उत्तराखंड में पहली बार होगा बड़ा AI समिट, 90 दिन का हैकाथॉन भी होगा लॉन्च
उत्तराखंड में होने वाले एआई समिट में देश की कई बड़ी टेक कंपनियों के CEO, टेक जगत के प्रतिष्ठित लोग और इंडस्ट्री लीडर शामिल होंगे

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : September 2, 2026 at 2:02 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में IT और AI के क्षेत्र में नए इकोसिस्टम को विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के देवभूमि AI समिट का आयोजन किया जाएगा. 9 अक्टूबर को देहरादून में होने वाले इस समिट में देशभर से AI स्टार्टअप, टेक कंपनियों के प्रतिनिधि, इंडस्ट्री लीडर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, इनोवेटर्स और छात्र हिस्सा लेंगे. आयोजन का उद्देश्य केवल AI के इस्तेमाल पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में ऐसा तकनीकी माहौल तैयार करना है.
AI के क्षेत्र में उत्तराखंड को नई पहचान देने की तैयारी: देवभूमि AI समिट का आयोजन उत्तराखंड के IT विभाग और ITDA के सहयोग से Axocom कंपनी कर रही है. आयोजक और Axocom के सदस्य प्रणव पांडे के मुताबिक, उत्तराखंड को AI के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए सरकार और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच सहयोग जरूरी है. उन्होंने बताया वह मूल रूप से उत्तराखंड से हैं. उनकी टीम प्रदेश में मजबूत तकनीक और AI इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है.
प्रणव पांडे ने कहा इसी विजन के तहत देवभूमि AI समिट के साथ उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन का भी आयोजन किया जा रहा है. इसमें छात्र, इनोवेटर्स, इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स और सरकार एक मंच पर आएंगे. प्रदेश की वास्तविक समस्याओं के तकनीक आधारित समाधान तैयार करने का प्रयास करेंगे. उनके मुताबिक, AI आज केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि नया टेक्नोलॉजी इंटरफेस बन चुका है. ऐसे में उत्तराखंड सरकार की कोशिश है कि प्रदेश AI नेटिव स्टेट के रूप में आगे बढ़े. AI की क्षमताओं का इस्तेमाल राज्य के विकास के लिए किया जाए.
देशभर से जुटेंगे टेक एक्सपर्ट और AI स्टार्टअप: समिट में देश की कई बड़ी टेक कंपनियों के CEO, टेक जगत के प्रतिष्ठित लोग और इंडस्ट्री लीडर शामिल होंगे. इसके अलावा देशभर से AI पर काम कर रहे स्टार्टअप और इनोवेटर्स को भी मंच उपलब्ध कराया जाएगा. समिट में उत्तराखंड के संदर्भ में AI की संभावनाओं, इसके इस्तेमाल और भविष्य के विस्तार पर चर्चा होगी. खासतौर पर यह देखा जाएगा कि AI का इस्तेमाल सरकारी सेवाओं, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में किस तरह किया जा सकता है.
आयोजक प्रणव पांडे का कहना है कि उत्तराखंड में पैदा होने और यहां बड़े होने के नाते उनकी कोशिश प्रदेश की प्रतिभाओं के लिए ज्यादा अवसर तैयार करने की है. उनका लक्ष्य है कि उत्तराखंड ऐसा राज्य बने जहां तकनीक और AI का इस्तेमाल सिर्फ बाहर से लाई गई तकनीक के तौर पर न हो, बल्कि यहां के युवा खुद नए AI समाधान तैयार करें.
90 दिन का हैकाथॉन, सीधे सरकारी विभाग देंगे समस्या: AI समिट की सबसे खास कड़ी 90 दिन का हैकाथॉन होगा. आयोजकों के मुताबिक यह सामान्य हैकाथॉन से अलग होगा, क्योंकि इसमें प्रतिभागियों को काल्पनिक समस्याओं के बजाय सीधे सरकारी विभागों की वास्तविक चुनौतियों पर काम करना होगा. करीब एक दर्जन सरकारी विभाग अब तक अपनी ऐसी समस्याएं सामने रख चुके हैं, जिनके लिए वे AI आधारित समाधान चाहते हैं. कॉलेजों को भी इस पहल से जोड़ा गया है. छात्र व स्टार्टअप मिलकर इन समस्याओं के समाधान पर काम करेंगे.
प्रणव पांडे ने उदाहरण देते हुए बताया कि ITDA की ओर से ऐसा AI चैटबॉट तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है, जिसके जरिए सरकारी जानकारी और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी लोगों को आसानी से मिल सके. यानी नागरिक को अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों और सूचनाओं को तलाशने के बजाय AI आधारित सिस्टम के जरिए जानकारी उपलब्ध कराई जा सके. खास बात यह है कि अगर किसी प्रतिभागी या स्टार्टअप का समाधान संबंधित सरकारी विभाग को उपयोगी लगता है तो उसे आगे विकसित करने के लिए सरकार की ओर से फंडिंग और अन्य तरह की मदद भी उपलब्ध कराई जा सकती है.
AI और डिजिटल इकोसिस्टम पर सरकार का फोकस: उत्तराखंड के IT मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा आने वाला दौर डिजिटल इंडिया के साथ-साथ AI का है. मुख्यमंत्री का उद्देश्य है कि आध्यात्मिक पहचान रखने वाला उत्तराखंड डिजिटल और AI के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाए. उन्होंने कहा प्रदेश सरकार AI और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रही है. अक्टूबर में होने वाला AI समिट और हैकाथॉन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. सरकार की कोशिश AI का सकारात्मक और जनहित में इस्तेमाल सुनिश्चित करने की है.
उत्तराखंड के IT मंत्री प्रदीप बत्रा के मुताबिक उत्तराखंड में IT और AI के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं. देहरादून और रुड़की जैसे शहर पहले से शिक्षा के बड़े केंद्र हैं. प्रदेश के युवा देश-दुनिया में IT और तकनीक के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के जरिए उन्हें वैश्विक टेक इंडस्ट्री से जोड़ने का अवसर मिलेगा.

कनेक्टिविटी बनी चुनौती, नए डेटा सेंटर की तैयारी: सरकार के डिजिटल और AI आधारित उत्तराखंड के विजन के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. हिमालयी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी बड़ी चुनौती है. इस पर प्रदीप बत्रा ने कहा पहाड़ी राज्य होने के कारण ऐसी चुनौतियां स्वाभाविक हैं, लेकिन सरकार लगातार इनसे निपटने के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा नई तकनीकों के आने से कनेक्टिविटी से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान के रास्ते भी खुले हैं. इसके साथ ही प्रदेश में नया डेटा सेंटर स्थापित करने की तैयारी भी चल रही है. 9 अक्टूबर को होने वाला देवभूमि AI समिट उत्तराखंड के लिए सिर्फ एक तकनीकी आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश को IT, AI और इनोवेशन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.
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