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जोधपुर के किसान दिलीप सिंह ने विकसित किया खारे पानी का 'चुम्बकीय' समाधान, नाम दिया मैग्नेटिक वाटर कंडीशनर

जोधपुर के किसान दिलीप सिंह गहलोत ने कृषि के क्षेत्र में एक नवाचार किया है. पढ़िए...

जोधपुर के किसान दिलीप सिंह गहलोत
जोधपुर के किसान दिलीप सिंह गहलोत (ETV Bharat Jodhpur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : March 3, 2026 at 2:55 PM IST

5 Min Read
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मनोज वर्मा

जोधपुर : खेतों के घटते जल स्तर के कारण पश्चिमी राजस्थान में कई जगह पर फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है. इतना ही नहीं गहरी पाताल से पानी ट्यूबवेल द्वारा निकालकर खेतों में सिंचाई करने से पानी में मौजूद क्षारीयता बढ़ने के कारण जमीन की उपजाऊ शक्ति प्रभावित हो रही है. इस समस्या का समाधान जोधपुर के प्रगतिशील किसान दिलीप सिंह गहलोत ने खोजा है. करीब 10 साल की तक मेहनत और कई प्रयोग के बाद में दिलीप सिंह ने पानी में मौजूद क्षारीय तत्वों को तोड़ने के लिए एक यंत्र तैयार कर लिया है, जिसे मैग्नेटिक वाटर कंडीशनर नाम दिया गया है. इसके लिए न बिजली खर्च होती है और न ही किसी तरह का ईंधन.

इस तरह से काम करता है यंत्र : किसान दिलीप ने बताया कि स्टील के पाइप में मैग्नेटिक फील्ड तैयार करने के लिए बड़े पाइप में एक छोटा पाइप लगाया जाता है. इस छोटे पाइप पर उसके व्यास के मुताबिक चुम्बक लगाई जाती है. यह चुम्बक सामान्य चुम्बक नहीं होता है, बल्कि नियोडिमियम चुम्बक होता है, जिसे सबसे सबसे शक्तिशाली चुम्बक माना जाता है. यह एमआरआई और हार्ड ड्राइव में काम आता है. यह चुम्बकीय क्षेत्र तेजी से बनाता है. इस यंत्र में भी ट्यूबवेल की पाइप को साइज के अनुरूप ही अंदर का पाइप लगता है, जिसके ऊपर चुंबक लगा कर बड़े पाइप में फिट कर दिया जाता है. छोटे पाइप को पानी की लाइन से जोड़ दिया जाता है. पानी जब चुम्बक लगे पाइप से निकलता है तो उसके क्षारीय तत्व की आयन चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में आकर टूट जाते हैं.

किसान दिलीप सिंह से बातचीत (ETV Bharat Jodhpur)

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कृषि अनुसंधान संस्थान ने किया सम्मानित : प्रगतिशील किसान दिलीप सिंह गहलोत की इस सफलता को जांचने के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने प्रतिष्ठित 'नवोन्मेषी किसान पुरस्कार' (IARI-Innovative Farmer Award) से सम्मानित किया है. गहलोत बताते हैं कि 2022 से उन्होंने इस यंत्र को किसानों को बनाकर देना शुरू कर दिया. केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर ने इसके लिए सम्मानित किया था. इस बार भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने यंत्र पहले मंगवा कर जांचा उसके बाद अवार्ड दिया. गहलोत ने बताया कि संस्थान ने कहा था कि किसानों के लिए किए गए कार्य उनकी ओर से अधिकृत किए जाते हैं, इसके लिए पेटेंट की आवश्यकता नहीं है.

किसान का नवाचार
किसान का नवाचार (ETV Bharat GFX)

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टूटे हुए आयन भी होते हैं कारगर : किसान ने बताया कि क्षारीय और भारी पानी में कई तरह के तत्व का जोड़ होता है. जैसे सोडियम क्लोराइड दोनों साथ रहने से पानी में क्षार पैदा करते हैं, जबकि अलग-अलग होने से यह जमीन और पौधे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं. इस यंत्र पाइप से गुजरने वाला लवणीय जल 'चुम्बकीय जल' में परिवर्तित हो जाता है. वैज्ञानिक रूप से यह जल मिट्टी और पौधों की जड़ों की ओर से अधिक तेजी से अवशोषित किया जाता है, जिससे खारे पानी के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं और फसल की वृद्धि बेहतर होती है.

पहले विकसित किया बेर
पहले विकसित किया बेर (Source : Dilip Singh Gehlot)

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पहले विकसित किया बेर : दिलीप सिंह गहलोत का नवाचारों से नाता पुराना है. वर्ष 2016 में उन्हें राजस्थान सरकार की ओर से 'राज्य स्तरीय कृषि सम्मान' से नवाजा गया था. उस समय उन्होंने बेर की एक ऐसी उन्नत किस्म तैयार की थी, जिसमें एक बेर का वजन लगभग 200 ग्राम तक था. इस किस्म को उन्होंने 'दिलीप बेर' का नाम दिया. यह उनके कौशल की ही मिसाल है कि आज उनकी ओर से विकसित 'दिलीप बेर' के पौधे देश के गौरव राष्ट्रपति भवन के उद्यानों की शोभा बढ़ा रहे हैं.

इस तरह काम करता है यंत्र
इस तरह काम करता है यंत्र (ETV Bharat GFX)

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खारे पानी का 'चुम्बकीय' समाधान : चुंबकीय क्षेत्र विकसित करने के लिए स्टील और तांबे की पाइप पर 5000 से 14000 गॉस के शक्तिशाली चुंबक का उपयोग होता है. ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी के पाइप के आकार से यह यंत्र बनता है. दो इंच से पांच इंच तक के पाइप के लिए यंत्र का खर्च 20 से 30 हजार आता है. 20 साल तक यह यंत्र काम करता है. 304 ग्रेड का स्टील और नियोडिमियम चुंबक लगा होने से पानी से खराब नहीं होता है. दिलीप सिंह गहलोत पूर्व में 9 से 11 इंच लम्बी गेहूं की बालियां की किस्म डीजी - II विकसित कर चुके हैं.

प्रतिष्ठित 'नवोन्मेषी किसान पुरस्कार' से सम्मानित
प्रतिष्ठित 'नवोन्मेषी किसान पुरस्कार' से सम्मानित (ETV Bharat Jodhpur)