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एम्स जोधपुर की ऐतिहासिक सफलता, 9 माह की बच्ची के कानों में एक साथ कॉक्लियर इम्प्लांट

एम्स जोधपुर ने नौ महीने की बच्ची के दोनों कानों में एक साथ कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की.

AIIMS Jodhpur
AIIMS Jodhpur (ETV Bharat Jodhpur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 8, 2026 at 6:00 PM IST

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जोधपुर: एम्स के ईएनटी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. विभाग की विशेषज्ञ टीम ने महज नौ महीने की एक बच्ची के दोनों कानों में एक ही सत्र में कॉक्लियर इम्प्लांट सफलतापूर्वक लगाए हैं. यह संभवतः भारत के किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में इतनी कम उम्र में की गई पहली ऐसी जटिल सर्जरी है, जिसने पश्चिमी राजस्थान में नए युग की शुरुआत की है.

सर्जरी की चुनौतियाँ और टीम की मेहनत: इतनी छोटी उम्र में यह प्रक्रिया बेहद जटिल होती है, क्योंकि बच्चे में रक्त की मात्रा बहुत कम होती है, खोपड़ी की हड्डियां नरम होती हैं और त्वचा भी अत्यंत पतली होती है. इन सभी चुनौतियों के बावजूद डॉ. अमित गोयल और डॉ. विधु शर्मा की अगुवाई वाली टीम ने सर्जरी को पूर्ण सफलता के साथ अंजाम दिया. एनेस्थीसिया का प्रबंधन डॉ. प्रियंका सेठी ने कुशलतापूर्वक संभाला.

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बच्ची की स्थिति और जांच: बच्ची का जन्म अप्रैल 2025 में जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में हुआ था. जन्म से ही उसके माता-पिता ने देखा कि वह किसी भी आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है. जांच के बाद एम्स जोधपुर पहुंचने पर दोनों कानों में गहन बहरापन की पुष्टि हुई. डॉक्टरों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सर्जरी का निर्णय लिया, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि कॉक्लियर इम्प्लांट के सर्वोत्तम परिणाम तब मिलते हैं जब इसे जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी किया जाए.

विशेषज्ञों की राय और महत्व: डॉ. अमित गोयल ने बताया कि यह सर्जरी बच्ची के भविष्य को पूरी तरह बदलने वाला कदम था. एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि नवजात श्रवण परीक्षण और आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन में लौटाने का सबसे प्रभावी तरीका है. सर्जरी के बाद बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब उसका पोस्ट-ऑपरेटिव उपचार तथा स्पीच थेरेपी शुरू की जा रही है, ताकि वह जल्द ही सुनने और बोलने की क्षमता हासिल कर सके.

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