्रीनगर से देहरादून के लिए 3000 रुपए प्लस जीएसटी देना होगा.
उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों की संख्या कम होने या किसी दिन एक भी यात्री न मिलने की स्थिति में भी हेली नियमित रूप से उड़ान भरेगी. इसका उद्देश्य आम जनता को यह भरोसा दिलाना है कि यह सेवा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि निरंतर और विश्वसनीय रूप से उपलब्ध रहेगी. सेवा की निरंतरता लोगों के बीच विश्वास बढ़ाएगी और उन्हें इस सुविधा का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित करेगी.
स्थानीय लोगों ने इस सेवा के शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त की है. उनका कहना है कि पहाड़ों में सड़क मार्ग लंबा और समय साध्य होता है. ऐसे में हेली सेवा से यात्रा समय में भारी कमी आएगी. आपात स्थितियों में मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाना आसान होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी.
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