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AI से सुरक्षित व स्मार्ट बन रहा दिल्ली मेट्रो, पटरियों से ओवरहेड तार तक हो रही हाईटेक निगरानी, जानें कैसे

पिंक व मैजेंटा लाइनों पर एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम लगाया गया है, जो फुटेज का विश्लेषण कर खामियों को खुद से चिह्नित करता है.

दिल्ली मेट्रो
दिल्ली मेट्रो (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : February 26, 2026 at 5:23 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट- धनंजय वर्मा

नई दिल्ली: दिल्ली एनसीआर की जीवनरेखा बन चुकी दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) अब सिर्फ तेज व समयबद्ध यात्रा का ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट व सुरक्षित संचालन का भी मॉडल बन रही है. परिचालन दक्षता, यात्री सुरक्षा व सेवा गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए डीएमआरसी तेजी से एआई तकनीकों को अपने सिस्टम में शामिल कर रहा है. दिल्ली मेट्रो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए रेल ट्रैक और ओवरहेड इलेक्ट्रिक तार की गिगरानी की जा रही है, जिससे संभावित खतरे का पता लगाकर उसे ठीक किया जा सके.

ओवरहेड तारों की निगरानी में AI की भूमिका: डीएमआरसी के प्रिंसिपल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुज दयाल के मुताबिक, डीएमआरसी ने अपने ओवरहेड इक्विपमेंट नेटवर्क की निगरानी के लिए उन्नत एआई सिस्टम लागू किए हैं. रेड, येलो ब्लू लाइनों पर पैंटोग्राफ कोलिजन डिटेक्शन सिस्टम (PCDS) लगाया है. हाई रेजोल्यूशन और नाइट विजन कैमरे से यह सिस्टम ट्रेन के पैंटोग्राफ और ओवरहेड तार के बीच संपर्क की लगातार निगरानी करता है. इसके जरिए तारों की एलाइनमेंट गड़बड़ी या हार्ड पॉइंट जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान हो जाती है. वहीं पिंक व मैजेंटा लाइनों पर एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम लगाया गया है, जो चलती ट्रेनों से रिकॉर्ड फुटेज का विश्लेषण कर ओवरहेड नेटवर्क में संभावित खामियों को खुद से चिह्नित कर कंट्रोल रूम को सूचना दे देता है.

AI से सुरक्षित रहा दिल्ली मेट्रो (ETV Bharat)

पहियों व ट्रैक की भी स्मार्ट निगरानी: वहीं ट्रेन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पिंक लाइन पर ऑटोमैटिक व्हील प्रोफाइल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है. ये हाई-प्रिसिजन लेजर सेंसर की मदद से चलती ट्रेन के पहियों की स्थिति का लगातार स्कैन करता है. इसके अलावा पिंक व मैजेंटा लाइनों पर एक्सल बेयरिंग टेम्परेचर मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू किया गया है, जिससे अधिक तापमान जैसी जोखिमपूर्ण स्थितियों की तुरंत पहचान हो सके. ग्रीन व वायलेट लाइनों पर ट्रैक सर्किट के लिए एआई आधारित प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम शुरू किया गया है. इससे संभावित खराबी का अनुमान पहले ही लगाकर ट्रेन देरी व ऑन-ट्रैक मरम्मत हस्तक्षेप को काफी कम किया जा रहा है.

सुरक्षित व निर्बाध सफर मिलेगा: डीएमआरसी के जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि आने वाले समय में डीएमआरसी व अधिक अत्याधुनिक एआई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. विशेषज्ञों के साथ सहयोग व कर्मचारियों के प्रशिक्षण के जरिए मेट्रो नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित, स्मार्ट व विश्वस्तरीय बनाने की योजना है. एआई आधारित इन पहलों से न सिर्फ मेट्रो संचालन अधिक विश्वसनीय होगा, बल्कि यात्रियों को भी सुरक्षित और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा.

एक नजर में दिल्ली मेट्रो

  • दिल्ली मेट्रो रोजाना 65 लाख से अधिक यात्रियों को सुरक्षित और तेज यात्रा सुविधा प्रदान करता है.
  • पूरी मेट्रो प्रणाली नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के अनुरूप आधुनिक तकनीक से लैस है.
  • पूरे नेटवर्क में 29 इंटरचेंज स्टेशन हैं, जो निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करते हैं.
  • मेट्रो सेवाओं की समयपालन दर 99.9% है, जो इसकी विश्वसनीयता दर्शाती है.
  • एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की गति 120 किमी/घंटा तक है. एयरपोर्ट 20 मिनट में पहुंचा जा सकता है.
  • दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 395 किलोमीटर तक फैली हुई है.
  • पूरे क्षेत्र में मेट्रो के 289 स्टेशन यात्रियों को व्यापक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराते हैं.
  • सिस्टम में 360 से अधिक ट्रेन सेट और लगभग 2300 से ज्यादा कोच संचालित हैं.
  • दिव्यांगजनों के लिए मेट्रो में पूरी तरह बैरियर-फ्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

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