क्लाइमेटिक फैक्टर्स की मार से जूझता देहरादून, एयर क्वालिटी ने बिगाड़ी आबोहवा
उत्तराखंड में क्लाइमेट चेंज का असर आबोहवा पर पड़ रहा है. देहरादून में एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब स्थिति में पहुंच रहा है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 4, 2026 at 7:29 AM IST
देहरादून: मौजूदा समय दिल्ली या किसी बड़े शहर में ही नहीं बल्कि देहरादून जैसे पर्वतीय राज्य के शहर पर भी भारी पड़ रहा है, ऐसा एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों को देखकर समझा जा सकता है जो बेहद खराब स्थिति को बयां कर रहे हैं. हालत यह है कि प्रदेश की राजधानी देहरादून में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार पहुंच रहा है तो ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे शहर भी खराब स्थिति में ही बने हुए हैं.
नवंबर और दिसंबर के महीनों में सामने आने वाले क्लाइमेटिक फैक्टर्स एक बार फिर उत्तराखंड के शहरों में वायु प्रदूषण की बड़ी वजह बनते दिखाई दे रहे हैं. खासतौर पर इंडो-गैंगेटिक प्लेन्स में थर्मल इन्वर्जन का फिनॉमिना सक्रिय हो गया है, जिसके चलते वातावरण में मौजूद प्रदूषक गैसें और पार्टिकुलेट मैटर नीचे की परतों में ही फंसी रह जाती हैं. इसका सीधा असर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर पड़ रहा है, जो कई बार बेहद खराब श्रेणी तक पहुंच रहा है.
थर्मल इन्वर्जन के दौरान ऊपरी वातावरण अपेक्षाकृत गर्म और निचली सतह ठंडी हो जाती है. इस स्थिति में PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कण हवा में ऊपर नहीं उठ पाते और लोअर लेयर्स में ट्रैप हो जाते हैं. इसके साथ ही हवा का सर्कुलेशन कम होना, बरसात की कमी, ठंड के चलते अलाव या ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग और स्थानीय स्रोतों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण को और बढ़ा रहा है.
हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की ओर से हालात को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास करने का दावा किया जा रहा हैं. बोर्ड का दावा है कि AQI भले ही कुछ समय के लिए काफी अधिक दर्ज हो रहा हो, लेकिन दीर्घकालिक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं. इसका असर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में भी देखने को मिला है, जहां पिछले साल तक 30 से ऊपर रहने वाली देहरादून और ऋषिकेश की रैंकिंग अब क्रमशः 15 और 16 तक पहुंच गई है. यह संकेत देता है कि प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.
इसके बावजूद मौजूदा हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं. दिल्ली ही नहीं, बल्कि पहाड़ों के करीब बसे देहरादून में भी एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार रिकॉर्ड किया जा रहा है. खासतौर पर शाम और रात के समय AQI में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जबकि दिन में भी स्थिति खराब बनी हुई है. चिंता की बात यह है कि यह खराब स्थिति एक-दो दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार कई दिनों तक AQI 250 से अधिक दर्ज किया जा रहा है.
यह समस्या केवल देहरादून तक सीमित नहीं है. ऋषिकेश से लेकर हल्द्वानी तक के शहर इस समय प्रदूषण की चपेट में हैं. नए साल की दस्तक के साथ राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, जिससे सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ा और प्रदूषण में भी इजाफा हुआ. इसके अलावा, चल रहे निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल भी वायुमंडल में बड़ी मात्रा में पहुंच रही है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का सख्ती से पालन और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इन प्रयासों के चलते आने वाले समय में एयर क्वालिटी इंडेक्स में सुधार देखने को मिलेगा और शहरों को साफ हवा की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा.
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