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आगरा हादसे की इनसाइड स्टोरी: 81 मेडिकल कॉलेज वाले यूपी में मासूम की जान किसने ली...

यूपी के आम आदमी की सेहत का असली सच क्या है? पढ़िए अनिल कुमार पाण्डेय के संपादन में श्यामवीर सिंह की रिपोर्ट...

Agra Medical College Tragedy
एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन आगरा की इमारत जर्जर. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 31, 2026 at 4:30 PM IST

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आगरा: आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी के बच्चा वार्ड की छत का प्लास्टर गिरने और दस वर्षीय मासूम की मौत का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. कहें तो यह हादसा सिर्फ एक अस्पताल की छत टूटने का नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के दावों और जमीनी हकीक़त के बीच टूटते भरोसे की कहानी है. जिसमें एक तरफ राज्य में 81 मेडिकल कॉलेजों का जाल बिछ रहा है, 1500 से ज्यादा हेल्थ सेंटर्स खुल रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की इमारतें जर्जर हैं. बेड पर चादरें मैली हैं और डॉक्टरों की कुर्सियां खाली हैं. बुनियादी बदहाली और महानगरों के बड़े संस्थानों (AIIMS-PGI) की दूरी के बीच पिसते यूपी के आम आदमी की सेहत का असली सच क्या है?

एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन आगरा की जर्जर इमारत. (ETV Bharat)

बता दें कि एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में 21 अगस्त को एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बच्चा वार्ड में छत से गिरे प्लास्टर से भर्ती 10 वर्षीय उमेर घायल हो गया था. उसके सिर और गर्दन पर प्लास्टर गिरा था. जिससे गंभीर हालत में बच्चे को आईसीयू में भर्ती कराया गया था. मगर, 22 अगस्त की सुबह उपचार के दौरान उमेर की मौत हो गई. जिस पर परिजन शव लेकर अपने गांव चले गए. उन्होंने शव का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया.

वहीं बच्चे के ऊपर छत का प्लास्टर गिरने और मासूम की मौत को लेकर गरीब सेना के बाल योगी, समाजवादी पार्टी महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास और कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष अमित सिंह ने हंगामा किया. एसएन मेडिकल कॉलेज पर गंभीर आरोप लगाए. मामला लखनऊ तक पहुंच गया. शासन ने वार्ड में प्लास्टर गिरने और बच्चे की मौत पर रिपोर्ट तलब की.

Agra Medical College Tragedy
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में इमारत जानलेवा. (ETV Bharat)

हादसे से नहीं, बीमारी से हुई थी बच्चे की मौत - प्राचार्य

एसएनमएसी के प्राचार्य डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि मूलत: अलीगढ़ और हाल निवासी खंदारी के नसीराबाद निवासी डीवीवीएनएल में अधिशासी अभियंता आमिर अजहर खान ने गंभीर हालत में बेटा उमेर भर्ती कराया था. जब इमरजेंसी के बच्चा वार्ड की छत से प्लास्टर गिरा. तब बच्चा उमेर वार्ड में भर्ती था. उस पर ही प्लास्टर गिरा था. इस हादसे और बच्चे की मौत की रिपोर्ट शासन को भेज दी है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज में कई इमारतें जर्जर. (ETV Bharat)

छत पर बारिश का पानी भरने से सीलन हुई. जिससे ही छत का प्लास्ट गिर गया था. वार्ड की मरम्मत का काम किया जा रहा है. बच्चे की मौत छत का प्लास्टर गिरने से लगी चोट से नहीं हुई थी. बच्चे की मौत की वजह उसकी गंभीर बीमारी थी. बच्चे को गंभीर निमोनिया था. उसे लगातार दौरे पड़ रहे थे. जांच कराने पर ब्लड कम निकला, तो ब्लड भी चढ़ाया गया. बच्चे का जब सीटी स्कैन कराया, तो पता चला था कि बच्चा वेस्ट सिंड्रोम से ग्रसित था. जिसकी वज़ह से उसकी हालत गंभीर होती चली गई, और उसकी मौत हो गई.

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एसएन मेडिकल कॉलेज में इमारत जर्जर. (ETV Bharat)

सेफ्टी ऑडिट पूरी, जांच रिपोर्ट पर प्लानिंग करके मरम्मत कार्य

एसएनएमसी के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएनएमसी की इमरजेंसी, बाल रोग विभाग, मेडिसिन विभाग भवन, कैंसर रोग विभाग भवन, नेत्र रोग विभाग, एकेडमिक ब्लॉक का सेफ्टी ऑडिट कराई गई है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था. (ETV Bharat)

इन भवनों के सेफ्टी ऑडिट पांच सदस्यीय कमेटी ने की है. जिसमें उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह, डॉ. मनीष बंसल के साथ ही लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर अखिलेश व स्वदेश शामिल हैं.

कमेटी ने जांच पूरी कर ली है. जल्द ही रिपोर्ट मिल जाएगी. सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी. इसके साथ ही एसएनएमसी में जिस भी भवन या वार्ड में किसी भी तरह की मरम्मत की ज़रूरत होती है. उसे लगातार किया जाता है. अभी कई वार्ड में काम चल रहा है.

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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की आंख खोलती तस्वीर. (ETV Bharat)

इसके साथ ही सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर इन पांच भवनों में मरम्मत कार्य प्लानिंग करके कराया जाएगा. अभी इमरजेंसी के बच्चा वार्ड को बंद कर दिया है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज , आगरा. (ETV Bharat)

सिस्टम की लापरवाही बनी जानलेवा

एसएन मेडिकल कॉलेज 1854 में बना था. मगर, अभी मेडिकल कॉलेज में इतनी पुराना कोई भवन नहीं हैं. अंग्रेजों के जमाने के अधिकतर भवन जमींदोज करके दूसरे भवन बनाए गए हैं या बनाने का काम चल रहा है.

एसएनएमसी की इमरजेंसी बिल्डिंग सन 2004 में बनी थी. 22 साल बाद ही बिल्डिंग का प्लास्टर गिरने लगा है. ये सिस्टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार की वज़ह से हुआ है. एसएनएमसी हर साल अधिकतर बिल्डिंग की मरम्मत कराता है. जिस पर सालाना करीब 30 से 40 लाख रुपये खर्च होते हैं. जिसमें जर्जर भवनों की मरम्मत और अन्य ज़रूरी कार्य शामिल हैं.

Agra Medical College Tragedy
आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज. (ETV Bharat)

अभी बात करें तो एसएनएमसी में 60 साल से अधिक पुराने भवन दो मंज़िला बाल रोग विभाग, मेडिसिन विभाग भवन, कैंसर रोग विभाग और नेत्ररोग विभाग हैं. जिनके भवन भी जर्जर हैं. जिनमें कभी बड़ा हादसा हो सकता है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा. (ETV Bharat)

एसएन मेडिकल कॉलेज की आठ मंजिला सर्जरी बिल्डिंग का बजट लगभग 80 करोड़ से अधिक था. जिसका काम 2009 में शुरू हुआ था. सन 2016 में बिल्डिंग बनकर तैयार हुई. दस साल से कम समय में ही बिल्डिंग जर्जर होने लगी है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन आगरा. (ETV Bharat)

पहले बिल्डिंग का ड्रेनेज सिस्टम बदहाल हुआ. इसके बाद लगातार भवन में प्लास्टर गिर रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं. आठ मंजिला भवन की दीवारों से टाइल्स गिरते हैं. जिससे कभी बड़ा हादसा हो सकता है.

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एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन आगरा, जहां बच्चे ने तोड़ा दम. (ETV Bharat)

मरीज़ को देखने आए खेरागढ़ निवासी अरविंद ने बताया कि चार माह पहले एसएनएमसी के तमाम भवन को लेकर कांग्रेस नेता रामनाथ सिकरवार ने आवाज़ उठाई थी. भवनों के जर्जर होने और भ्रष्टाचार को उज़ागर किया था. वह पूरी तरह से सही था.

अरविंद ने कहा कि सर्जरी बिल्डिंग की दीवारों से टाइल्स, प्लास्टर और पत्थर गिर रहे हैं. जिससे पोस्टमार्टम हाउस आने वाले लोगों के साथ ही तीमारदार भी चोटिल हो जाते हैं. अभी मेरे सामने ही यहां से गुज़र रहे एक व्यक्ति पर टाइल्स गिरी. यहां से गुजरने में भी डर लगता है.

Agra Medical College Tragedy
एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन आगरा की जर्जर इमारत. (ETV Bharat)

उपचार से ज्यादा जांच पर जोर

कुछ समय पहले ही एसएनएमसी में बाहरी व्यक्ति के जांच करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिस पर एसएनएमसी की ओर से सख्त कार्रवाई भी की गई थी. इस बारे में खेरागढ़ से आए तीमारदार राकेश ने बताया कि तीन दिन पहले यहां पर आया हूं. तभी एक बार अपने मरीज को देख पाया हूं. अब मरीज़ को किसी को देखने नहीं दे रहे हैं. हर 30 मिनट में जांच करा रहे हैं.

बाहर से दवाइयां खरीद रहे

मथुरा के आए तीमारदार रहीस ने बताया कि अभी तक हमारे मरीज़ को बोतल ही चढ़ रही है. कोई सुनवाई नहीं कर रहा है. मरीज़ की हालत गंभीर होती जा रही है. मरीज़ को लीवर संबंधी बीमारी है. वार्ड में मौजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ हर बात अनसुना कर रहे हैं.

तीमारदार दिनेश ने बताया कि डॉक्टर्स ने मरीज़ को माइंड की टीबी बताई है. जिसका उपचार मेडिसन विभाग के वार्ड में चल रहा है. वार्ड में बैड भी सही है. मगर, दवाइयां और जांच भी बाहर से कराकर लानी पड़ रही हैं.

तीमारदार जगतपाल ने बताया कि एटा से बेटी चांदनी का उपचार करने यहां पर आया हूं. वार्ड में बेटी भर्ती है. उसका उपचार चल रहा है. कुछ दवाएं हर दिन बाहर से लानी होती है. इलाज़ भी सही नहीं हो रहा है. हम बताते हैं तो कोई सुनवाई नहीं करने वाला है. चिल्ला कर भगा देते हैं.

Agra Medical College Tragedy
एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन की इमारत. (ETV Bharat)

'हादसा हुआ तो, हमारी ज़िम्मेदारी नहीं'

तीमारदार दिनेश ने बताया कि पहले पहली मंज़िल पर मरीज़ था. उसे अब नीचे के वार्ड में शिफ्ट किया है. जहां पर उपचार चल रहा है. जहां वार्ड में छत का प्लास्टर चटका हुआ था. जिस पर मरीज़ और हमें वहां से हटा दिया. कहा कि यह गिरने वाला है. इसलिए, दूसरे बेड पर शिफ्ट कर दिया. कहा कि हादसा हुआ तो इसकी हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है.

साफ-सफाई कम, घूमते हैं कुत्ते

बता दें कि एसएनएमसी की अव्यवस्थाओं की फोटो और वीडियो कई बार सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं. जिसमें मेडिकल कॉलेज की तमाम बिल्डिंग में साफ-सफाई सही नहीं है. टॉयलेट्स भी गंदे रहते हैं. भवन का ड्रेनेज सिस्टम ख़राब है. इतना ही नहीं, कई बार वार्ड में आवारा कुत्तों के वीडियो भी वायरल हुए हैं.

Agra Medical College Tragedy
एसएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन आगरा. (ETV Bharat)

अस्पतालों की छतें सुरक्षित नहीं

मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश के सुनहरे भविष्य की तस्वीर दिखाती है, लेकिन जब तक वर्तमान में चल रहे अस्पतालों की छतें सुरक्षित नहीं होंगी, डॉक्टरों की कमी दूर नहीं होगी और गांवों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज़ नहीं मिलेगा, तब तक ये इमारतें सिर्फ कंक्रीट का ढांचा बनकर रह जाएंगी.

आगरा में मासूम की मौत कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारे पूरे हेल्थ सिस्टम के लिए एक वेक-अप कॉल है. चमचमाती फाइलों और विज्ञापनों से इतर, ज़मीन पर सांसें बचाना ही असली विकास है.