अब बिहार के इंजीनियरिंग छात्रों के लिए AI पढ़ना होगा अनिवार्य
बिहार के छात्रों के लिए अच्छी खबर है. इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एआई की पढ़ना अनिवार्य कर दी गई है. पढ़ें खबर

Published : February 20, 2026 at 8:54 PM IST
पटना : राज्य में विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षा लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत राज्य के सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एआई से जुड़े कोर्स अनिवार्य कर दिए गए हैं. यह पहल नैसकॉम के सहयोग से की जा रही है, ताकि छात्रों को भविष्य के कौशलों से जोड़ा जा सके और उनकी रोजगार क्षमता को मजबूत किया जा सके.
22 जनवरी को हुआ MOU : बिहार तकनीकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. बिजेंद्र कुमार ने बताया कि 22 जनवरी को यूनिवर्सिटी और नैसकॉम के बीच एमओयू हुआ था. उन्होंने कहा कि नैसकॉम के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े 400 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं, लेकिन बिहार के लिए इनमें से 56 एआई आधारित कोर्स को मंजूरी दी गई है.
''वर्तमान में राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 34 विधाओं में पढ़ाई हो रही है, जिनमें कई ब्रांच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग से जुड़ी हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सभी स्ट्रीम के छात्रों के लिए एआई कोर्स को अनिवार्य किया गया है.''- डॉ. बिजेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक, बिहार तकनीकी विश्वविद्यालय
भविष्य में क्रेडिट सिस्टम में शामिल होगा एआई : डॉ. बिजेंद्र कुमार ने बताया कि चाहे सिविल इंजीनियरिंग हो या मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सभी ब्रांच के छात्रों को एआई से संबंधित कोर्स करना होगा. इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों को फ्री ऑफ कॉस्ट एआई कोर्स कराए जाएंगे.
फिलहाल नैसकॉम की ओर से इन कोर्स को सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन विश्वविद्यालय की कोशिश है कि भविष्य में इन्हें क्रेडिट सिस्टम में शामिल किया जाए और ऑफलाइन मोड में क्लासरूम पढ़ाई के रूप में शुरू किया जाए. विश्वविद्यालय यह भी चाहता है कि आगे चलकर इन कोर्स के अंक छात्रों की परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में भी शामिल हों, ताकि छात्रों को अपने सीवी में अलग से एआई सर्टिफिकेट को अपलोड करने की जरूरत ना पड़े.
56 प्रकार के AI कोर्सेज है उपलब्ध : उन्होंने बताया कि अभी जो नैसकॉम यानी नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनी की ओर से 56 प्रकार के एआई आधारित कोर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वे सभी ऑनलाइन मोड में कराए जाएंगे. इन कोर्स का मॉडल अलग-अलग है. कुछ कोर्स 40 घंटे के हैं, जबकि कुछ 200 घंटे से अधिक अवधि के हैं. कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को अलग से सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई और रोजगार में लाभ मिल सकेगा.
शिक्षा में नवाचार को देखते हुए पहल : वहीं बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में नवाचार को देखते हुए राज्य के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई आधारित कोर्स अनिवार्य किए गए हैं. उन्होंने बताया कि नैसकॉम के साथ करार इसी उद्देश्य से किया गया है कि छात्रों की शिक्षा समय और बाजार की मांग के अनुरूप हो सके.
''डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के इस दौर में बिहार के छात्र पीछे न रहें, इसके लिए यह पहल की गई है. यह व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू कर दी गई है.''- सुनील कुमार, शिक्षा मंत्री, बिहार
'तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम' : शिक्षा मंत्री के ने कहा कि सरकार का मानना है कि इससे छात्रों को आधुनिक तकनीकों की समझ मिलेगी और वे देश-दुनिया के तकनीकी विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे. राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई कोर्स को अनिवार्य करना बिहार की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में छात्रों की स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर दोनों मजबूत होंगे.
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